किसको मिलता हैं माता का प्यार?
जन्म पत्रिका में माता एवं सुख का स्थान एक ही होता है। यह होता है चतुर्थ भाव। इसी स्थान से मातृ सुख एवं सांसारिक सुख के संबध में विचार होता है। अर्थात जिसको माता का सुख का मिलता है, वही संसार में अन्य सुखों को भोग पाता है। जिस लग्न कुंडली का चतुर्थ भाव खराब हो जाता है। वह जातक मातृ एवं संसारिक सुख दोनो से वंचित हो जाता है।

जन्म पत्रिका के चतुर्थ भाव में मित्रगत स्वराशि या स्वयं की राशि में गुरु, बुध, चंद्र, शुक्र आदि सौैम्य ग्रह हो तो जातक मां के सुख के साथ ही अन्य सुखों को भी प्राप्त करता है। उसी तरह चतुर्थ भावा शुभ ग्रहों से दृष्ट हो तो माता तथा अन्य सुखों की प्राप्ती होती है। स्त्रियों की कुंडली में यह स्थान सास के साथ उसके संबधों को दर्शाता है। स्त्री कुंडली का चतुर्थ भाव अच्छा हो तो उसे माता और ससुराल दोनों जगह मान सम्मान मिलता है। वहीं इस स्थान पर अशुभ ग्रहों का प्रभाव होने से असर विपरित हो जाता है।

चतुर्थ भाव में सूर्य शुभ होने पर जातक की माता उच्च पद वाली दंबग महिला होती है। गुरु शुभ होने पर धार्मिक स्वभाव की, शुक्र हो ता तेजस्विनी, बुध हो तो बुद्धिमान, चंद्र हो तो अति दयालु, मंगल शुभ हो तो भूमिस्वामी, पोषण करने वाली, शनि हो तो धर्मपरायण, राहु हो तो राजनितिज्ञ, केतु हो तो सात्विक माता होती है।ग्रहों के विपरित होने पर इसके विपरित असर होता है।
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पंडित "विशाल" दयानन्द शास्त्री

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