शुभ फलदायक बुधादित्य योग--फलदायक है बुध-सूर्य युति-----

बुध व्यावहारिकता व ज्ञान को दर्शाता है और सूर्य तेज का कारक है। गोचर में सूर्य-बुध साथ-साथ या आगे पीछे ही होते हैं। यदि यह युति शुभ भावों में हो तो व्यक्ति को व्यावहारिक वृत्ति का बनाती है। ऐसे व्यक्ति अपना काम निकालने में चतुर होते हैं, वाकपटु भी होते हैं। इनकी मनोवृत्ति व्यापारिक होती है।

ऐसे व्यक्ति वाणी के धनी होते हैं, व्यवहारकुशल होने से मित्र-संबंधियों में अच्‍छी साख रखते हैं। कागज-पत्र व्यवस्थित रखने में इनका जवाब नहीं होता। ये व्यक्ति सारे काम व्यवस्थित तरीके से ही करते हैं और विशेषकर कर्जा लेने के कार्य इनके लिए बड़े सरल होते हैं, कागज-पत्र का कोई भी काम अटकता नहीं है।

यह युति लग्न, पंचम, नवम व दशम में विशेष फलदायक होती है व अन्य योग शुभ होने पर व्यक्ति को ऊँचाइयों तक पहुँचाती है।
सूर्य-बुध य‍ुति को बुधादित्य योग भी कहा जाता है। यह युति सिंह लग्न, कन्या लग्न व मिथुन लग्न में अधिक प्रभावकारी होती है क्योंक‍ि ऐसे में सूर्य व बुध दोनों ही लाभकारी भावों के स्वामी होते हैं व यदि यह युति लग्न, पंचम, नवम या दशम में हो तो शुभ प्रभावों का अनुभव होता है।

इसके अतिरिक्त तुला और और वृषभ लग्न के लिए भी यह युति फलदायक होती है यदि पंचम या नवम में हो तो। यह युति जीवन में संघर्ष को कम करती है व प्रयासों के अनुरूप सही समय पर सफलता दिलाती है।

यदि सूर्य व बुध कारक होकर पाप प्रभाव में हो तो इनकी मजबूती के उपाय करने चाहिए। उपायों में गाय को हरा चारा खिलाना व नित्य सूर्य दर्शन करना प्रमुख है।
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पंडित "विशाल" दयानन्द शास्त्री

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