दोस्ती दुनिया की वो ख़ुशी है,
जिसकी ज़रूरत हर किसी को हुई है,
गुजार के देखो कभी अकेले ज़िन्दगी,
खुद जान जाओगे के
दोस्ती के बिना ज़िन्दगी भी अधूरी है.
कीसी का दिल तोड़ना हमारी आदत नहीं
कीसी का दिल दुखाना हमारी फितरत में नहीं
भरोसा रखना हम पर तुमदोस्त कह
कर कीसी को यूँ ,हम बदलते नहीं
हर ख़ुशी दिल के करीब नहीं होती,
ज़िन्दगी गमो से दूर नहीं होती,
ये दोस्त मेरी दोस्ती को संभल कर रक,
सच्ची दोस्ती हर किसी को नसीब नहीं होती.
तेरी दोस्ती हम इस तरह निभाएंगे तुम रोज़ खफा हो
नाहम रोज़ मनायेंगे पर मान जाना मनाने से
वरना यह भीगी पलकें ले के कहा जायेंगे.
इतना प्यार पाया है आप से..
उस से ज्यादा पाने को जी चाहता है.
नजाने वो कौन सी खूबी है आप में.
की आप से दोस्ती निभाने को जी चाहता है.
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पंडित "विशाल" दयानन्द शास्त्री

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