पूर्वमुखी मकान के परिणाम----

पूर्वमुखी मकान में अच्छे-बुरे फल भी मिलते हैं। किसी भी क्षेत्र में, किसी भी दिशा में बना मकान शुभ या अशुभ परिणाम देता है। मकान किस प्रकार बना है, इस बात पर अधिक निर्भर करता है। घर के सामने 'टी' नुमा रास्ता हो तो पूर्व मुखी मकान भी अशुभ परिणाम देगा, जबकि दक्षिण मुखी मकान सुव्यवस्थित बना हो तो उसके परिणाम भी अच्छे मिलते हैं।

पूर्व मुखी मकान के स्वामी पृथ्वी पर मानस का निर्माण करने वाले ब्रह्मा जी हैं, फिर भी इस दिशा में बना मकान अच्छे या बुरे परिणाम देता है। पूर्व मुखी मकान हो और ईशान में रास्ता हो तो उसके शुभ परिणाम नष्ट हो जाएँगे, क्योंकि हम जूते-चप्पल पहनकर आएँगे या वहीं रखेंगे।

मकान पूर्व मुखी हो व ईशान भी ठीक हो, लेकिन घर के अंदर का हिस्सा लंबाई, चौड़ाई, ऊँचाई में बराबर हो तो धनात्मक ऊर्जा नहीं मिलेगी। ऋणात्मक ऊर्जा मिलने से उस घर में रहने वाले मानसिक तनाव से ग्रस्त रहेंगे। यदि मकान कुछ तिरछा या पतंगनुमा हो तब भी शुभ फल नहीं मिलेंगे व अशुभ परिणाम भुगतने पड़ेंगे। यदि ईशान में शौचालय होगा तो आर्थिक कष्ट झेलने पड़ेंगे। मकान की पूर्वी दिशा की दीवार और चबूतरे ऊँचे हों तो घर का स्वामी धन से रहित हो जाएगा। संतान अस्वस्थ, मंदबुद्धि होगी।
पूर्वमुखी मकान में अच्छे-बुरे फल भी मिलते हैं। किसी भी क्षेत्र में, किसी भी दिशा में बना मकान शुभ या अशुभ परिणाम देता है। मकान किस प्रकार बना है, इस बात पर अधिक निर्भर करता है। घर के सामने 'टी' नुमा रास्ता हो तो पूर्व मुखी मकान भी अशुभ परिणाम देगा।


पूर्व दिशा में खाली जगह छोड़े बिना मकान चार दीवारी से सटाकर बना हो तो पुरुष संतान में कमी होती है व संतान विकलांग भी हो सकती है। पूर्व में खाली जगह नहीं छोड़ी हो और पश्चिम में ढलान हो तो वहाँ रहने वालों को आँखों की बीमारी और लकवा हो सकता है। पूर्वी हिस्से में मिट्टी के ढेर, ऊँची चट्टान, टीले, कु्रडा और किसी भी प्रकार की गंदगी हो तो धन व संतान की हानि का सामना करना पड़ता है।

दक्षिण पूर्व दिशा में मुख्य द्वार नहीं होना चाहिए, नहीं तो ग्रह स्वामी धन से रहित कोर्ट-कचहरी के चक्कर में रहने वाला, कर्जदार बन जाता है। मकान के पूर्वी हिस्से में खाली जगह हो तो वंशवृद्धि के साथ-साथ संतान भी लाभ देती है और मकान के पूरे निर्माण कार्य में पूर्वी हिस्सा थोड़ा नीचा रखा गया हो तो वहाँ के रहने वाले धन-संपदा के साथ स्वस्थ भी रहते हैं।

मकान का मुख्य द्वार व अन्य द्वार भी पूर्वाभिमुखी हों तो शुभ परिणाम मिलते हैं। पूर्व दिशा नीची हो व दक्षिण ऊँची हो तो मान-प्रतिष्ठा बढ़ती है। स्वास्थ्य ठीक रहेगा व शांति के साथ सौभाग्‍य की वृद्धि होती है। घर के सामने नाली हो व दक्षिण से उत्तर की ओर जाती हो या पानी की टंकी हो तो शुभ फल मिलते हैं।
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पंडित "विशाल" दयानन्द शास्त्री

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