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(A)लक्ष्मी कमल के फूल पर क्यों विराजित हैं?महालक्ष्मी के चित्रों और प्रतिमाओं में उन्हें कमल के पुष्प पर विराजित दर्शाया गया है। इसके पीछे धार्मिक कारण तो है साथ ही कमल के पुष्प पर विराजित लक्ष्मी जीवन प्रबंधन का महत्वपूर्ण संदेश भी देती हैं।महालक्ष्मी धन की देवी हैं। धन के संबंध में कहा जाता है कि इसका नशा सबसे अधिक दुष्प्रभाव देने वाला होता है। धन मोह-माया में डालने वाला है और जब धन किसी व्यक्ति पर हावी हो जाता है तो अधिकांश परिस्थितियों में वह व्यक्ति बुराई के रास्ते पर चल देता है। इसके जाल में फंसने वाले व्यक्ति का पतन होना निश्चित है।वहीं कमल का फूल अपनी सुंदरता, निर्मलता और गुणों के लिए जाना जाता है। कमल कीचड़ में ही खिलता है परंतु वह उस की गंदगी से परे है, उस पर गंदगी हावी नहीं हो पाती।कमल पर विराजित लक्ष्मी यही संदेश देती हैं कि वे उसी व्यक्ति पर कृपा बरसाती हैं जो कीचड़ जैसे बुरे समाज में भी कमल की तरह निष्पाप रहे और खुद पर बुराइयों को हावी ना होने दें। जिस व्यक्ति के पास अधिक धन है उसे कमल के फूल की तरह अधार्मिक कृत्यों से दूरी बनाए रखना चाहिए। साथ ही कमल पर स्वयं लक्ष्मी के विराजित होने के बाद भी उसे घमंड नहीं होता, वह सहज ही रहता है। इसी तरह धनवान व्यक्ति को भी सहज रखना चाहिए। जिससे उस पर लक्ष्मी सदैव प्रसन्न रहे.
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(B) उल्लू ही क्यों है महालक्ष्मी का वाहन?वैसे तो आज ऐसा कोई नहीं है जिसे लक्ष्मी यानि धन की आवश्यकता ना हो। अधिकांश लोग धन यानि लक्ष्मी के पीछे ही भाग रहे हैं। भगवान विष्णु की अद्र्धांगिनी महालक्ष्मी का वाहन उल्लू है। उल्लू मूर्खता का प्रतिक है। मूर्ख उल्लू ही क्यों है महालक्ष्मी का वाहन?
महालक्ष्मी के वाहन उल्लू से यही स्पष्ट होता है कि बिना सोचे-समझे, अधर्म के कुमार्ग पर चलते हुए जब कोई अनावश्यक धन एकत्र करता है, सबकुछ भुलाकर धन के पीछे भागता है तो उसकी हालत उल्लू के जैसी हो जाती है। अत: धन सदैव धर्म के मार्ग पर चलते हुए ही अर्जित करना चाहिए। जब कोई अधर्म के मार्ग पर चलते हुए धन अर्जित करता है तो उसके पास लक्ष्मी उल्लू पर बैठकर अस्थाई रूप से ही आती है और वैसा धन अनावश्यक कार्यों में खर्च हो जाता है। परंतु सद्ज्ञान और धर्म के मार्ग पर कार्य करते हुए जो धन अर्जन किया जाता है वह धन स्थाई, उन्नति और समृद्धि लेकर आता है। क्योंकि सद्ज्ञान से धार्मिक कार्य करने पर महालक्ष्मी धर्म प्रतिक और अधर्म के शत्रु भगवान विष्णु के साथ गरुड़ पर बैठकर आती है। इस वजह से ऐसा धन सदैव सुख और समृद्धि देने वाला होता है।

पंडित दयानंद शास्त्री ;
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पंडित "विशाल" दयानन्द शास्त्री

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