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जन्म-राशि और व्यक्तित्व (धनु-राशि)..





धनु राशि का स्वामी वृहस्पतिदेव है. वृहस्पति देवगुरु सूचक है. धनु राशि का तत्व अग्नि, द्विस्वभाव अर्द्धजल राशि है. यह पूर्व दिशा का स्वामी है. यह राशि, सतोगुणी व पुरुष राशि है.

इस राशि के लोग पूरे कद के सुगठित देह, कद लम्बा व मस्तक काफी विस्तृत होता है. इनकी भोंहे घनी होती है. नाक लंबी होती है. कुल मिलाकर सुन्दर व्यक्तित्व के होते है. गोल चेहरा, गाल फुले हुए होते है. व स्वस्थ एवं बलवान होते है.
धनु राशि के व्यक्ति आक्रामक स्वभाव के साहसी और परिश्रमी होते है. यह महत्वाकांक्षी एवं उग्र भी हो जाते है. यह कठिन से कठिन समस्याओं को अपने सब्र और साहस और परिश्रम से सुलझाते है. आत्मविश्वास अधिक होता है. अग्नि तत्व राशि होने से स्फूर्ति और जोश अधिक होता है. द्विस्वभाव होने के कारण जल्द निर्णय नहीं ले पाते है. काफी सोच विचार करते है. कभी कभी अभिमान का भी प्रदर्शन करते है. यह उच्च विद्या प्राप्त करते है. यात्रा के शौकीन होते है. गुरु इन्हें उदार हृदयता, आत्मविश्वास, सत्यवादिता और अध्यात्मिक प्रगति देता है.

धनु राशि वाले उन्नति की अधिक इच्छा रखने वाले होते है. व कठोर अनुशासन प्रिय होते है. इस गुण के कारण इनके अधिक शत्रु भी बन जाते है.यह धार्मिक प्रवृति के लोग भी होते है. निष्ठापूर्वक धार्मिक क्रिया कलाप पूरा करते है. और समय समय पर तीर्थ यात्रा भी करते है.यह दानशील, उदार भी होने लगते है. तथा आनंदपूर्वक जीवन व्यतीत करते है.
धनु राशि वाले निस्वार्थी, मेधावी तथा अनेक भाषाओं के ज्ञाता, साहित्य में रूचि रखने वाले होते है. यह व्यक्ति बैंकर, प्रोफ़ेसर, राजनीतिज्ञ, अच्छे सलाहकार, वकील, अध्यापक, व उच्चकोटि के व्यापारी और उपदेशक होते है.
राजनीति, क़ानून, गणित या ज्योतिष विषयों में भी रूचि रखते है.ये धैर्ययुक्त प्रवृति से कार्य क्षेत्र में उन्नति करते है.ये लोग भाषण देते समय पूरी ताकत लगा देते है. यदि यह लोग सैनिक बने तो युद्ध में पीठ नहीं दिखा सकते है. पुलिस, सेना और अच्छे जासूस भी धनु राशि वाले बन सकते है.
यौवनकाल व वैवाहिक जीवन में इस राशि वाले व्यक्ति अधिक संघर्ष करते है.
इनको स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहना चाहिए. इस राशि वालों को फेफड़ों तथा वायु संबंधी रोगों से सावधानी रखनी चाहिए.
यदि इस राशि पर पापी ग्रह, शनि, मंगल, राहू, केतु का प्रभाव हो तो यह धोखेबाज और विश्वासघाती होते है. अपने गुणों का बखान बढ़ चढ कर करते है. अपने आपको महापुरुष होने का ढोंग भी करने लगते है. वचन देकर कभी भी पूरा नहीं करते है.
आपका भाग्य उदय:- 32 वर्ष के बाद सम्भव होता है. 36, 42, 45, 54, 63, 72, एवं 81वां वर्ष प्रभावशाली व भाग्यवर्धक वर्ष होते है.
मित्र राशि:- मेष व सिंह,
शत्रु राशि:- कर्क, वृश्चिक और मीन,
अनुकूल रत्न:- पुखराज,
शुभ दिन:- वृहस्पतिवार,
अनुकूल देवता:- भगवान विष्णु जी,
अनुकूल अंक:- 3,
अनुकूल तारीखें:- 3, 12, 30,
व्यक्तित्व:- गुणग्राही प्रवृति, अध्ययनप्रियता,
सकारात्मक तथ्य:- बुद्धिवादी, तर्क, लक्ष्य प्राप्ति की और सचेष्ट,
नकारात्मक तथ्य:- अतिधूर्तता, अव्यव्हारिता,
नाम अक्षर:- ये, यो, भा, भी, भू, ध, फ, ढ, भे,
धनु राशि वालों का सौभाग्यशाली रत्न पुखराज है. जिसे पहन कर ये अपने जीवन को तथा अपने वैवाहिक जीवन को सुख समृद्धि वाला बना सकने में सक्षम हो सकते है.


शुभमस्तु !!
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    जन्म-राशि और व्यक्तित्व (वृश्चिक-राशि)..






    इस राशि का अधिपति मंगल ग्रह है. इस राशि का तत्व जल तथा स्वरुप स्थिर है. उत्तर दिशा का स्वामी है इसकी प्रकृति व स्वभाव सौम्य कफ प्रकृति है. मंगल तेजोमय व अग्नि तत्व प्रधान होता है. इस राशि के लोग मझोले कद के गठे हुए शरीर तथा खिलते हुए गौर रंग के होते है. इनके बाल सघन होते है. इनके नेत्र चमकदार होते है.
    इनका प्राकृतिक स्वभाव दम्भी, हठी, प्रतिज्ञ व स्पष्टवादी पुरुषों में आता है. इन्हें क्रोध जल्दी आता है. जरा सी भी विपरीत बात सहन नहीं कर सकते है. ये बिना परवाह किये आगे पीछे टकरा जाते है. लेकिन अपनी घबराहट प्रकट नहीं होने देते. क्रोध में अत्यधिक बोल जाते है.परीस्थितियों की मार से झुकने वाले नहीं होते है. चुपचाप अबाध गति से आगे बड़ने वाले व्यक्ति होते है. इच्छा शक्ति बहुत ही मजबूत होती है. वृश्चिक का चिन्ह डंकदार बिच्छू है, बिच्छू के लगभग 32 नेत्र शरीर के भिन्न भिन्न अंगों पर होते है. तो इस राशि वाले लोग सहस्त्र आंखों से किसी वस्तु का अवलोकन करते है. विषय की बारीकी को सहज ही पकड़ कर अपने काम की वस्तु उसमें से ग्रहण कर लेते है.

    बिच्छू तेज स्वभाव का व डंक मारने वाला प्राणी होता है. सदैव इस राशि वाले व्यक्ति भी बदला लेने वाले, फ़ौरन कार्य करने वाले व क्रियाशील होते है. यह लोग दूसरों की असावधानी का शीघ्र फायदा उठाने में तत्पर रहते है. बिच्छू के आगे का हिस्सा मृदु तथा एक प्रकार से अप्रभावशाली होता है, विष इनके पीछे होता है. अतः इस राशि वालों का पूर्वार्ध साधारण तथा जीवन के अंतिम दिनों में भरे पूरे सर्व प्रभुत्व संपन्न बनते है.
    यह लोग रात्री में अधिक बलशाली हो जाते है. क्रोधाग्नि भीतर ही भीतर रहती है. बाहर से यह शांत लगते है. पर प्रतिहिंसा की भावना अपने अंदर रहती है. प्रतिद्वंदी को निर्दयता से हानि पहुंचाने में समर्थ होते है. यह क्रोध आने पर क्षमा करना नहीं जानते है. यदि इन्हें झगड़ालू व जहरीला इंसान कह दिया जाय तो अतिशयोक्ति न होगी.
    यह अपने मित्र सहयोगियों से अपने महत्वपूर्ण कार्य करवाना अच्छी तरह से जानते है. मित्रों का दायरा अत्यधिक होता है. समय समय पर वह लोग इनको मदद भी करते है. नाम और शौहरत का और दिखावे का इन्हें अत्यधिक लालच होता है. मित्रों पर जी जान से लुटाते है. अपने जीवन के महत्वपूर्ण कार्य करके सफलता अर्जित करते है.इन्हें विभिन्न विषयों का ज्ञान भी रहता है.
    धर्म के प्रति मन में श्रद्धा रहती है. धार्मिक क्रिया कलापों में हिस्सा लेते है. कभी कभी ढोंग का भी प्रदर्शन करते है.
    यह अपने परिश्रम के द्वारा सफलता अर्जित करते है.
    विद्वान के रूप में इनकी छवि बनी रहती है. कुल या परिवार में श्रेष्ठ रहते है. अपने बंधू वर्गीय में सम्मानीय होते है.
    यह व्यक्ति संग्रह करने में होशियार होते है. यह व्यक्ति डिक्टेटर, जासूस, केमिष्ट, रसायन, के कार्य सर्जन दन्त विशेषज्ञ, पुलिस अधिकारी, इंजीनियर, खनिज विशेषज्ञ, ठग, आलोचक होते है. राजनीति में यह बड चड कर हिस्सा लेते है. तथा सफलता भी पा जाते है. जान पहचान का क्षेत्र काफी बड़ा होता है. वृश्चिक राशि में चन्द्रमा नीच का होता है. इनमे कोमलता होने का प्रश्न ही नहीं उठता है.
    आप स्वयं अपने भाग्य के निर्माता होते है. धन, ऐश्वर्य की प्राप्ति की तीव्र इच्छा होती है. वह आप प्राप्त कर वैभवशाली जीवन व्यतीत भी कर सकते है.
    प्रेम पात्र के लिए सर्वस्व न्योछावर कर सकते है. स्त्रियाँ चाहे तो प्रेम का प्रदर्शन करके आपको उल्लू भी बना सकती है. यदि आप महिला है तो, आप औरो की अपेक्षा अधिक चतुर चालाक स्वार्थी जबरदस्त भौतिकवादी है और परम में सफल होती है.
    इनको प्रायः गले, छाती, गर्मी, वायु तथा बवासीर जैसे रोगों की संभावना रहती है.
    भाग्य उदय वर्ष:- 28वां वर्ष, सफलता का वर्ष होता है. वैसे इनके जीवन में 35, 44, 52, 53, 71, एवं 80वां वर्ष विशेष प्रभावशाली होता है.
    मित्र राशियां:- कर्क एवं मीन,
    शत्रु राशियां:- मेष, मिथुन, सिंह, धनु,
    अनुकूल रत्न:- मूंगा, मोती,
    अनुकूल रंग:- लाल, पीला,
    शुभ दिन:- मंगलवार, गुरूवार,
    अनुकूल देवता:- शिवजी, भैरव जी, श्री हनुमान जी,
    व्रत उपवास:- मंगलवार,
    अनुकूल तारीखें:- 9, 18, 27,
    नाम अक्षर:- तो, ना, नी, नु, ने, नो, या, यी, यु,
    व्यक्तित्व:- कानूनबाज, गणक, समीक्षक,
    सकारात्मक तथ्य:- बुद्धिमान, निडर, प्रकृति प्रेमी,
    नकारात्मक तथ्य:- स्वार्थी, ढोंगी, क्रोधी,
    आप अपने जीवन में शुभ फलों को प्राप्त करने में मन की स्थिति को पूर्णरूपेण रखने में धन, ऐश्वर्य सुख में बढोत्तरी चाहते है तो, मूंगा रत्न धारण करके लाभ उठा सकते है.



    शुभमस्तु !!



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      जन्म-राशि और व्यक्तित्व (तुला-राशि)..





      इस राशि का स्वामी शुक्र ग्रह है. शुक्र ऐश्वर्यशाली व विलासपूर्ण ग्रह होता है. इस राशि का तत्व वायु व स्वरुप चर(चलायमान), रजोगुण प्रधान, त्रिधातु प्रकृति होती है. पश्चिम दिशा की स्वामिनी है. इसका प्राकृतिक स्वभाव वृष तुल्य होते हुए भी विशेषतः इस राशि वाले विचारशील, ज्ञानप्रिय कुशल होते है.

      इस राशि के लोग संतुलित शरीर के सुन्दर, आकर्षक और देखने में शानदार होते है. मध्यम कद के गठे हुए शरीर के तथा खिलते हुए सांवले-सलोने रंग के अधिकतर होते है. इनके बाल घुंघराले व सघन पाए जाते है. चमकदार आँखे विशेष पहचान होती है.चौड़ा मुख, चौड़ी छाती, बड़ी नाक, ललाट चौड़ा-चमकता हुआ तथा इन्हें सदैव प्रसन्नचित एवं मुस्कराते देखा जा सकता है.

      इस राशि के लोग संतुलित दिमाग के व सोच विचार के कार्य करने वाले होते है. यदि यह किसी की आलोचना भी करेंगे तो रचनात्मक ढंग से करेंगे. इन्हें सुखद और मेल जोल का जीवन पसंद आता है. इस राशि वालों का गुस्सा ज्यादा देर तक नहीं हो पाता है.इस राशि वालों का बौद्धिक स्तर काफी ऊंचा होता है. इनकी कल्पना शक्ति बहुत ही अच्छी होती है. दूसरे के मन की थाह कैसे ली जा सकती है, ये बहुत अच्छी तरह से जानते है. किन्तु अपने मन की बात किसी को भी नहीं बताते है. उचित व जल्दी निर्णय लेना इनकी प्रमुख विशेषता होती है. कई बार छोटी से छोटी बात भी इनके मस्तिष्क को बैचेन कर देती है. भले ही ये साधनविहीन हों, किन्तु इनके लक्ष्य सदा ही ऊँचे होते है. इंसानियत इनके चरित्र का अंग होती है. झूठी शान दिखाना इन लोगो को अच्छा नहीं लगता है.

      तुला राशि वाले लोग ईश्वर भक्त, देव गुरु, अतिथि पूजक, कृपालु परोपकारी होते है. इनका ह्रदय शीघ्र द्रवित होने लगता है.इन्हें सत्यवादी तथा पुण्यात्मा कहा जा सकता है.
      ऐसे लोगों का रुझान न्याय एवं अनुशासन के प्रति अधिक होता है. इस राशि वाले कुशल व्यापारी, लोक व्यवहार में चतुर, कला तथा सौंदर्य प्रसाधन, सुन्दर वस्त्र, कलात्मक सजावट, राजनीति इन सबमें यह माहिर व अच्छे सुलझे व्यापारी होते है.
      वकील, जज, आर्किटेक्ट, संपादन, लेखन, साहित्य इनके मनपसंद व्यवसाय होते है. तथा इनके लिए उपयुक्त भी रहते है.
      इन्हें अनैतिकता, फूहड़पन, अव्यवस्था, अन्याय, अविचार, दिखावा बिलकुल भी पसंद नहीं होता है. यह संतुलित जीवन के प्रेमी होते है. यह चतुर नीतिज्ञ तथा यश-अपयश, हानि-लाभ, जय-पराजय के बारे में खुद सोच विचार करते है व समझते है. मन में किसी भी तरह का भेदभाव नहीं रखते है.
      इनका विवाह के बाद भाग्य उदय होने लगता है. वैवाहिक जीवन सुखमय व शांतिपूर्वक व्यतीत करने में सक्षम होते है. इनका शांतिप्रिय व्यवहार व हास्य प्रवृति सबको मोह लेती है. इन्हें अपना घर संपत्ति प्यारी होती है. तुला लग्न की लड़कियां बुद्धिमान सुन्दर और चतुर होती है. जीवन साथी से बहुत प्यार करती है.
      प्रेम के मामले में वव्यव्हारिक, स्थिर, तथा गंभीर होते है. जिससे प्रेम करते है, उस पर सब कुछ न्यौछावर करने को तत्पर रहते है.
      विदेश और समुंद्री यात्रा इनके लिए विशेष लाभप्रद होती है, इनकी सफलता का रहस्य सौम्य चेहरा सुडोल, विनम्र व गंभीर वाणी व सम्मोहक व्यक्तित्व होता है.
      तुला राशि वालों का भाग्योदय:- 25वें वर्ष होता देखा गया है. इनके जीवन का 34, 43, 52, 61, 70 एवं 79वां वर्ष अत्यंत महत्वपूर्ण होता है.
      मित्र राशियां:- मिथुन, कुम्भ, मकर, धनु, कर्क,
      शत्रु राशि:- सिंह,
      राशि रत्न:- हीरा,
      अनुकूल रंग:- क्रीम, सफेद, नीला,
      नाम अक्षर:- रा, री, रु, रे, रो, ता, ती, तू, ते,
      व्यक्तित्व:- खोजी, अन्वेषक, मास्टर माइन्ड,
      सकारात्मक तथ्य:- आत्मविश्वासी, आकर्षक वाणी,
      नकारात्मक तथ्य:- घमण्ड, ईर्ष्या,
      व्रत उपवास:- शुक्रवार,
      इस राशि के लोग अपनी राशि का रत्न हीरा यदि पन्ना या नीलम के साथ धारण करे तो, जीवन में सुख ऐश्वर्य प्राप्त कर सकते है.

      शुभमस्तु !!



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        जन्म-राशि और व्यक्तित्व (कन्या-राशि)..





        कन्या राशि का स्वामी बुध है. यह सूर्य का निकटवर्ती ग्रह है.यह पृथ्वी तत्व राशि है. इसका स्वरुप द्विस्वभाव होता है. इनका व्यक्तित्व आकर्षित होता है. शरीर दुबला, भौंहें घनी, सुन्दर शर्मीले स्वभाव के होते है. बुध ग्रह कन्या राशि में उच्च का माना जाता है. यदि कुंडली में बुध ग्रह की स्थिति ठीक ना हो, तो गुणों में कमी आ जाती है.

        बुध एक साम्यवादी ग्रह है. अतः कन्या राशि वाले व्यक्ति पर सोहबत व वातावरण का असर जल्दी पड़ता है.इनका स्वभाव मूल गुण लगभग मिथुन राशि से मेल भी खाते है. इस राशि के लोग अध्ययनशील तथा कई विषयों में ज्ञानार्जन करते है. यह लोग स्फूर्तिवान भी होते है. और वास्तविक अवस्था से उम्र भी कम दिखती है.

        कन्या राशि के लोग प्रत्येक कार्य जल्दी जल्दी करने में तत्पर होते है. कोई भी कार्य करने से पहले उसके बारे में ज्यादा विचार नहीं करते है. भावुक होने के कारण भावनाओं पर नियंत्रण नहीं कर पाते है. यह हमेशा द्विस्वपन भी देखते रहते है. सोए सोए अपनी योजनाएं बनाते रहते है.और पूरा होने के बारे में सोचते है. यदि आपको हवाई किले बनाने वाला कहा जाए तो असत्य नहीं होगा. इस राशि वालो की स्मरणशक्ति गजब की होती है. यह अपने थोड़े से लाभ के लिए दूसरों की बड़ी से बड़ी हानि भी कर सकने में सक्षम होते है. यह यदा कदा स्वार्थी भी हो जाते है. और भावुक होने के कारण निरन्तर संघर्ष करते है. जब हार जाते है तब इनमें हीनता की भावना आ जाती है.
        विपरीत योनि के प्रति काफी रुझान पाया जाता है.यदि ये पुरुष है तो, इनमे स्त्रियोचित, सुंदरता, कोमलता, लज्जा एवं वाणी मधुरता पाई जाती है. वैसे भी कहा जाता है कि जिस पुरुष में स्त्रियोचित गुण पाए जाते है वह लोग बहुत ही भाग्यशाली होते है.
        इस राशि वालों की धर्म के प्रति सामान्य श्रद्धा रहती है. धार्मिक क्रिया कलापों को श्रद्धापूर्वक संपन्न करने में विश्वास रखते है. मित्र वर्ग से आप सहयोग या सम्मान प्राप्त करते है. सांसारिक महत्व के कार्य सफलता प्राप्त करते है. तथा तीक्ष्ण बुद्धि से समस्या का समाधान भी निकाल लेते है.इनमे तेजस्विता का भाव भी विद्यमान रहता है. अवसर के अनुकूल उग्रता के भाव यत्नपूर्वक त्याग देते है. उदारता के भाव उत्पन्न कर लेने में सक्षम होते है.
        परिवार में पिता के प्रति मन में पूर्ण श्रद्धा का भाव रहता है. सेवा करने में तत्पर रहते है. बाल्यावस्था में कुछ संघर्षपूर्ण जीवन व्यतीत होता है. परन्तु मध्यमावस्था में इस राशि के लोग पूर्ण सुखी, पुत्र संतति से परिपूर्ण होते है. गृहस्थ जीवन में पूर्ण इईमानदार व कर्तव्य सदैव याद रहता है. सौन्दर्यप्रेमी होने के नाते एक से एक अधिक स्त्रियों से भी संपर्क बनने की स्थिति रहती है. कई बार गृह कलह की स्थिति का सामना करना पड़ जाता है.कई बार दुष्चरित्र स्त्रियों के फंदे में भी फंस सकने की स्थिति बन जाती है. जिससे इन्हें मानसिक कष्ट का घोर सामना करना पड़ता है. एकाकी जीवन यह लोग जी नहीं सकते, इस राशि वालों के कई मित्र ढोंगी व चालबाज होते है, जिनके जाल में यह लोग फंस कर अपना नुक्सान करा लेते है.
        पैसा हाथ की मैल है, ऐसा यह सोचते है, पर सत्यता पर ये आदत से विवश होते है. पर्याप्त धन होने पर भी इनको अभाव रहता है. मनोरंजन, सैर सपाटा, मौज मस्ती, भोग व श्रृंगार प्रियता, दुष्ट मित्रों पर अधिक खर्च करते है. दया-ममता-आवेग भी इनको मजबूर करती है, खर्च करने के लिए..
        इस राशि वाले लोग एक अच्छे वैद्य भी साबित हो सकते है. प्रशासनिक क्षेत्र के महत्वपूर्ण पदों पर भी अपना योगदान प्रदान करते है. यह एक अच्छे गणितज्ञ, साहित्य प्रेमी, वकील, जज, कलाकार, तार्किक परामर्शदाता भी हो सकते है. राजनीति के क्षेत्र में प्रसिद्धि अर्जित कर लेते है.
        वृद्धावस्था में मानसिक परेशानियां व अनेक बीमारियों का सामना करना पड़ता है.

        इस राशि वालों का भाग्य उदय:- 24वें वर्ष के बाद भाग्य उदय के सुंदर अवसर प्राप्त होते है. 33, 42, 51, 60, 69 एवं 78वां वर्ष अत्याधिक उन्नतिदायक होता है.
        मित्र राशियां:- मेष, मिथुन, सिंह, तुला,
        शत्रु राशि:- कर्क,
        राशि रत्न:- पन्ना,
        अनुकूल रंग:- हरा,
        शुभ दिन:- बुधवार, रविवार, शुक्रवार,
        अनुकूल देवता:- गणपति जी, सरस्वती देवी, मां दुर्गा देवी,
        व्रत उपवास:- बुधवार,
        अनुकूल अंक:- 5,
        अनुकूल तारीखें:- 5, 14, 23,
        व्यक्तित्व:- दोहरा व्यक्तित्व, विद्वान, आलोचक लेख,
        सकारात्मक तथ्य:- निरन्तर क्रियाशीलता, व्यावहारिक ज्ञान,
        नकारात्मक तथ्य:- बुराई ढूंढना, कलह प्रियता, अशुभ चिंतन,
        राशि नाम अक्षर:- टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो,
        पन्ना रत्न धारण करने से सुख शान्ति धन लाभ प्रदायक मौके पर हो जाते है. जीवन में सभी बाधाए दूर होने लगती है.



        शुभमस्तु !!






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          जन्म-राशि और व्यक्तित्व (सिंह-राशि)..







          सिंह राशि का स्वामी सूर्य ग्रह है. सूर्य ग्रह राजसी होने के साथ साथ एक तेजस्वी औजयुक्त पौरुष का भी प्रतिनिधित्व करता है. इस राशि वाले व्यक्ति निर्भीक, उदार, एवं अभिमानी होते है. यह अग्नि तत्व राशि है. सूर्य आत्मकारक ग्रह होता है. यह आत्मशक्ति का भी कारक ग्रह है.

          सिंह राशि के व्यक्तियों का कद मध्यम, हड्डियां मजबूत और मस्तक चौड़ा होता है. शरीर सुगठित, शानदार व्यक्तित्व और रोबीला होता है. इनकी आंखों में विशेष आकर्षण होता है. चेहरा शेर के समान भरा हुआ होता है. यह लोग अपने पुरुषार्थ व अपने पौरुष प्रदर्शन के लिए लालायित रहते है. कुछ हद तक अभिमानी होने के नाते ये नाराज भी जल्दी हो जाते है. अपनी मर्दानगी दिखाने में पीछे नहीं हटते है.

          इस राशि के व्यक्ति सामान्यतः सज्जन, विशाल हृदय तथा दूसरों की सहायता करने में तत्पर रहते है. इन्हें अपने मित्रों तथा सम्बन्धियों पर विशवास रहता है.

          इनके विचार न्यायप्रियता से पूर्ण होते है. और यह चाहते है कि इनके साथ भी अन्याय ना हो, यह अपने विचारों में दृढ़ व हठी होते है. जब ये व्यक्ति क्रोधित होते है तो, शेर के समान दहाड़ते है. परन्तु क्रोध शीघ्र शांत भी हो जाता है. अहंवादी होने के कारण झुकने की अपेक्षा टूटना अधिक पसंद करते है, चाहे जितने भी तूफ़ान, विघ्न-बाधाए आए, पर ये लोग विचलित नहीं होते है. स्थिरता इनका विशेष गुण होता है.

          धार्मिक कार्यों में आप बढ़ चढ़ कर भाग लेते है. मिथ्या पाखण्ड से ये लोग घृणा करते है.ये लोग नास्तिक नहो होते है
          आपको भ्रमण या पर्वतीय क्षेत्रों में घूमना अधिक रुचिकर लगता है. ये लोग देव गुरु भक्त पूजक, दानी व सत्पुरुषों के प्रेमी होते है.
          इस राशि के व्यक्ति उन भाग्यशाली लोगों में से होते है, जिनका अनुसरण दूसरे लोग करते है. इनमे शासन करने की प्रवृति अधिक होती है. ये व्यक्ति सरकारी क्षेत्रो में कार्यरत होकर अपना अच्छा प्रभुत्व प्राप्त करते है. किसी के भी अधीन यह व्यक्ति कार्य करना पसंद नहीं करते है. राजनीति में विशेषकर रुचि रहती है. ये उच्च नेता, राज्यमंत्री, मूल्यवान वस्तुओं, धातुओं का क्रय-विक्रय, जौहरी का कार्य इनके लिए शुभ और धन वैभव से सम्पूर्ण होते है. इन कार्यों के द्वारा आपका प्रभुत्व, नाम, शौहरत सभी कुछ प्राप्त कर सकते है.
          इस राशि वालों को वसीयत के द्वारा धन जायदाद भी मिलने की संभावना रहती है, परन्तु जायदाद बटवारे के कारण संबंधियों से मन मुटाव रहने लगता है. उत्साही होने के कारण इन झंझटों से मुक्त हो जाते है.
          इन राशि वालो का वैवाहिक जीवन प्रायः अशांत सा रहता है.क्योंकि घर में शासन करते है. शान्ति तभी स्थापित होती है. जब और प्राणियों का अधिकार माना जायगा.पिता पुत्र में कम ही बन पाती है.
          इस राशि वालों को जुआ, सट्टा, लॉटरी का शौक रहता है.शत्रु भी परेशान करते है.परन्तु शत्रु सामने आकार इन लोगो की प्रशंसा करने लगते है. ऐसे लोगो से बचना चाहिए.कई बार इस राशि वाले लोग विरोधियों को भी अपना बना लेते है.
          नाम अक्षर:- मा, मी, मु, में, मो, टा, टी, टू, टे,
          इस राशि के लोगो का भाग्य उदय:- 23वें वर्ष में होते देखा गया है. आपके जीवन के 32, 41, 50, 68 व 77वां वर्ष अत्यंत महत्वपूर्ण व उन्नतिदायक होता है.
          मित्र राशियां:- मिथुन, कन्या, मेष व धनु,
          शत्रु राशियां:- बृषभ, तुला, मकर, कुम्भ,
          राशि रत्न:- माणिक्य, मूंगा,
          अनुकूल रंग:- चमकीला, श्वेत, पीला, भगवा,
          अनुकूल देवता:- भगवान सूर्य,
          शुभ दिन:- रविवार, बुधवार,
          अनुकूल अंक:- 1,
          व्रत उपवास:- रविवार,
          अनुकूल तारीखें:- 1, 10, 19, 28,
          दिशा:- पूर्व,
          व्यक्तित्व:- प्रबल पराक्रमी, महत्वाकांक्षी, अधिकारप्रियता,
          सकारात्मक तथ्य:- खुले दिलो दिमाग वाला, उदार मन, गर्मजोशी,
          नकारात्मक तथ्य:- घमण्डी, अति आत्मविश्वासी, अति महत्व का प्रदर्शन,
          आपके लिए अपनी राशि का रत्न पहन कर तथा मित्र राशियों से अनुकूलता रखकर सर्वदा सुख कर रहेगा..

          शुभमस्तु !!









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            जन्म-राशि और व्यक्तित्व (कर्क-राशि)..






            कर्क राशि का स्वामी चन्द्रमा है. इस राशि का तत्व जल है. कर्क राशि वाले निश्चय ही चन्द्र से प्रभावित व्यक्ति होते है. चन्द्रमा एक शीतल, सौम्य एवं शुभ ग्रह होता है. चंद्रमा का सबसे ज्यादा असर मनःस्थिति पर देखा जाता है. कर्क राशि में जन्मे लोग प्रायः गोरे वर्ण, पित प्रकृति युक्त, पुष्ट देह, किन्तु ग्रह की स्थिति लग्न में होने के कारण अपवाद रूप में श्यामल रंग के भी हो सकते है.

            सामान्यता कर्क राशि में उत्पन्न लोग शांत प्रवृति के होते है. यह अपने क्रिया कलापों को दृढ़तापूर्वक संपन्न करते है. यात्रा प्रेमी एवं प्रकृति से लगाव रखने वाले होते है. जलीय वस्तुओं से भी प्रेम करने वाले होते है. जीवन में भौतिक सुख साधनों को यह स्वपरिश्रम से अर्जित करने में समर्थ रहते है. इनमे समाज व देश सेवा की भावना विद्यमान रहती है.जीवन में आने वाले उतार चढ़ाव का सामना ये बहुत ही कुशलता के साथ करने में सक्षम होते है. नित नए कार्य करने की प्रवृति बनी रहती है. कई बार निरन्तर कठिन परिश्रम करने पर फल प्राप्ति में देर होती है. इन्हें निराश नहीं होना चाहिए. अपनी तीक्ष्ण बुद्धि से समस्याओं से निकल जाते है.

            आपकी संवेदशीलता, भावुकता व मधुरता से लोग फायदा उठाते है. शारीरिक शक्ति की अपेक्षा, मानसिक शक्ति में सुदृढ़ व परिवर्तन इच्छुक, अस्थिर मन-मस्तिष्क के हो जाते है. जिस उत्साह से कार्य शुरू करते है. कार्य पूर्ति तक वही उत्साह नहीं बना रहता है. एक कार्य छोड़, दूसरा, तीसरा कार्य आप आरम्भ कर लेते है.यह दोष सबसे प्रमुख इनमे होता है.
            धर्म के प्रति आपकी श्रद्धा रहती है. धार्मिक क्रिया कलापों में भी संलग्न रहते है. संगीत एवं कला के प्रति भी आपका आकर्षण रहता है. मित्रों के मध्य आप सम्माननीय रहेंगे. तथा उनसे आपको इच्छित सुख एवं सहयोग की भी प्राप्ति होती है. मीटर आपके गुणवान व शिक्षित होते है.

            घर प्रेमी, कुटुम्ब प्रेमी व्यक्ति आप है. सुख सुविधाओं की लालसा बनी रहती है. सजना संवारना डेकोरेशन आपको अति प्रिय है.स्त्री वर्ग का सम्मान करने वाले होते है. परन्तु प्रेम प्रणय के मामले में असफलता मिलती है.

            राजनितिक एवं सरकारी क्षेत्रो में किसी सम्मानित पद को प्राप्त कर सम्मान तथा प्रतिष्ठा पाते है. और प्रचुर मात्रा में धन लाभ भी होता है. यदि आप जल मार्ग से व समुन्द्र पार यात्रा व विदेश व्यापार में संलग्न है तो काफी धन तथा प्रसिद्धि कमा सकते है.
            आप एक अच्छे लेखक, सुन्दर कवि, महान दार्शनिक, व साहित्यकार व भविष्यवक्ता भी हो सकते है. आप सीमेंट कारखाने, भवन निर्माण के कार्य, बड़े बड़े ठेके के कार्य, आयात-निर्यात, कपड़ा संबंधी व्यापार, खेती के कार्य व यांत्रिक मशीनरी, सरकारी अधिष्ठानो में जल संबंधी कार्यों में दक्ष पाए जाते है. इस तरह के व्यापार में आप सुख समृद्धि, धन तथा प्रतिष्ठा अर्जित कर सकते है.
            इस राशि के कई लोग उच्च श्रेणी के डॉक्टर, वैद्य अनुसंधानकर्ता भी होते है.आप प्रायः घर से भी दूर रह सकते है. आपका वैवाहिक जीवन भी अधिक सुखमय नहीं रहता है. आपके गृहस्थ जीवन में नई नई समस्या नित आती रहती है. शंकालु स्वभाव भी आपकी प्रवृति है. शीतजन्य रोगों का प्रभाव आप पर अधिक रहता है. सर्दी, जुकाम, नजला, गठिया, कफ आदि कई बार ऐसे व्यक्ति उदार के रोगों से भी पीड़ित होते है.
            प्रिय आपके बहुत है. परन्तु खुदगर्ज, स्वार्थी लोगो से सावधान रहें. आपको अपना भाग्य वहां आजमाना चाहिए जहां जलतटीय शहर हों, समुन्द्र किनारे तटीय शहर, खूब लाभ दे सकते है.
            इस व्यक्ति का भाग्य उदय:- 22वें वर्ष में होता है. वैसे इनके जीवन में 22, 31, 40, 49, 58, 67, एवं 86वें वर्ष लाभदायक रहते है.
            मित्र राशियां:- वृश्चिक, मीन, तुला,
            शत्रु राशियां:- मेष, सिंह, धनु, मिथुन, मकर, व कुम्भ,
            अनुकूल रत्न:- मोती, मूंगा,
            अनुकूल रंग:- सफेद, क्रीम,
            शुभ दिन:- सोमवार, मंगलवार, वृहस्पतिवार,
            अनुकूल देवता:- शिवजी, गौरी,
            अनुकूल अंक:- 2,
            अनुकूल तारीखें:- 2, 11, 20, 29,
            व्रत-उपवास:- सोमवार, वृहस्पतिवार,
            व्यक्तित्व:- अध्ययनप्रिय, जलप्रिय, भावुक, कुशल प्रबंधक,
            सकारात्मक तथ्य:- कल्पनाशील, योजनाएं बनाने वाला, वफादार,
            नकारात्मक तथ्य:- सदा कोई न कोई रोग, आलस्य, अक्षमशील द्वेषी,
            राशि प्रकृति स्वभाव:- सौम्य स्वभाव, कफ प्रकृति,
            दिशा:- उत्तर,
            नाम अक्षर:- ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो,
            इस राशि के लोग अपनी मित्र राशियों से सामंजस्य करके तथा अपनी राशि का शुभ रत्न पहन कर जीवन को सुखमय व शान्तिपूर्वक बिता सकते है.

            शुभमस्तु !!

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              जन्म-राशि और व्यक्तित्व (मिथुन-राशि)..





              मिथुन राशि का स्वामी बुध ग्रह है और यह वायु तत्व राशि है. मिथुन राशि का स्वरुप द्विस्वभाव है. बुध ग्रह को बुद्धि व वाणी का कारक माना जाता है. बुध जिस ग्रह के साथ होता है या जिस ग्रह के साथ बैठता है या जिस ग्रह का इस पर प्रभाव पड़ता है, यह वैसा ही हो जाता है. उसी के अनुसार व्यक्ति का रंग व चरित्र होता है. इस राशि वाले पर संगत का असर जल्दी होते देखा गया है. बुरी संगत बुरा बना देती है, तथा अच्छी संगत, अच्छा बना देती है. यह शीघ्र ही दूसरों के प्रभाव तथा आकर्षण में आ जाते है.यह इनकी कमजोरी होती है.

              यह व्यक्ति पूरी ऊंचाई लिए हुए, शरीर से भारी नहीं होते है, फिर भी दुबला पतला नहीं कहा जा सकता है. रंग खुला हुआ, चेहरा भरा हुआ होता है.बाल काले व पतले होते है. ऐसे व्यक्ति बुद्धिमान वाचाल हों तो कोई आश्चर्य नहीं होता है. प्राकृतिक स्वभाव विद्याध्यनी के साथ व्यापारिक बुद्धि भी होती है.इनकी बुद्धि अन्तर्मुखी होती है. यह सभी की सुनते है, परन्तु करते वे अपनी है, जो दिल करता है.यह रहस्यवादी व्यक्ति होते है.इनके मन की थाह पाना कठिन होता है. पर अपनी चालाकी व होशियारी से दूसरे के मन की थाह पा लेते है.

              द्विस्वभाव राशि के होने के कारण यह व्यक्ति प्रत्येक वस्तु के दोनों पहलूओं पर अच्छी तरह विचार करते है.तभी निर्णायक कदम उठाते है. क्रोध कम आता है. और यदि इस राशि वाले क्रोधित हो जाए तो, क्रोध शांत होने पर पश्चाताप भी करते है.
              ऐसे व्यक्ति अधिक बात करने वाले, भाषण देने में माहिर भी होते है. पढ़ने लिखने में बहुत ज्यादा दिलचस्पी लेते है.

              इस राशि वाले व्यक्ति अधिकतर साहित्य, संपादन, लेखन, बैंकिंग, से सम्बन्धित कार्य या व्यवसाय, प्रैस आदि इन कार्यों में उन्नति प्राप्त करके समाज में प्रतिष्ठित व्यक्ति के रूप में स्वयं को स्थापित कर सकने में सक्षम होते है.
              यह व्यक्ति शारीरिक श्रम से ज्यादा मानसिक श्रम पर ज्यादा जोर देते है. संगीत एवं कला के प्रति रूचि रहती है. नवीन सिद्धांतों व मूल्यों का प्रतिपादन करने में समर्थ रहते है.
              इस राशि के व्यक्ति विनम्र, उदार एवं परिलक्षित हास्य प्रवृति के भी होते है. बुद्धिमता का भाव चेहरे पर परिलक्षित होता है. इनमे स्वाभिमान का भाव विद्यमान रहता है. तथा भौतिक सुख, साधनों एवं धनेश्वर्य से संपन्न रहते है. सरकार या उच्च अधिकारी लोगो से संपर्क बना रहता है.
              यह लोग नई नई बाते जानने के इच्छुक होते है. यह कुशल जासूस, अध्यापक, रिसर्च स्कालर भी बन जाते है. इस राशि वाले व्यक्ति स्वतंत्र व्यवसाय भी सफलतापूर्वक चला सकने में सक्षम होते है.
              इनका शारीरिक स्वास्थ उत्तम रहता है. परान्तु कभी कभी इन्हें कमर संबंधी रोग, गुर्दा, मूत्रस्थली संबंधी रोग की संभावना रहती है.
              मित्रों के प्रति मन में निष्ठा रहती है. सरकारी कार्यों में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप में सहयोग प्रदान करते है.
              धर्म के प्रति मन में श्रद्धा का भाव रहता है. तथा निष्ठापूर्वक धार्मिक क्रिया-कलाप पूर्ण करते है. साथ ही अवसर के अनुकूल आप सामाजिक जनों के मध्य उदारता तथा दानशीलता का भाव भी प्रदर्शित करते है.
              आप एक विद्वान पुरुष है. अपनी विद्वता प्रदर्शन से सम्मान व प्रतिष्ठा अर्जित करते है. जीवन में समस्त सुखो का उपभोग करेंगे.
              आप सबसे प्रेम करते है. परन्तु कम लोग आपके स्नेहपूर्ण व्यवहार को समझ पाते है. इनकी संतान, माता पिता के प्रति विद्वेषणपूर्ण भावना रखती है.इनके सहयोगी, पड़ोसी, ससुराल पक्ष, ऐसे व्यक्ति इनके प्रति षड्यंत्रकारी वातावरण बना कर रखते है. निकटतम संबंधी तथा मित्रों से विश्वासघात की आशंका रहती है. इन्हें उनसे सतर्क रहना चाहिए.
              प्रकृति:- क्रूर स्वभाव, धातु प्रकृति,
              अनुकूल रंग:- हरा,
              शुभ दिन:- बुधवार,
              अनुकूल देवता:- गणपति, मां सरस्वती, मां दुर्गा जी,
              व्रत-उपवास:- बुधवार,
              अनुकूल अंक:- 5,
              अनुकूल तारीखें:- 5, 14, 23,
              अनुकूल वर्ष:- 21, 30, 39, 48, 57, 66, व 75वां वर्ष अत्यंत महत्वपूर्ण.
              मित्र राशियां:- तुला, सिंह, कन्या, कुम्भ,
              शत्रु राशियां:- कर्क, वृष, मेष,
              नाम अक्षर:- का, की, कू, घ, ङ, के, छ, को, हा,
              व्यक्तित्व:- चतुर, निडर, बुद्धिमान,
              सकारात्मक तथ्य:- कुशल व्यापारी, वाक् पटु,
              नकारात्मक तथ्य:- निर्मोही, आत्मकेंद्रित, निष्ठुर,
              राशि रत्न:- पन्ना,
              दिशा:- पश्चिम,
              यदि आप अपनी मित्र राशियों से सम्बन्धित लोगों से मेल जोल व सामंजस्य रखते है और अपना भाग्य रत्न पन्ना धारण करते है तो जीवन में आने वाले उतार चढ़ाव से आप मुक्त होंगे. और सफलता से आगे बढ़ेंगे.

              शुभमस्तु !!



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                जन्म-राशि और व्यक्तित्व (वृष-राशि)..





                वृष का अर्थ होता है बैल, इस लग्न के लोग गोरे रंग के सुंदर तथा आकर्षक दिखने वाले होते है.पुष्ट शरीर, बैल के समान वेग, मस्त चाल, स्वाभिमानी एवं स्वछन्द विचरण करने वाले होते है.इनका शीतल स्वभाव होता है.होंठ मोटे, कान एवं गर्दन कुछ लंबी होती है. इस राशि का स्वामी शुक्र ग्रह है. यह पृथ्वी तत्व के होते है. ऐसे व्यक्ति उदार तथा सहिष्णु स्वभाव के होते है. इनकी वाणी में मधुरता का भाव विद्यमान रहता है.

                ऐसे व्यक्ति मेहनती, स्थिर विचार वाले सांसारिक सज्जन एवं धीर और शांत होते है. सभी लोग इनसे प्रभावित होते है. अपनी वाक् पटुता से शुभ और महत्वपूर्ण सांसारिक कार्यों को सिद्ध करने में भी सफल रहते है.अपने परिश्रम एवं लग्न से प्रतिष्ठित स्थान प्राप्त कर लेते है. इनमे सहनशीलता अधिक होती है.यदि इनको बेवजह छेड़ा जाए तो सरलता से काबू में नहीं आते है.यह अपनी शक्ति का व्यर्थ में नाश नहीं करते है. यह पुराने विचारों को भी मान लेते है. इच्छा शक्ति के यह धनी होते है.यह आवेश में कोई भी कार्य नहीं कर सकते है. यह हमेशा ताक में रहते है फिर सही समय आने पर अवसर का लाभ उठा जाते है.

                वृष राशि वाले अच्छा और स्वादिष्ट भोजन पसंद करते है. धनार्जन इनके जीवन का मुख्य उद्देश्य होता है.सांसारिक सुखो के प्रति रूचि रखते है. सब प्रकार के आनंदों का उपभोग करने में विशवास रखते है. ऐसे व्यक्ति कला, संगीत, नृत्य, सिनेमा, गायन इन गतिविधियों में विशेष झुकाव रखते है.
                धर्म के प्रति श्रद्धावान होते है. अवसरानुकूल धार्मिक अनुष्ठानो तथा क्रियाकलापों को संपन्न करते है. धार्मिक क्षेत्र में सफलता अर्जित करते है. इनमे दानशीलता का भाव भी विद्यमान रहता है.धर्म के मामलो में दिखावा पसंद और नाटकीय कलापों में भी संलग्न रहते है.
                प्रेम के मामले में विपरीत लिंगी के प्रति शीघ्र ही आकर्षित हो जाते है. सेक्स के मामले में लचीले स्वभाव के तथा मन पर नियंत्रण नहीं रख पाते है. काफी हद तक सफलता भी पा जाते है.
                यौवन काल में भविष्य सुधारने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ता है. इनकी प्रकृति स्वार्थी भी हो जाती है. यह कोरी भावनाओं में बहने वाले व्यक्ति नहीं होते है. सामाजिक और राजनीति क्षेत्र में शीघ्र सफलता अर्जित करते है.आपको बहुमूल्य जायदाद भी प्राप्त हो सकती है.

                आपकी व्यापार में ज्यादा रूचि रहती है. वृष राशि के अधिकतर कुशल व्यापारी देखे गए है. यदि आप श्रृंगार, कपड़ो, इत्र, आभूषण, कला इनसे सम्बन्धित कार्यों से व्यापार करे तो जीवन में आर्थिक उन्नति सम्भव है. एश्वर्य प्रधान वस्तुओं का व्यापार आपके अनुकूल कहा जा सकता है.
                इनमे धन जमा करने की प्रवृति होती है. खर्च बहुत ही सोच समझ कर करने वाले होते है. कभी कभी कंजूसी भी दिखाने वाले बन जाते है. यह धन कमाने में ख़तरा मोल नहीं लेते है.इनके जीवन में एक लक्ष्य होता है और यह उसी लक्ष्य पर हो कार्य करते है. अपने जन्म स्थान से लगाव रखने वाले होते है.
                वृष राशि का भाग्य उदय:- 20 से 22 वर्ष के मध्य अक्सर हो जाता है. इनके जीवन के महत्वपूर्ण वर्ष 29, 30, 47, 56, 65, 74 व 83वां वर्ष अत्यंत महत्वपूर्ण होता है.
                राशि प्रकृति व स्वभाव:- सौम्य स्वभाव वाले अक्सर होते है.
                अनुकूल रत्न:- हीरा,
                शुभ दिवस:- शुक्रवार, शनिवार तथा बुधवार,
                अनुकूल देवता:- श्री लक्ष्मी जी और श्री सरस्वती देवी जी,
                व्रत उपवास:- शुक्रवार,
                नाम अक्षर:- ई, उ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो,
                अनुकूल अंक:- 6,
                अनुकूल तारीखें:- 6, 15, 24,
                व्यक्तित्व:- गुरु-भक्त, कृतग्य, दयालु,
                नकारात्मक तथ्य:- दुराग्रही, कानो का कच्चा, आलसी,
                मित्र राशियां:- कुम्भ तथा मकर,
                शत्रु राशियां:- सिंह, धनु और मीन,
                दिशा:- दक्षिण,
                अनुकूल रंग:- श्वेत और नीला,
                अपनी मित्र राशियों से सदभावना व प्रेम का तालमेल रख कर अपना शुभ रत्न हीरा धारण करके अपने जीवन में उन्नति का मार्ग अपना सकते है...


                शुभमस्तु !!




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                  जन्म-राशि और व्यक्तित्व (मेष-राशि)..






                  जन्म राशि वह राशि होती है, जिसमे जन्म के समय चन्द्र स्थित होता है. जन्म राशि को जन्म कुंडली में चन्द्र लग्न भी कहा जाता है. यह चन्द्र लग्न, लग्न कुंडली के समान महत्व रखती है. ज्योतिष में ग्रह और राशियाँ एक दूसरे से जुड़े हुए तत्व है. कोई भी ग्रह, किसी भी व्यक्ति विशेष को सीधे प्रभावित नहीं करता, बल्कि राशियों के माध्यम से प्रभावित करता है. फलित ज्योतिष में राशियों को महत्व दिया जाता है. यह जानना बहुत जरूरी है कि राशियाँ क्या है ?

                  कुछ ज्योतिष समर्थकों के साथ यह बड़ी समस्या आती है कि जन्म राशि को देखें या नाम राशि पर विचार करें ? ज्योतिष शास्त्र के अनुसार व्यक्ति के जीवन का पूरा विवरण उसकी जन्म-कुंडली में वर्णित होता है. जन्म-राशि का उपयोग गोचर फल के जानने के लिए भी किया जाता है इसी के साथ साथ लग्न राशि को भी अत्यधिक महत्ता दी जाति है. नाम राशि अर्थात अक्षर प्रधान राशि को कई विद्वान महत्व देते है. मुहूर्त आदि में इसका प्रयोग अच्छा रहता है. आज इस लेख में जन्म-राशि की चर्चा करेंगे. जन्म-कुंडली स्थित चन्द्र के अनुसार जो आपकी राशि है उस राशि का फल निम्न रूप से देख सकते है.

                  मेष राशि का स्वामी मंगल है. मंगल अग्नि तत्व प्रधान होता है. अर्थात मेष राशि वाले व्यक्ति दबंग और कुछ क्रोधी भी होते है या यदा कद जिद्दी भी होते है.यह स्फूर्तिवान व उच्काकांक्षी होते है. अनुशासन व व्यवस्था बनाएं रखना इनकी प्रकृति होती है. बाल की खाल निकालने वाले, ऐसे व्यक्तियों की मन की थाह लेना मुश्किल होता है.
                  मेष राशि वाले माध्यम कद के अक्सर होते है.इनका चेहरा लंबा व लाल रंग का होता है.स्वभाव से स्वतंत्र विचारों वाले व स्पष्ट वक्ता होते है, इनके दांत चमकीले और पुष्ट होते है. नेत्र चंचल और दृष्टि तीव्र होती है. जोखिम के कार्य करने में माहिर व हमेशा प्रसन्न रहते है. भूरे मिश्रित बाल व दृढ शरीर के होते है.
                  मेष राशि वाले व्यक्तियों के स्वभाव में तेजस्विता का भाव विद्यमान रहता है. दूसरों की हकूमत इन्हें बिलकुल भी पसंद नहीं होती है. इस राशि वाले दूसरों के अधीन रह कर विकास के कार्य नहीं कर सकते, स्वतंत्र कार्य करने में ही इनको सफलता प्राप्त होती है. अपने भावों पर नियंत्रण करना इस राशि वालों के लिए अत्यंत आवश्यक होता है. मेष राशि वाले अपने गुणों से इच्छित उन्नति प्राप्त करने में सक्षम हो सकते है.
                  इस राशि वाले जो भी कार्य हाथ में लेते है, उसे शीघ्र ही समाप्त करने के इच्छुक रहते है. कई बार जीवन में काफी समस्याओं का सामना करना पड़ता है, परन्तु दृढ़ता व अपनी इच्छा शक्ति से समाधान कर लेते है. अपनी प्रवृत्ति में उदारता व सहिष्णुता भी विद्यमान होती है. धर्म और समाजिक रुढियों के प्रति इस राशि वालो के मन में विद्रोह भर जाता है.इसी कारण से यह मध्य मार्ग अपना लेते है. समाज व राजनितिक क्षेत्र में अलग छवि बनाए रखते है. एक क्षण क्षण में प्रसन्न और दूसरे क्षण में अप्रसन्न हो उठना इन राशि वालो की एक विशेषता होती है.
                  मेष लग्न के व्यक्ति पुलिस, फ़ौज, सर्जन, रसायनशास्त्री, मैकेनिक, इंजीनियर, भूमि व कोर्ट कचहरी, संबंधी कार्य करने में सक्षम होते है और इन्हीं कार्यों में सफलता प्राप्त करते है.
                  प्रेम के संबंध में मेष राशि वाले सफल रहते है. स्त्रियाँ या पुरुष इनकी ओर स्वयं आकर्षित होने लगते है. कभी कभी प्रेम के विषय में ईर्ष्यालु भी होने लगते है.
                  मेष राशि के व्यक्तियों का भाग्य उदय 16, 22, 28, 32, एवं 36वें वर्ष में होता है.
                  मित्र-राशियाँ:- सिंह, तुला और धनु राशियाँ इनकी मित्र होती है.
                  शत्रु-राशियाँ:- मिथुन, कन्या राशि, यदि इस राशि वाले व्यक्ति इन राशियों के व्यक्तियों में प्रेम व सदभावना रखे तो, शुभ होगा, जो कि उनकी मित्र राशियाँ है. जीवन में सफलता पा सकते है.,
                  राशि-रत्न:- मूंगा रत्न,
                  अनुकूल-रंग:- लाल, पीला, गेरुआ,
                  शुभ-दिन:- मंगलवार, रविवार, वृहस्पतिवार,
                  अनुकूल-देवता:- शिवजी, भैरव जी, श्री हनुमान जी,
                  अनुकूल-ग्रह:- सूर्य, वृहस्पति, चन्द्र, व्रत उपवास:- मंगलवार : अनुकूल अंक : 9, अनुकूल तारीखें:- 9, 18, 27,
                  सकारात्मक तथ्य:- कुटुम्ब को पालने वाले, चुनौती को स्वीकार करने वाले, सदैव क्रियाशील,
                  नकारात्मक तथ्य:- दम्भी, अधेर्य्शाली, दिशा:- पूर्व, नाम-अक्षर:- चु, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ, प्रायः शनि ग्रह और बुध ग्रह मारकेश होते है, मंगल और वृहस्पति ग्रह शुभ तथा धन प्रदायक होते है.
                  मेष राशि वालों का अनुकूल रत्न मूंगा है. ताम्बे की या सोने की अंगूठी में यह सवा पांच या सवा सात रत्ती का मूंगा अभिमंत्रित कर पहनने से चमत्कारिक लाभ का अनुभव कर सकते है. यह विशेष ध्यान रखे कि रत्न धारण करने से पहले किसी विद्वान ज्योतिषी से सलाह अवश्य प्राप्त करें.

                  शुभमस्तु !!

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                    सिंगिंग बाउल द्वारा घर की शान्ति बनाएं..




                    भारत में ध्वनि द्वारा घर तथा वातावरण को शुद्ध करने की परम्परा कई सदियों से चली आ रही है. शंख और घंटी तथा बाँसुरी आदि बहुत से ऐसे वाद्य यंत्र है जो कि वातावरण और घर की शान्ति के लिए सहायक सिद्ध होते है. तथा उन वाद्य यंत्रो या शंख व घंटी को धर्म में शामिल कर उसकी उपयोगिता को प्रमाणित कर दिया है.इन नाना प्रकार की ध्वनियों का प्रयोग विश्व के प्रत्येक धर्मों में प्राचीन समय से चला आ रहा है.

                    चीन में ध्वनि से ऊर्जा प्राप्ति पर विशेष बल अथवा प्राथमिकता दी जाती है. फेंगशुई में विंड चाइम का इसी सिद्धांत पर प्रयोग किया जाता है. उसी प्रकार घर के भीतर ऊर्जा तरंगों में सुधार लाने के लिए एक विशेष उपकरण का प्रयोग किया जाता है, जिसे सिंगिंग बाउल कहते है.

                    जिस प्रकार से शंख के बारे में शोध किया गया और यह निष्कर्ष निकला कि शंख की आवाज से आसपास के सूक्ष्म कीटाणुओं में भारी कमी आ जाती है, इसी प्रकार घंटी व घंटे की आवाज से कुछ अदृश्य बुरी शक्तियां दूर होती है.
                    चीन में इस सिंगिंग बाउल का प्रयोग परिवार के सदस्यों के बीच आपसी लगाव में सुधार लाने के लिए भी किया जाता है. इसकी ध्वनि येंग व यिन ऊर्जा में संतुलन लाती है.

                    यह सिंगिंग बाउल किसी भी धातु जैसे सोना, चांदी, ताम्बा, लोहा, सीसा या स्फटिक का हो सकता है. यह कई आकारों में भी हो सकता है. यह एक कटोरेनुमा होता है. इसको लकड़ी से बनी एक छोटी सी मुंगरी द्वारा कटोरे पर मारने से एक ध्वनि उत्पन्न करता है. यही ध्वनि घर को शुद्ध करने में सहायक होती है.


                    इसको बजाने के लिए पहले मुंगरी द्वारा कटोरे पर एक प्रहार करना चाहिए फिर इस मुंगरी को कटोरे के किनारे पर बांये से दांये घुमाना चाहिए. इस प्रकार एक विचित्र सी ध्वनि उत्पन्न होती है.
                    इसके नियमित प्रयोग से यह लय से बोलने लगेगा. तथा यह ध्वनि आपको कर्णप्रिय लगेगी. इसको दिन भर में कई बार बजा सकते है.
                    यदि आपको लगता है या महसूस हो रहा है कि घर-परिवार में कुछ अशांति हो रही है, तो इसका नियमित प्रयोग करने से घर की ऊर्जा शुद्ध हो जायेगी. चीन या फेंगशुई में इस ऊर्जा को ची कहा जाता है.
                    यह ची ही चीनी चिंतन का मुख्य आधार है.



                    शुभमस्तु !!






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                      बाँसुरी की वास्तु व जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका..





                      बाँसुरी को शान्ति, शुभता एवं स्थिरता का प्रतीक माना जाता है. यह उन्नति, प्रगति एवं सकारात्मक गुणों की वृद्धि की सूचक भी होती है. फेंगशुई और हमारे शास्त्रों में शुभ वस्तुओं में बाँसुरी का अत्यधिक महत्व है. फेंगशुई के उपायों का महत्व इसलिए भी अधिक है, क्योंकि वास्तु शास्त्र में जहां कहीं किसी दोष से पूर्णतः मुक्ति के लिए अशुभ निर्माण कार्य को तोड़ना आवश्यक होता है, वहीं फेंगशुई में अशुभ निर्माण को तोड़ने की कोई आवश्यकता नहीं होती है. अपितु पैगोडा, बाँसुरी आदि सकरात्मक वस्तुओं का प्रयोग कर के उस दोष से मुक्ति पा लेते है.

                      बाँसुरी का निर्माण बाँस के ताने से होता है. सभी वनस्पतियों में बाँस सबसे तेज गति से बढ़ने वाला पौधा होता है.इसी कारण से यह विकास का प्रतीक है.और किसी भी वातावरण में यह अपना अस्तित्व बनाए रखने की क्षमता इसमें होती है. यदि किसी भी दूकान या व्यवसाय स्थल पर इसके पौधे को लगाया जाए तो जैसे बाँस के पौधे की वृद्धि तेज गति से होगी, वैसे ही उस दूकान या व्यवसाय स्थल के मालिक की भी प्रगति होगी. बाँस के पौधे के ये सभी गुण बाँसुरी में भी विद्यमान होते है.

                      बाँसुरी का उपयोग न केवल फेंगशुई में, वरन वास्तु शास्त्र एवं ग्रह दोष निवारण में बहुत ही उपयोगी है. वास्तु में बीम संबंधी दोष, द्वार वेध, वृक्ष वेध, वीथी वेध आदि सभी वेधो के निराकरण में और अशुभ निर्माण संबंधी वास्तु दोषों में बाँसुरी का प्रयोग होता है. ग्रह दोषों के अंतर्गत शनि, राहू आदि पाप ग्रहों से सम्बन्धित दोषों के निवारण में बाँसुरी का कोई विपरीत प्रभाव नहीं होता है.

                      लेकिन बाँसुरी के प्रयोग में एक सावधानी अवश्य रखनी चाहिए वह यह है कि, जहां कहीं भी इसे लगाया जाए, वहां इसे बिलकुल सीधा नहीं लगा कर थोड़ा तिरछा लगाना चाहिए तथा इसका मुंह नीचे की तरफ होना चाहिए.

                      जापान, चीन, हांगकांग, मलेशिया और मध्य एशिया में इसका प्रयोग बहुतायत में किया जाता है. यदि किसी के विकास में अनेक प्रयास करने के बाद भी बाधाए उत्पन्न हो रही हो तो इस बाँसुरी का प्रयोग अवश्य ही करना चाहिए.वैसे तो बाँसुरी एक फायदे अनेक है”. लेकिन यहां मै इस लेख में बाँसुरी के आसान और अचूक रामबाण उपाय दे रहा हूं जो कि पग पग पर हमारे लिए सहायक बनते है, और हमारी समस्याओं का पूर्ण रूप से समाधान करते है.
                      १:- बाँसुरी बाँस के पौधे से निर्मित होने के कारण शीघ्र उन्नतिदायक प्रभाव रखती है अतः जिन व्यक्तियों को जीवन में पर्याप्त सफलता प्राप्त नहीं हो पा रही हो, अथवा शिक्षा, व्यवसाय या नौकरी में बाधा आ रही हो, तो उसे अपने बैडरूम के दरवाजे पर दो बाँसुरियों को लगाना चाहिए.
                      २:- यदि घर में बहुत ही अधिक वास्तु दोष है, या दो या तीन दरवाजे एक सीध में है, तो घर के मुख्यद्वार के ऊपर दो बाँसुरी लगाने से लाभ मिलता है तथा वास्तु दोष धीरे धीरे समाप्त होने लगता है.
                      ३:- यदि आप आध्यात्मिक रूप से उन्नति चाहते है, या फिर किसी प्रकार की साधना में सफलता चाहते है तो, अपने पूजा घर के दरवाजे पर भी बाँसुरिया लगाए. शीघ्र ही सफलता प्राप्त होगी.
                      ४:- बैडरूम में पलंग के ऊपर अथवा डाइनिंग टेबल के ऊपर बीम हो तो, इसका अत्यंत खराब प्रभाव पड़ता है. इस दोष को दूर करने के लिए बीम के दोनों ओर एक एक बाँसुरी लाल फीते में बाँध कर लगानी चाहिए. साथ ही यह भी ध्यान रखे कि बाँसुरी को लगाते समय बाँसुरी का मुंह नीचे की ओर होना चाहिए.
                      ५:- यदि बाँसुरी को घर के मुख हाल में या प्रवेश द्वार पर तलवार की तरह क्रास के रूप में लगाया जाए, तो आकस्मिक समस्याओं से छुटकारा मिलता है.
                      ६:- घर के सदस्य यदि बीमार अधिक हों अथवा अकाल मृत्यु का भय या अन्य कोई स्वास्थ्य से सम्बन्धित समस्या हो, तो प्रत्येक कमरें के बाहर और बीमार व्यक्ति के सिरहाने बाँसुरी का प्रयोग करना चाहिए इससे अति शीघ्र लाभ प्राप्त होने लगेगा.
                      ७:- यदि किसी व्यक्ति की जन्मकुण्डली में शनि सातवें भाव में अशुभ स्थिति में होकर विवाह में देर करवा रहे हो, अथवा शनि की साढ़ेसती या ढैया चल रही हो, तो एक बाँसुरी में चीनी या बूरा भरकर किसी निर्जन स्थान में दबा देना लाभदायक होता है इससे इस दोष से मुक्ति मिलती है.
                      ८:- यदि मानसिक चिंता अधिक तेहती हो अथवा पति-पत्नी दोनों के बीच झगड़ा रहता हो, तो सोते समय सिरहाने के नीचे बाँसुरी रखनी चाहिए.
                      ९:- यदि आप एक बाँसुरी को गुरु-पुष्य योग में शुभ मुहूर्त में पूजन कर के अपने गल्ले में स्थापित करते है तो इसके कारण आपके कार्य-व्यवसाय में बढोत्तरी होगी, और धन आगमन के अवसर प्राप्त होंगे.
                      १०:- पाश्चात्य देशो में इसे घरों में तलवार की तरह से भी लटकाया जाता है.इसके प्रभाव स्वरुप अनिष्ट एवं अशुभ आत्माओं एवं बुरे व्यक्तियों से घर की रक्षा होती है.
                      ११:- घर और अपने परिवार की सुख समृधि और सुरक्षा के लिए एक बाँसुरी लेकर श्री कृष्ण जन्माष्टमी के दिन रात बारह बजे के बाद भगवान श्री कृष्ण के हाथों में सुसज्जित कर दे तो इसके प्रभाव से पूरे वर्ष आपकी और आपके परिवार की रक्षा तो होगी ही तथा सभी कष्ट व बाधाए भी दूर होती जायेगी.
                      बाँसुरी के संबंध में एक धार्मिक मान्यता है कि जब बाँसुरी को हाथ में लेकर हिलाया जाता है, तो बुरी आत्माएं दूर हो जाति है. और जब इसे बजाया जाता है, तो ऐसी मान्यता है कि घरों में शुभ चुम्बकीय प्रवाह का प्रवेश होता है.
                      इस प्रकार बाँसुरी प्रकृति का एक अनुपम वरदान है. यदि सोच समझ कर इसका उपयोग किया जाए तो वास्तु दोषों का बिना किसी तोड़ फोड के निवारण कर अशुभ फलो से बचा जा सकता है. जहां रत्न धारण, रुद्राक्ष, यंत्र, हवन, आदि श्रमसाध्य और खर्चीले उपाय है, वहीं बाँसुरी का प्रयोग सस्ता, सुगम और प्रभावी होता है. अपनी आवश्यकता के अनुसार इसका प्रयोग करके लाभ उठाया जा सकता है.


                      शुभमस्तु !!
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                        वास्तु द्वारा धन संपदा को आमंत्रित करें..





                        कर्ज और गरीबी से तुरंत छुटकारा पाना चाहते है तो, उत्तर-पूर्व की ओर उत्तर-पूर्व की दीवार का फर्श की तरफ झुकावदार होना बहुत जरूरी है. इससे व्यापार बढ़ता है. धन दौलत की घर में वर्षा होने लगती है.अधिकांश लोग अपने घर के उत्तर-पूर्व के कोने में आग,चूल्हा,कुकिंग गैस, ज्योत, हवन आदि की व्यवस्था करते है.जो बिलकुल ही गलत होता है. इस कोने में आग से सम्बन्धित कोई भी काम नहीं होना चाहिए.जेनरेटर, गीजर, बायलर, भट्टी की गर्मी तक भी इस कोने में नहीं आनी चाहिए.

                        अपने घर के हर कमरे में उत्तर-पूर्व की ओर ढलान रखें. इससे गयी खुशहाली भी लौट आती है. दक्षिण-पश्चिम भाग की ऊँचाई और उत्तर-पूर्व की ओर का ढलान घर में सुख शान्ति को बहाल करने वाला होता है. घर के उत्तर-पूर्व में पानी का दरिया, झील, या तालाब हो तो व्यक्ति को अमीर बनते देर नहीं लगती है.

                        आपके आवासीय भवन या फेक्ट्री के भवन में उत्तर-पूर्व का कोना कटा हुआ है तो आपकी उन्नति किसी भी प्रकार से नहीं हो अक्ती है. अर्थात उन्नति के मार्ग में अनेक बाधाए उत्पन्न हो सकती है. उत्तर-पूर्व में यदि ऊँचा चबूतरा भी है तो दुनिया के सारे कष्ट आपको भोगने ही है.उत्तरी क्षेत्र का कटाव उस भवन में रेह्न्र वाले, पुरुषों को बर्बाद कर देता है. और पूर्वी क्षेत्र का कटाव स्त्रियों को भारी कष्ट प्रदान कर देता है.हमेशा याद रखे कि कैसीभी स्थिति हो कभी भी भूल कर उत्तर-पूर्व को ऊँचा ना रखें. यदि है तो इसे ठीक करवा देने में ही भलाई होती है.
                        बिजनेस बहुत ही यदि मन्दा पढ़ गया हो तो दक्षिण की चाहरदीवारी के मुंडेर पर ईंटो की चिनाई करवा कर उसे ऊँचा कर दे, इससे व्यापार में तेजी आनी शुरू हो जायेगी. और उत्तरी दीवार को नीचा राखे, कहने का मतलब यह है कि ऊँची उत्तरी दीवार व्यापार को रोकती है, और उसमे बाधा उत्पन्न करती है. उत्तरी फर्श और उत्तरी दीवार को ठीक करके आप बंद पड़े व्यापार को भी एक गति दे सकते है. घर का भवन या फेक्ट्री का भवन बनाते समय सबसे बाद में उत्तरी दीवार बनवायें.
                        भवन के उत्तरी वायव्य, पश्चिमी, नैऋत्य, दक्षिणी नैऋत्य, और पूर्वी आग्नेय में यदि द्वार होता है तो, धन के लिए यह शुभ नहीं होता है. इस दिशाओं में खिड़कियाँ, दरवाजे, रोशनदान, बंद करा दें और हवा एवं प्रकाश तक भी इन दिशाओं में न आने दें. अन्यथा प्राप्त धन या अपनी जमा पूँजी भी खत्म हो जाती है. भवन का उत्तरी भाग ऊँचा न रखे इससे दुर्भाग्य पूर्ण हवाए उत्पन्न होती है. और घर का दक्षिण-पश्चिम भाग नीचा ना रखे, और यहां कुआं, अंडरग्राउण्ड टैंक, बौरवेल, आदि भी ना लगाए. इससे जानलेवा ऊर्जा पैदा होती है. और इस बात का भी हमेशा ध्यान रखे कि भवन के बीचो बीच में कुआं, टैंक, बोरवेल, बेसमेंट, आदि नहीं होना चाहिए. इनसे घर के लोगो का दुर्भाग्य शुरू हो जाता है.

                        शुभमस्तु !!



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                          दूकान/ऑफिस में वास्तु से अधिक लाभ कमायें..





                          हम वास्तु के द्वारा अपनी दूकान या ऑफिस का लाभ कई प्रतिशत तक बढ़ा सकने में सक्षम है जरूरत है सिर्फ वहां वास्तु के नियम अपनाने की, व्यावसायिक प्रतिष्ठान दूकान और ऑफिस का वास्तु अनुसार यदि उपचार करें तो बंद व्यापार भी खुल जाता है. कोई भी दूकान अपना व अपने परिवार का भरण-पोषण करने के लिए किया जाता है. यदि वस्तु के नियमानुसार व्यवसाय या दूकान की व्यवस्था करेंगे तो, वह शुभ होगा और लाभ में वृद्धि होने लगेगी. और इसका उत्तम फल प्राप्त होगा.अन्यथा मानसिक एवं आर्थिक परेशानियां ही प्राप्त होंगी.

                          दूकान के लिए गिने चुने भवन के ईशान कोण को बिलकुल खाली रखें और वह स्थान स्वच्छ व पवित्र बनाएँ रखें. ईशान कोण की स्वच्छता ही ग्राहक को आकर्षित करने में सहायक होती है.

                          दूकान या ऑफिस में पानी की व्यवस्था ईशान कोण में अथवा पूर्व दिशा या उत्तर दिशा में रखनी चाहिए.

                          दूकान या ऑफिस में पूजा स्थान भी आप ईशान कोण या पूर्व दिशा अथवा उत्तर दिशा में रखकर लाभ उठा सकते है.

                          दूकान या ऑफिस में जूते या भारी सामान के कार्टन अथवा अन्य प्रकार का भारी सामान यदि ईशान कोण में रखा है तो उसे तुरंत हटा दें यह व्यापार के लिए घातक सिद्ध होता है. जहां तक सम्भव हो सके तो, इस प्रकार का सामान दक्षिण या पश्चिम दिशा में स्थापित करें तो बिक्री अधिक होगी तथा आपके माल पर कोई शिकायत भी नहीं मिलेगी. ग्राहक हमेशा संतुष्ट रहेगा.
                          दूकान में तोलने वाला यंत्र, तराजू आदि को पश्चिमी या दक्षिणी दीवार के साथ किसी स्टैंड पर रखें तो, इससे नुक्सान नहीं होगा.
                          अपनी दूकान या ऑफिस में उत्तर-पूर्व (ईशान कोण), उत्तर और पूर्व दिशा का भाग ग्राहकों के आने जाने के लिए हमेशा खाली रखे. और यदि किसी कारण से मेला या गन्दगी से खराब हो जाए तो तुरंत सफाई करवा लें. इससे कोई भी विवाद ग्राहक से नहीं होता है. और ग्राहक प्रसन्न रहेगा.
                          दूकान में माल का भंडारण दक्षिण, पश्चिम अथवा नैऋत्य कोण में करें तो, शुभ फलदायक रहेगा.
                          दूकान या अपने ऑफिस में बिजली का मीटर, स्विच बोर्ड, इन्वर्टर आदि सामान आग्नेय कोण अर्थात दक्षिण-पूर्व दिशा के कोने में उचित रहता है. इसके परिणाम स्वरुप दूकान आदि में कभी भी कोई चोरी या अग्नि का भय नहीं रहेगा.
                          दूकान में सीडियां ईशान कोण के अतिरिक्त किसी भी दिशा में रख कर उपयोग कर सकते है.
                          दूकान, दफ्तर, फैक्ट्री के सामने कोई भी वेध नहीं होना चाहिए. अर्थात खम्भा, सीढी, पेड़ या बिजली, टेलीफोन आदि का खम्भा हानि का योग बनाते है.
                          पूर्व मुखी दूकान या ऑफिस में सड़क दूकान पर चढ़ने के लिए सीढियां ईशान कोण में बनवा सकते है.
                          दूकान का मालिक या मुख्य व्यवस्थापक को अपने बैठने का स्थान यथा संभव नैऋत्य कोण में बनवाना चाहिए. और अपना मुख पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर करके बैठना चाहिए. दूकान में पीने का पानी का पात्र ईशान कोण में रखें तथा प्रतिदिन दूकान खोलते समय भर कर रखें व पांच तुलसी के पत्ते उसमे डाल दिया करे. ऐसा करने पर ग्राहक जब भी दूकान में आएगा कोई न कोई वस्तु जरूर खरीदेगा, अर्थात वह दूकान से खाली वापस नहीं जाएगा.




                          शुभमस्तु !!

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                            गृह निर्माण में वास्तु के महत्वपूर्ण भूमिका...




                            जीवन में सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि है अपना मकान/कोठी/बंगला बनाना, क्योंकि इसमें हमारी सम्पूर्ण कमाई व्यय होती है. किसी महापुरुष ने ठीक ही कहा है कि घर और वर के बारें में जीवन में बहुत सोच समझ कर ही निर्णय करना चाहिए. घर का तात्पर्य अपने आशियाने से है और वर का तात्पर्य अपनी बेटी के सुहाग से कहा गया है. उसी सन्दर्भ में इस लेख में चर्चा कर रहा हूं, कि मकान के अंदर किस किस प्रयोजन के लिए किस किस स्थान का उपयोग करना चाहिए. इसका निर्देश वास्तु शास्त्र के द्वारा क्या है..

                            शयनकक्ष

                            गृहस्वामी का शयनकक्ष घर के दक्षिण-पश्चिम में होना चाहिए. पलंग को दक्षिणी दीवार से इस प्रकार लगा हुआ होना चाहिए कि शयन के समय सिरहाना दक्षिण दिशा की ओर व पैर उत्तर दिशा की ओर हों. यह स्थिति श्रेष्ठ मानी जाती है. ऐसा यदि किसी कारण वश न हो सके तो, इसका विकल्प यह है कि सिरहाना पश्चिम की ओर करना चाहिए. इसके विपरीत यदि हम करते है तो वास्तु के अनुरूप नहीं माना जाता है. और इसके कारण हमे हानि का सामना करना पड़ सकता है.

                            स्नान घर

                            स्नानघर को पूर्व दिशा में बनाना चाहिए तथा शौचालय को दक्षिण-पश्चिम में बनाना चाहिए. यह श्रेष्ठ समाधान है. लेकिन आजकल व्यवहार में देखने को आता है कि स्थान की कमी आदि के कारण इन दोनों को एक ही स्थान पर बनाया जाता है. यदि किसी भी कारण इन्हें एक ही स्थान पर बनाना पड़े तो वहां इन्हें कमरों के बीच में दक्षिण-पश्चिम दिशा में बनाना चाहिए. पूर्व दिशा में स्नानघर के साथ शौचालय कभी भी नहीं बनाना चाहिए.
                            स्नानघर के जल का बहाव उत्तर-पूर्व दिशा की ओर रखना चाहिए. उत्तर-पूर्व दीवार पर एक्जोस्ट फैनExhaust Fan लगाया जा सकता है.गीजर लगाना हो तो दक्षिण-पूर्व के कोण में लगाया जा सकता है.क्योंकि यह आग्नेय कोण है, गीजर का सम्बन्ध अग्नि से होता है.

                            रसोईघर
                            रसोई के लिए आग्नेय (दक्षिण-पूर्व) सबसे अच्छी स्थिति मानी जाती है. अतः रसोई मकान के दक्षिण-पूर्व कोण में ही होनी चाहिए. रसोई में भी जो दक्षिण-पूर्व का कोना है, वहां गैस सिलिंडर या चूल्हा या स्टोव रखा जाना चाहिए.
                            भोजन कक्ष
                            भोजन यदि रसोई घर में न किया जाए तो इसकी व्यवस्था ड्राइंगरूम में की जा सकती है. अतः डायनिंग टेबल ड्राइंगरूम के दक्षिण-पूर्व में रखनी चाहिए.
                            बैठक
                            वर्तमान समय में ड्राइंगरूम का विशेष महत्व है. इसमें फर्नीचर दक्षिण और पश्चिम दिशाओं में ही रखना चाहिए. ड्राइंगरूम में हमेशा इस बात का ध्यान रखें कि उत्तर-पूर्व अर्थात ईशान कोण को हमेशा खाली रखना चाहिए.
                            अतिथि कक्ष
                            घर/ भवन में अतिथि कक्ष की सर्व श्रेष्ठ स्थिति उत्तर-पश्चिम का कोना है. इस जगह पर यदि अतिथि निवास करता है तो, वह आपके पक्ष में ही हमेशा रहेगा.
                            अन्न भण्डार गृह
                            पहले समय में लोग अपने घर में पूरे वर्ष भर का अनाज भंडारण किया करते थे. अतः अन्न भण्डार के लिए अलग से एक कमरा हुआ करता था. लेकिन वर्तमान समय में एक मास या इससे भी कम अवधि के लिए अन्न रखा जाता है इसे रसोईघर में ही रख लेना वास्तु शास्त्र द्वारा सम्मत है.
                            गैराज
                            गैराज का निर्माण दक्षिण-पूर्व या उत्तर-पश्चिम दिशा में अनुकूल होता है.
                            नगदी व भण्डार
                            रोकड़ एवं घरेलू सामान उत्तर में रखना चाहिए एवं कीमती सामान आभूषण आदि दक्षिण की सेफ में रखना चाहिए. इससे सम्पन्नता में वृद्धि होने लगती है.
                            पोर्टिको
                            इसे उत्तर पूर्व में बनवाना चाहिए एवं इसकी छत मुख्य छत से नीची होनी चाहिए.
                            नौकरों के घर
                            नौकरों के घरों का रुख हमेशा उत्तर में या उत्तर-पूर्व में करना चाहिए.
                            तहखाना
                            यदि तहखाने का निर्माण कराना हो तो, उत्तर में या उत्तर-पूर्व में करना चाहिए. तहखाने में प्रवेश द्वार भी उत्तर या पूर्व दिशा की ओर से करना चाहिए.
                            बालकनी
                            सवा और भवन की सुंदरता के लिए बालकनी का निर्माण किया जाता है. इसे उत्तर-पूर्व में बनाना चाहिए यदि पूर्व निर्मित मकानों में दक्षिण-पश्चिम दिशा में बालकनी बनी हो तो, इन्हें फिर उत्तर-पूर्व में बनाना श्रेष्ठ रहता है.
                            योग एवं ध्यान
                            अपने जीवन में शारीर और मन को स्वस्थ रखने के लिए योग और ध्यान की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका होती है. अतः इसके लिए घर में उत्तर-पूर्व का कोना जिसे ईशान कोण भी कहते है वहा पर योग और ध्यान करने से एकाग्रता में वृद्धि होती है.
                            सीड़ी
                            सीडीयां उत्तर-पूर्व को छोड़ कर अन्य दिशाओं में सुविधानुसार बनाई जा सकती है. लेकिन पश्चिम या उत्तर दिशा इसके लिए अभीष्ट है. सीडियों का निर्माण विषम संख्या में होना चाहिए एवं चढ़ते समय दांयी ओर मुड़नी चाहिए.

                            शेष अगले भाग में...........


                            शुभमस्तु..



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                              भाग्य का द्वार खोलनें वाले स्वप्न...






                              स्वप्न केवल मनुष्य ही देखता है. ईश्वर ने ऐसी दिव्य और विलक्षण शक्ति दूसरे किसी प्राणी को नहीं दी. स्वप्न मनुष्य के भविष्य की गणना निपुणता से करते है.अच्छे स्वप्न भाग्य का द्वार खोल देते है. और बुरे स्वप्न दुर्भाग्य को जन्म देते है. बुरे स्वप्न से बचने के लिए सोते समय अपने ईष्ट देव का स्मरण करना चाहिए. इसके साथ ही यह भी प्रार्थना करनी चाहिए कि वह बुरे सपनों का साया भी हमसे दूर रखें.

                              आप स्वप्न में अपनी भू सम्पदा या मकान आदि को किसी को किराए पर दे रहे है तो, इसका अर्थ है कि आपको किसी के द्वारा बहुत कीमती वस्तु उपहार में मिलने वाली है.


                              आप स्वप्न में शराब देने पर भी नहीं लेते है और इनकार कर रहे है और उससे नफरत कर रहे है, तो समझ लीजिए कि आपके अच्छे दिन आने वाले है. भविष्य में आपको धन लाभ होने वाला है. और स्वास्थ्य में भी सुधार होगा.

                              यदि आप स्वप्न में मल त्याग कर रहे है तो इस स्वप्न का भाव यह है कि भविष्य में आपकी योजनाये आसानी से सफल होने वाली है.

                              आप स्वप्न में पण्डित बन के पंचांग देख रहे है तो आने वाले समय में आपका व्यवसाय बढ़ने वाला है.

                              आप स्वप्न में देख रहे है कि आपके कपड़े, घर आग में जल गए है. तो समझ लीजिए कि आप पर लक्ष्मी अत्यंत प्रसन्न हो रही है. भविष्य में आपको अपार धन, संपदा मिलने वाली है.
                              आप सपनों में यदि केले के पेड़ आदि को फूलों सहित देखते है तो जान लीजिए कि आपके जीवन में कभी भी अशुभ नहीं होने वाला है.

                              आप स्वप्न में अखरोट, खिरनी, सुपारी, नारियल को देखते है तो यह एक बहुत ही शुभ स्वप्न है आपको भविष्य में बेशुमार धन संपदा मिलने वाली है.

                              आप स्वप्न में किसी जवान महिला को कानों में कर्णफूल पहने हुए देखते है तो यह शुभ स्वप्न है. भविष्य में आपको कोई शुभ समाचार अवश्य ही मिलने वाला है.
                              आप स्वप्न में हीरा या हीरे से जड़े आभूषण देखती है तो समझ लीजिए आपका विवाह किसी उच्च अधिकारी या धनि व्यवसायी से होने वाला है.
                              आप स्वप्न में कुम्हार को घड़ा बनाते देखते है तो इसका मतलब यह हुआ कि जल्दी ही आपके शरीर से शोक का दमन होने वाला है. और इसके साथ ही आपको बहुत धन की प्राप्ति होने वाली है.
                              आप स्वप्न में चावल देखते है, या खाते है तो समझ लीजिए कि भविष्य में आपको अचानक धन मिलने वाला है.
                              आप स्वप्न में फव्वारें चलते हुए देखते है तो भविष्य में आपका डूबा हुआ धन मिलने लगेगा.
                              आप यदि स्वप्न में मूसलाधार वर्षा देखते है तो समझ लीजिए कि आपके अच्छे दिन आने वाले है. अर्थात भविष्य में आपके घर लक्ष्मी का आगमन होने वाला है.
                              आप स्वप्न में किसी अपाहिज व्यक्ति की तन-मन से सेवा करते है तो आपके अच्छे दिन लोटने वाले है. आपको शीघ्र ही उच्च पद की प्राप्ति होने वाली है.
                              आप स्वप्न में मशीन द्वारा घास काटते है तो भविष्य में सुख सौभाग्य की वृद्धि होने वाली है.
                              आप स्वप्न में घर का आय-व्यय का ब्यौरा बनाते है तो समझ लीजिए कि आपके व्यापार में शीघ्र ही लाभ होने वाला है. और यदि यही स्वप्न कोई स्त्री देखती है तो उसकी लोकप्रियता में वृद्धि होती है.
                              आप एक अविवाहित युवती है और आप स्वप्न में स्वयं को किसी स्कूल की कक्षा की छात्रा के रूप में देख रही है तो इसका अर्थ यह है कि आपका विवाह वास्तविक प्रेमी के साथ होने वाला है.
                              इस प्रकार यह स्वप्न शुभ फलदायक होकर आपके जीवन में भाग्य का द्वार खोलने का संकेत आपको देते है.


                              शुभमस्तु...


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                                सुखी जीवन हेतु लाल किताब के उपाय..




                                लाल किताब के अनुसार आप ग्रहों की स्थिति को (अपनी जन्मकुण्डली के अनुसार) उसके घर/स्थान से कुछ निम्न आसान नियमों का पालन कर किसी दूसरे स्थान पर अस्थाई रूप में परिवर्तित कर सकते है. इस तरह करने से आपको अपेक्षित परिणाम प्राप्त होंगें. उह उपाय बहुत ही सरल और अच्छे परिणाम देने में समर्थ है. इन उपायों को करते रहने से किसी न किसी ग्रह की शुभ उर्जाओं में बढ़ोतरी होती रहती है.और अशुभ उर्जाओं में सही संतुलन बना रहता है जो किसी न किसी रूप में शुभ परिणाम देते है.
                                भोजन रसोई में या रसोई के आसपास खाने की मेज पर ही खाए.शयन कक्ष में भूल कर भी खाना न खाए इससे घर की संपदा नष्ट होने लगती है.

                                घर में कोई भी टूटा फूटा बैड, शीशा, मुंह देखने का आईना या कुर्सी नहीं होने चाहिए.

                                घर की किसी भी दीवार पर दरार नहीं होनी चाहिए और कोई भी पौधा आपके घर की छत पर दरारों से निकला हुआ ना हो, इसके कारण घर में खुशी/शुभ काम में बाधा उत्पन्न होती है.

                                घर के आँगन या कहीं पर भी कच्चा स्थान अवश्य रखे.

                                हेंडपंप और बिजली के सभी उपकरण अच्छी अवस्था में होने चाहिए. इससे लाभ बडता है.

                                लड़ाई झगड़ें वाले चित्र जीवन को कष्टमयी बनाते है आप युद्ध या क्रूरतापूर्ण दर्शाने वाले चित्र लगाना चाहते है तो उन्हें कक्ष की दक्षिणी दीवार पर लगा सकते है इस एना ही लगाए तो उचित रहेगा.
                                जब भी हो सके तो बन्दर, कुत्ते, गाय या पक्षियों को भोजन दाना डालते रहें. इससे घर में बरकत बढ़ती है.
                                कभी कभी नहाने वाले पानी में एक चम्मच कच्चा दूध डाल कर नहाया करे तो आकस्मिक रोग नहीं होता है.
                                किसी से भी कोई वस्तु मुफ्त ना ले. हर वस्तु पर किसी न किसी ग्रह का प्रभाव होता है. वस्तु मुफ्त लेने से उस ग्रह के प्रभाव अवांछित हो सकते है.
                                प्रत्येक व्यक्ति को चाहिए कि वह संयुक्त परिवार में रहे तो जीवन में कभी मानसिक कष्ट नहीं आता है.
                                बुधवार को गरीब लड़कियों को भोजन व हरा कपड़ा दें. पशुओं को हरा चारा दें. धन का हानि कभी न होगी.
                                अपनी बेटी और बहन को उपहार के रूप में मिठाईयां देनी चाहिए इससे उनका परिवार खुशहाल रहता है और अपने आप को भी सुख की प्राप्ति होने लगती है.
                                लाल किताब अनुसार सूर्य ग्रह का सम्बन्ध वाहय व्यक्ति से, चंद्रमा का मां व दादी से, मंगल का भाई व मित्र से, बुध का पुत्री/कन्या, बहन व चाची से, वृहस्पति का गुरु, पिता व दादा से, शुक्र का पत्नी से, शनि का चाचा से, राहू का ससुराल से तथा केतु का पुत्र से सम्बन्ध होता है. इसलिए इन्हें नाराज करना उस से सम्बंधित ग्रह को नाराज करना होता है.
                                अतः परिवार में सभी सदस्यों के साथ मिलकर ही रहना चाहिए इससे समाज में प्रतिष्ठा की वृद्धि होकर जीवन सुखमय व्यतीत होता है.



                                शुभमस्तु.....

                                Add starShareShare with note

                                  सावधान रहें,इन अशुभ संकेतों से..








                                  यदि गृहस्वामिनी के हाथ से बार बार बिना किसी कारण के भोजन नीचे जमीन पर गिरता है तो, यह संकेत शुभ नहीं होता है, समझ लो कि धन हानि या दरिद्रता का आगमन होने वाला है. ऐसे अशुभ संकेत प्रकृति हमारे सामने प्रगट करती रहती है परन्तु हम उन्हें समझ नहीं पाते या हमे इस बात का कोई ज्ञान नहीं होता कि इस संकेत का अर्थ क्या है. इस लेख से पहले लेख में मेने शुभ संकेतों की चर्चा की थी,जो कि भविष्य की सूचना देने वाले शुभ संकेत.. नामक लेख था, आज अशुभ संकेतों की बात करते है.

                                  १:- घर के परिसर में बिल्ली या बिलाव का रोना या आपस में झगड़ा करना विपत्ति या घर में क्लेश का सूचक है.

                                  २:- यदि घर के मुख्य द्वार से सांप का प्रवेश होता है तो, यह गृहस्वामी या गृहस्वामिनी के स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं होता है.

                                  ३:-यदि घर में कोई चोट खाया या घायल पक्षी या उसका कोई काटा हुआ अंग आँगन में गिरता है तो, समझ लीजिए कि महासंकट आने वाला है.

                                  ४:- घर में यदि कुतिया प्रसव करती है तो यह गृहस्वामी के लिए अच्छा संकेत नहीं है, इसके कारण शत्रु की वृद्धि होती है तथा अपने ही परिवार में मतभेद होने लगते है.

                                  ५:- यदि घर में कौवा, गिद्ध, चील या कबूतर नित्य बैठते है और छह मास तक लगातार निवास बनाए हुए है तो गृहस्वामी पर नाना प्रकार की विपत्ति आने का सूचक होता है.

                                  ६:- यदि घर में काले रंग के चूहे बहुत अधिक तादाद में दिन और रात भर घूमते रहते हो तो, समझ लीजिए कि किसी रोग या शत्रु का आक्रमण होने वाला है.
                                  ७:- यदि घर की छत पर, दीवार पर या घर के किसी भी कोने में लाल रंग की चींटिया घुमती या रेंगती हुई दिखाई दे, तो समझ लीजिए कि संपत्ति का क्षय होता है. या संपत्ति का कोई नुक्सान हो जाता है. और यदि पंख वाली चींटियां हो तो घर में बिना किसी कारण के क्लेश की स्थिति उत्पन्न होने लगती है.
                                  ८:- यदि पालतू गाय अपना दूध पीती हो या अत्यधिक सिर हिलाती हो, तो घर के गृहस्वामी के ऊपर कर्ज बढ़ता है और भाग्य खराब होने लगता है.
                                  ९:- यदि किसी खुशी के कार्य पर घर में आग लग जाय तो धन हानि की संभावना बन जाति है.
                                  १०:- यदि घर में बने मंदिर की कोई मूर्ति या चित्र अपने आप खंडित या जल जाए, या जमीन पर हाथ से छूट कर टूट जाए तो, यह संकेत पूरे परिवार के लिए शुभ नहीं होता तथा इसके कारण समाज में मां हानि और कलंक लगता है. घर में विवाह आदि शुभ कार्यों में अनावश्यक बाधाओं का सामना करना पडता है.
                                  ११:- यदि घर में रसोई का प्लेटफार्म का चटकना या टूटना, चाकले का टूटना या तड़क जाना दरिद्रता की निशानी होती है.
                                  १२:- यदि घर में दूध बार बार जमीन पर गिरता हो, किसी भी कारण से तो घर में क्लेश और विवाद की स्थिति बनती है.
                                  १३:- यदि सुबह के समय या शाम के समय कौवा मांस या हड्डी लाकर गिराता है तो, समझ लीजिए कि अमंगल होने वाला है और बिमारी, चोट आदि पर धन खर्च होगा.
                                  १४:- यदि कोई भी पक्षी घर में किसी भी समय कोई लोहे का टुकड़ा गिराता है तो, यह अशुभ संकेत होता है जिसके कारण अचानक छापा या कारावास होने की पूरी पूरी संभावना बनने लगती है.
                                  १५:- यदि जिस दिन नए घर में प्रवेश करना हो तो, उसी दिन सूर्योदय के समय कोई भी पशु रोता है तो उस दिन गृह प्रवेश टाल दें यह संकेत शुभ नहीं होता है घर में प्रवेश करते ही दुःख आरम्भ हो जायेंगे.
                                  इस प्रकार के अशुभ संकेत यदि सामने आटे है तो इनका उपचार भी शास्त्रों में दिया गया है कि संकेत देखने के बाद उसी समय मंदिर में जाकर सरसों के तेल का मिट्टी का दिया भगवान एक सामने अर्पण कर शुभ फल की प्रार्थना करें और किसी गाय को रोटी के अंदर गुड़ रख कर खिलाए. तथा श्री हनुमान चालीसा के पांच पाठ करे तो यह अशुभ संकेतों का दोष समाप्त हो जाता है.


                                  शुभमस्तु !!







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                                    भविष्य की सूचना देने वाले शुभ संकेत..




                                    यदि घर में बिल्ली प्रसव करती है तो यह शुभ संकेत है कि जल्दी ही धन संपदा की प्राप्ति होगी, ऐसे कई संकेत प्रकृति हमारे सामने नित्य रखती है, परन्तु हम समझ नहीं सकते है. यह कुदरत का नियम है कि जो भी शुभ या अशुभ होना है, उसकी पूर्व सुचना मनुष्य को ऐसे ही संकेतों से मिलती है.हमारे ऋषि मुनि चिन्तक और आत्म दर्शी थे. और वह मानव जीवन की, प्रकृति परिवर्तन की, पशु-पक्षियों के व्यवहार, बोली अथवा बार बार होने वाली घटनाओं का अत्यंत सूक्ष्म दृष्टि से विश्लेषण किया करते थे. वृहत संहिता में एक सम्पूर्ण अध्याय इसी विषय पर लिखा गया है, मनुष्यों के मार्ग दर्शन के लिए जो शुभ व् अशुभ संकेतों का वर्णन किया है उनमे से कुछ की चर्चा आज आपके सामने कर रहा हूं.

                                    १:- घर के दरवाजे के अंदर आकार अचानक गाय रम्भाना शुरू कर दें तो, यह संकेत सुख सौभाग्य का सूचक है.

                                    २:- बन्दर यदि आपके घर के आँगन में आम की गुठली कहीं से लाकर डाल दे तो. यह संकेत आपके व्यापार में लाभ होने का सूचक होता है.

                                    ३:- सुबह सुबह यदि कौवा आपके घर के मुख्य द्वार के पास बोलता है तो समझ लीजिए कि आज आपका कोई प्रिय आने वाला है. यदि दोपहर को बोलता है तो कोई पत्र या अतिथि आपसे मिलने आएगा.

                                    ४:- घर के दक्षिण दिशा में तीतर यदि आवाज करता है तो अचानक सुख सौभाग्य और धन प्राप्ति का योग बनता है.

                                    ५:- यदि आपके घर में कोई भी पक्षी चांदी का टुकड़ा या चांदी की अन्य चीज ला कर डाल देता है तो आपको कहीं से अचानक लक्ष्मी की प्राप्ति होगी.

                                    ६:- यदि आपके घर की मुंडेर या चाहरदीवारी पर कोयल या सोन चिड़िया बैठ कर मधुर स्वर करती है तो घर के स्वामी का भाग्योदय होता है तथा सुखी जीवन का प्रतीक संकेत है.
                                    ७:- घर की छत या दीवार पर काली चींटियों का घूमना या रेंगना घर की उन्नति के लिए शुभ संकेत माना जाता है.
                                    ८:- यदि हाथी आ कर आपके घर के मुख्य द्वार के सामने अचानक अपनी सूंड उठा कर जोर से स्वर करता है तो विवाद में आपकी जीत होती है और मुकद्दमा आपके पक्ष में होता चला जायगा.
                                    ९:- सफेद कमेड़ी यदि आपके घर की किसी भी दीवार पर बैठ कर आवाज करती है तो यह संकेत आपकी व्यापार वृद्धि में अत्यंत सहायक सिद्ध होगा.
                                    १०:- घर में बिल्ली यदि छत या किसी कमरें में अपना प्रसव करती है तो समझ लीजिए कि धन संपदा की वृद्धि होने वाली है.
                                    ऐसे कई संकेत है जो कि हमारें सामने कई बार होते है, पर हम समझ नहीं पाते. इसी प्रकार से अगले भाग में मै अशुभ संकेतों का वर्णन करने जा रहा हूं.

                                    क्रमशः ............





                                    शुभमस्तु !!





                                    Add starShareShare with note

                                      वास्तु द्वारा दूर करें अपनी समस्याएं..






                                      बंगला या फ्लैट का सपना सभी देखते है. लेकिन आवासीय भवन का चुनाव करते समय यह सदा ध्यान रखें कि उक्त स्थान स्वयं और परिवार के सदस्यों के साथ शांतिपूर्ण रहने के काबिल भी होना चाहिए. सबसे पहले उस स्थान की जांच करें, जिस भूखण्ड या भूखण्ड पर बने भवन में अपना फ्लैट आरक्षित करने जा रहे है. इसका निर्णय खुद करें. मकान खरीदने या बनवाने में धन की आवश्यकता होती है, वह धन अपनी मेहनत का होना चाहिए. कर्ज लेकर मकान बनवाना या खरीदना स्वयं को बीमार करना है. इसके कारण घर में घुटन और तनाव की वृद्धि होती है.

                                      मकान बनवाने या खरीदने की स्थिति में लगने वाला धन पर्याप्त न हो तो मकान बनाने या उसे आरक्षित करने के बारे में सोचना परिवार को तनाव और रोग देना है. बदलाव प्रकृति का नियम है, और सभी ग्रह हर पल चल रहे है. आज यदि ग्रह या समय ठीक नहीं है तो आशा है कि कल जरूर ठीक होगा.ग्रहों की शक्ति के कारण व्यक्ति राजा से रंक बन जाता है. इसलिए अगर ग्रहों के अनुसार व्यक्ति ने अपने जीवन में परिवर्तन किया तो उसके पास मकान बनाने के लिए स्वयं की कमाई का धन एकत्र हो जाता है.

                                      आप ऋण लेकर मकान आदि लेने से बचें. क्योंकि मकान सुख की वृद्धि के लिए बनाया जाता है. घुटन और तनाव के लिए नहीं बनाया जाता है. ज्योतिष शास्त्र या अन्य शास्त्रों एवं पुराणों के अनुसार मानव योनि में रहते हुए व्यक्ति अपना कर्ज नहीं उतारता है तो, मृत्यु के बाद भी कर्जदान बना रहता है. और उसे उसका कुफल भुगतना पडता है. यदि अपनी कमाई का 60% या 70% धन आपके पास है तो आप बाक़ी का धन उधार के रूप में ले सकते है. यह स्थिति सुखदायक बन सकती है, इससे अधिक प्रतिशत हो तो मकान का विचार उस समय त्याग दें तो आपके लिए अति उत्तम रहेगा.
                                      अब मकान में होने वाली समस्याओं पर विचार करते है और उसका उपचार भी वास्तु के अनुसार क्या है. उसका विवरण आपके सामने है.
                                      पति-पत्नी को किसी भी टकराव से बचने के लिए एक ही पलंग, एक ही गददा, एक ही चादर तथा एक ही तकिया प्रयोग में लाये तो शुख की वृद्धि होगी.
                                      मकान का फर्श बनाने में काले रंग के पत्थरों का प्रयोग करने से राहू ग्रह की वृद्धि होती है.
                                      अपने पूर्वजों के चित्र पूजा स्थल पर नहीं रखने चाहिए. इन्हें घर की दक्षिण दिशा या पश्चिम दिशा में लगाना चाहिए.
                                      मकान का कोई कमरा किराए पर देने के लिए उत्तर-पश्चिम दिशा में बना हिस्सा ज्यादा ठीक रहेगा.
                                      घर में शान्ति, आर्थिक उन्नति के लिए गुगुल की धूप सुबह शाम जलानी चाहिए.
                                      किसी भी पेड़ के पश्चिम या दक्षिण दिशा की ओर नहीं सोना चाहिए. इससे दुर्घटना, झगड़ा, बिमारी आदि उत्पन्न हो सकती है.
                                      भोजन करने के लिए पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुंह करके बैठना चाहिए.
                                      अनेक मंजिलों वाले भवन में दरवाजे के ऊपर दरवाजा न बनवायें. घर में एक सीध में तीन दरवाजे नहीं बनवाए.
                                      घर में किसी व्यक्ति को बार बार रोग पीड़ा का सामना करना पड़ रहा हो और ठीक न हो रहा हो, तो उस व्यक्ति को मकान के दक्षिण-पश्चिम कोने वाले कमरें में सुलाये या उसी कमरें में उपर्युक्त दिशा में बिस्तर लगा डे तो शीघ्रता से रोग निवृति होती है.
                                      घर के मुख्य द्वार के सामने पेड़, बिजली या टेलीफोन का खम्भा, दूसरे के मकान का कोना आदि अवरोध एवं वेध हो तो, मुख्य द्वार के ऊपर पा कुआ दर्पण लगाना चाहिए.
                                      इनके करने से वास्तु जनित दोषों से अवश्य छुटकारा मिलता है, तथा जीवन सुखी हो जाता है.


                                      शुभमस्तु !!




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                                        यात्रा में दिशाशूल का महत्व..





                                        यात्रा एक ऐसा शब्द है जो कि प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में प्रयोग होता है. यात्रा कभी सुखदायी होती है तो कभी इतनी यातनाएं यात्रा में मिलती है कि व्यक्ति सोचता है कि यह यह यात्रा, यात्रा नहीं यातना थी. इसके पीछे सबसे बड़ा कारण यह है कि हम कभी भी यात्रा में जाने से पहले शकुन और दिशा शूल का विचार नहीं करते, फलस्वरूप कभी सफल हो जाते है तो कभी हमें असफलता का मुंह देखना पडता है. शास्त्र और ऋषि मुनियों का अनुभव कहता है कि दिशा शूल के समय यात्रा करने से यात्रा सफल नहीं होती है. तथा यात्रा मार्ग में विभिन्न परेशानियों का सामना करना पडता है.दिशा शूल होने पर यात्रा यथासंभव स्थगित कर देनी चाहिए या उसका परिहार कर देना चाहिए. जिसे आज मै आपके लाभार्थ लिख रहा हूं.

                                        सोमवार और शनिवार को पूर्व दिशा कि ओर यात्रा में दिशा शूल होता है.
                                        मंगलवार और बुधवार को उत्तर दिशा कि ओर यात्रा में दिशा शूल होता है.
                                        रविवार और शुक्रवार को पश्चिम दिशा कि ओर यात्रा में दिशा शूल होता है.
                                        सोमवार और वृहस्पतिवार को आग्नेय (दक्षिण-पूर्व कोण) दिशा कि ओर यात्रा में दिशा शूल होता है.
                                        बुधवार और शुक्रवार को ईशान (पूर्व-उत्तर कोण) दिशा कि ओर यात्रा में दिशा शूल होता है.

                                        इसलिए उपरोक्त दिशा और उपदिशाओं में यात्रा नहीं करनी चाहिए.विस्तार के लिए निम्न तालिका पर ध्यान रखे.

                                        पूर्व
                                        सोमवार, शनिवार,
                                        ईशान (उत्तर-पूर्व)
                                        बुधवार, शुक्रवार,
                                        उत्तर
                                        बुधवार, मंगलवार,
                                        वायव्य (उत्तर-पश्चिम)
                                        मंगलवार,
                                        पश्चिम
                                        रविवार, शुक्रवार,
                                        नैऋत्य (दक्षिण-पश्चिम)
                                        रविवार,
                                        शुक्रवार,
                                        दक्षिण
                                        वृहस्पतिवार,
                                        आग्नेय (दक्षिण-पूर्व)
                                        सोमवार, वृहस्पतिवार,
                                        शास्त्रानुसार दिशा शूल हमेशा पीठ का या बांया लेना श्रेष्ठ रहता है. सम्मुख और दाहिना कभी भी भूल कर भी ना लें.इसके बारे में लिखा गया है कि..

                                        दिशा शूल ले जाओ बामे
                                        राहू योगिनी पूठ,!
                                        सन्मुख लेवें चंद्रमा
                                        लावे लक्ष्मी लूट !!


                                        यदि यात्रा करनी अति आवश्यक हो, और उस दिन दिशा शूल हो तो उन वस्तुओं को खा कर यात्रा करने से दिशा शूल का दोष का फल न्यून हो जाता है. और कार्य सिद्धि होने लगती है, जिस कार्य के लिए हम यात्रा पर निकले है वह कार्य बिना किसी बाधा के पूर्ण हो जाता है. इसके लिए प्रत्येक वार की वस्तुएं निम्न है..
                                        रविवार को पान खाकर यात्रा पर जाना चाहिए.
                                        सोमवार को यात्रा पर जाने से पहले दर्पण देख कर ही घर से निकलना चाहिए.
                                        मंगलवार को यात्रा से पूर्व धनिया खाए, तो यात्रा सुखपूर्वक होगी.
                                        बुधवार को गुड़ खाएं.
                                        वृहस्पतिवार को दही खा कर यात्रा पर निकलना चाहिए.
                                        शुक्रवार को राई खा कर जाए.
                                        शनिवार को बायविडिंग खा कर यात्रा करने से लाभ प्राप्त होता है.
                                        यह तो मुख्य दिशाओं के दिशा शूल का परिहार था लेकिन उपदिशाओं में यात्रा करने के लिए भी शास्त्र में उपाय दिए है कि रविवार को चन्दन का तिलक, सोमवार को दही का तिलक, मंगलवार को मिट्टी का तिलक, बुधवार को घी का तिलक, वृहस्पतिवार को आटे का तिलक, शुक्रवार को तिल खा कर और शनिवार को खल खा कर यात्रा करने से उपदिशा का दिशा शूल नहीं लगता है.
                                        दिशा शूल के निवारन के लिए लोकाचार के नियमों का पालन अवश्य करें. जो व्यक्ति प्रतिदिन अपनी नौकरी या व्यवसाय के लिए यात्रा करते है. वह भी इस बात का ध्यान रखे कि घर से निकलते समय नासिका (नाक) का जो स्वर चलता हो, उसी तरफ का पैर आगे रख कर यात्रा में निकलने से सभी दिशा शूल का दोष समाप्त हो जाता है. तथा प्रत्येक व्यक्ति जब भी यात्रा करनी हो उसू समय का नासिका का जो स्वर चल रहा हो और उसी तरफ का पैर आगे बढ़ा कर यात्रा में निकलता है तो दिशा शूल का प्रभाव मिट जाता है.

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                                        पंडित "विशाल" दयानन्द शास्त्री

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