Chaitra Navratras 2011 ~ Chaitra Navratri 2011--DrAnjna Agarwal---


Navratras is a Hindu festival celebrated for nine days worshipping the various forms of Durga. The Navratras festival is celebrated four times in a year: Vasanta Navratras, Ashadh Navratras, Sharad Navratras and Magha Navratras. These are further divided into Prakat and Gupt Navaratri. From the above mentioned Navaratras, Vasanta and Sharad Navratras are Prakat Navaratras; while Ashadh and Magha Navaratras are called Gupt Navaratras.


Vasant Navratras, also known as Chaitra Navratras, is observed during Chaitra Shukla Paksha (March/April). As this Navratra coincides with Ram Navami, it also referred as Ram Navratras. Durga Ashtami in Navratras is the most auspicious day for Durga puja. Durga Ashtami 2011 date in this Navratras is April 11. As per the legends mentioned in the Puranas and other Hindu scriptures, Chaitra Navratras is the actual Navratras during which Goddess Durga was worshipped. It is also called as Sri Rama Navratras. Sri Ram Navratras ends on Ram Navami festival. Chaitra Navratras dates in 2011 are from April 4 to April 12.
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"नव संवत्सर" (विक्रम संवत-2068 )और "चेत्र शुक्ल प्रतिपदा" एवं "चेत्र नवरात्रि "के आगमन के साथ आई नव वर्ष की पावन वेला पर विनायक वास्तु टाईम्स"  परिवार और पंडित दयानंद शास्त्री की  ओर से आपको एवं आपके प्रियजनों को हार्दिक शुभ मंगल कामनाये!!!"शुभम भवतु " सभी का कल्याण हो...श्री -सम्रद्धि और आनंद  आप सभी के जीवन में बना रहे ...परिवार, समाज एवं राष्ट्र कल्याण के आप सहभागी-सहयोगी बने...यही कामना हे...
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भारतीय नव वर्ष :चैत्र शुक्ल प्रतिपदा----सृजन परिवार----


हमारी हिन्दू काल गणना विश्व कि सर्वाधिक वैज्ञानिक काल गणना है |इस दिन आने वाले निम्नलिखित अवसर इसे एक विशेष दिवस का दर्जा देते हैं:


नैसर्गिक:संवत्सर के आसपास पेडों में कोपल उग आते हैं,पेड-पौधे हरे-ताजे दिखाई देते हैं ।,ऐतिहासिक:श्री रामचंद्र के राज्याभिषेक इसी दिन हुआ था.शकोंने प्राचीनकालमें शकद्वीपपर रहनेवाली एक जाति हुणोंको (एक खानाबदोश जमात । सन्पूर्व दूसरी शताब्दी में चीन के आसपास इनका मूल निवासस्थान था ।) पराजित कर विजय प्राप्त की ।चक्रवर्ती विक्रमादित्य द्वारा प्रारंभ विक्रम संवत इसी दिन से प्रारंभ हुआ था.शालिवाहन ने अपने शत्रुओं पर विजय प्राप्त कर शालिवाहन संवत इसी दिन प्रारंभ किया.३. आध्यात्मिक:


सृष्टिकी निर्मिति: ब्रह्मदेवने इस दिन सृष्टिका निर्माण किया अर्थात् यहींसे सत्ययुगका आरंभ हुआ । इसी कारण इस दिन वर्षारंभ किया जाता है ।
देश के विभिन्न भू-भागों में इसे अलग-अलग नामों से मनाते हैं:
महाराष्ट्र: गुढी पडवा
कर्नाटक, आंध्र :उगादी
कश्मीर: नव रोज़
पंजाब: बैसाखी
सिंध: चेटी चंड
बंगाल: नब बर्ष
असम: गोरु बिहू
तमिलनाडु: पुथांडू
केरल: विशु
शेष भारत: नव वर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा.....
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पंडित "विशाल" दयानन्द शास्त्री

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