सभी  जानते हैं कि नशा खराब है, इससे शरीर, मन, धन, परिवार सब कुछ दाँव पर लग जाता है, मगर फिर भी लोग विशेषकर युवा बुरी तरह से इसकी गिरफ्‍त में आ जाते हैं। आज हर दूसरा युवा किसी न किसी नशे को अपनाता है। प्रारंभ में शौक में किया गया नशा बाद में लत बनता जाता है और सारा करियर तक चौपट कर सकता है। 

यह सच है कि नशे का आदी बनने में वातावरण का भी हाथ होता है, मगर हॉरोस्कोप यह संकेत पहले ही दे देता है कि किस व्यक्ति की रुचि नशा करने में रहेगी और वह किस तरह का नशा करेगा। यदि किशोरावस्था में ही इन संकेतों को समझकर संबंधित उपाय किए जाएँ तो उसे नशे के दानव की गिरफ्‍त में आने से बचाया जा सकता है। 

* लग्न में पाप ग्रह हो तो व्यक्ति की रुचि नशे में रहेगी। 

* लग्नेश अर्थात मुख्‍य ग्रह निर्बल हो, पाप प्रभाव में हो, तो नशे में रुचि रहेगी। 

* यदि लग्नेश नीच का हो, शत्रु क्षेत्री हो, चंद्रमा भी वीक हो तो नशे में रुचि रहेगी।

* लग्नेश का मंगल देखें तो व्यसन में रुचि होती है। 

* व्यय स्थान का पापी ग्रह अध्ययन में धन व्यय कराता है।

* बृहस्पति नीच का हो तो व्यसन में रुचि रहती है। 

* शुक्र-राहु या केतु के साथ हो, मुख्‍य ग्रह व चंद्रमा कमजोर हो तो व्यसन में रुचि होती है। 

* शनि का लग्न हो, शुक्र अष्टस्थ हो और शनि से दृष्ट हो तो भयंकर व्यसन होता है। लग्न पर सूर्य की दृष्टि माँस-मदिरा में, शनि की दृष्टि सिगरेट-गांजा आदि, मंगल की दृष्टि मदिरापान में रुचि जगाती है। 

यदि हॉरोस्कोप पितृ दोष से प्रभावित हो तो भी परिवार में नशे का दानव घर जमाता है। 

नोट : संबंधित ग्रहों की शांति कराने व उपाय करने से कष्ट कम अवश्य होते हैं।

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पंडित "विशाल" दयानन्द शास्त्री

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