ज्योतिष जगत में ग्रहों के अशुभ प्रभाव से बचने के लिये अनेक उपाय बताये गये हैं यहां हम ग्रह शान्ती के अत्यन्त सरल उपायों के बारे मे चर्चा करेगें ! हम ग्रहों के बारे में बात करते हैं जब कि समस्त ग्रह हमारे परिवार मे उपस्थित हैं हम उनके प्रति अपने आचरण व्यवहार को सुधारलें तो कुण्डली के ग्रह अपने आप अनुकूल हो जयेंगे !

सूर्य : यदि कुन्डली मे सूर्य अशुभ प्रभाब दे रहा हो तो परिवार मे सुर्य अर्थात पिता या पिता तुल्य लोगों का आदर सत्कार करना चहिये उनकी सेवा करनी चहिये उन्हें प्रसन्न रखना चहिये , यदि परिवार मे पिता या पिता तुल्य लोग आपसे संन्तुष्ट रहेंगे तो सुर्य के अशुभ प्रभाव से आप बचे रहेंगे !

चन्द्रमा : यदि कुन्डली मे चन्द्रमा अशुभ प्रभाब दे रहा हो तो परिवार मे चन्द्रमा अर्थात माता या माता तुल्य लोगों का आदर सत्कार करना चहिये उनकी सेवा करनी चहिये उन्हें प्रसन्न रखना चहिये  , यदि परिवार मे माता या माता तुल्य लोग आपसे संन्तुष्ट रहेंगे तो चन्द्रमा के अशुभ प्रभाव से आप बचे रहेंगे !

मंगल : यदि कुन्डली मे मंगल अशुभ प्रभाब दे रहा हो तो परिवार मे मंगल अर्थात भाई या भाईयों के तुल्य लोगों का आदर सत्कार करना चहिये उनकी सेवा करनी चहिये उन्हें प्रसन्न रखना चहिये , यदि परिवार मे भाई या भाई तुल्य लोग आपसे संन्तुष्ट रहेंगे तो मंगल के अशुभ प्रभाव से आप बचे रहेंगे !

बुध : यदि कुन्डली मे बुध अशुभ प्रभाब दे रहा हो तो परिवार मे बुध अर्थात बहनें या बहनों के तुल्य लोगों का आदर सत्कार करना चहिये उनकी सेवा करनी चहिये उन्हें प्रसन्न रखना चहिये , यदि परिवार मे बहनें या बहनों के तुल्य लोग आपसे संन्तुष्ट रहेंगे तो बुध के अशुभ प्रभाव से आप बचे रहेंगे !

गुरू : यदि कुन्डली मे गुरू अशुभ प्रभाब दे रहा हो तो परिवार मे गुरू अर्थात अध्यापक, धर्म आचार्य आदि या उनके  तुल्य लोगों का आदर सत्कार करना चहिये उनकी सेवा करनी चहिये उन्हें प्रसन्न रखना चहिये, यदि अध्यापक, धर्म आचार्य आदि या उनके  तुल्य लोग आपसे संन्तुष्ट रहेंगे तो गुरू के अशुभ प्रभाव से आप बचे रहेंगे !


शुक्र  : यदि कुन्डली मे शुक्र अशुभ प्रभाब दे रहा हो तो परिवार मे शुक्र अर्थात पत्नी या सम्पर्की लोगों से मधुर सम्बन्ध रखने चहिये, उनकी भावनाओं का सम्मान करना चहिये और उनको संन्तुष्ट और प्रसन्न रखना चहिये, यदि पत्नी या सम्पर्की लोग आपसे संन्तुष्ट रहेंगे तो शुक्र के अशुभ प्रभाव से आप बचे रहेंगे !

शनि : यदि कुन्डली मे शनि अशुभ प्रभाब दे रहा हो तो परिवार मे शनि अर्थात परिवार य समाज के सेवक अर्थात घर के नौकर आदि से प्रेम भाव से व्यवहार करना चहिये उनकी सेवा का पूर्ण मूल्य देना चहिये उन्हें प्रसन्न रखना चहिये  यदि परिवार के सेवक अर्थात घर के नौकर आदि आपसे संन्तुष्ट रहेंगे तो शनि  के अशुभ प्रभाव से आप बचे रहेंगे !

राहू :  यदि कुन्डली मे राहू अशुभ प्रभाब दे रहा हो तो परिवार मे राहू अर्थात  दादा या दादा तुल्य लोगों का आदर सत्कार करना चहिये उनकी सेवा करनी चहिये उन्हें प्रसन्न रखना चहिये , यदि परिवार मे  दादा या दादा तुल्य लोग आपसे संन्तुष्ट रहेंगे तो राहू के अशुभ प्रभाव से आप बचे रहेंगे !

केतू :  यदि कुन्डली मे केतू अशुभ प्रभाब दे रहा हो तो परिवार मे केतू  अर्थात  नाना या नाना तुल्य लोगों का आदर सत्कार करना चहिये उनकी सेवा करनी चहिये उन्हें प्रसन्न रखना चहिये , यदि परिवार मे  नाना या नाना तुल्य लोग आपसे संन्तुष्ट रहेंगे तो केतू के अशुभ प्रभाव से आप बचे रहेंगे !

ये उपाय अनुभव किये हुए हैं इन्हे लोगों ने प्रयोग किया और पुर्ण अनुकूल फल प्राप्त हुए........

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पंडित "विशाल" दयानन्द शास्त्री

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