सभी जानते हैं कि चक्र यानि गोल घेरा। यही चक्र जब हथेलियों में हो तो इसके अलग-अलग प्रभाव होते हैं। जिस व्यक्ति की अँगुली के सबसे ऊपर वाले पोर पर चक्र हो वह भाग्यशाली व धनवान होता है। ऐसे लोग जिसे भी अँगुली के इशारे से सामने वाले को कुछ कहें यह बात चक्र के समान तुरंत घूमकर पूरी होती है। चक्र स्पष्ट होना चाहिए, नहीं तो यही चक्रधारी को अनेक टेंशन भी दे सकता है। 

जिनकी अँगुलियों के पोरों पर चक्र होता है, ऐसे जातकों का व्यवहार अपने विवेक और निर्णय से संचालित होता है। ये महत्वाकांक्षी भी होते हैं। इनके दिमाग में कोई न कोई योजना चलती रहती है। ऐसे जातक सेल्फ रिस्पेक्ट वाले होते हैं। ये अपनी इच्छानुसार कार्य करने वाले रसिक मिजाज भी होते हैं।

अगर अँगूठे पर चक्र का निशान हो तो वह ऐश्वर्यवान, प्रभावशाली, दिमागी कार्य में निपुण, पिता का सहयोग व धन पाने वाला होता है। ऐसे जातक कुछ न कुछ ऐसे कार्य करते हैं जिससे इनका यश बना रहे। तर्जनी अँगुली में चक्र का निशान हो तो ऐसे व्यक्ति धनवान, प्रभावी, मित्रों से लाभ पाने वाले होते हैं। महत्वाकांक्षी होने के साथ-साथ धन का भी लाभ पाते हैं। सांसारिक सुखों का भोग कर सुखपूर्वक अपना जीवन व्यतीत करते हैं।

ऐसे जातक कुशल चिकित्सक, नेता, व्यापारी, अधिवक्ता भी हो सकते हैं। दूसरों के मुकाबले इनकी तर्क शक्ति अधिक होती है। ये अनेक विधाओं के जानकार भी होते हैं। इनमें से कुछ आध्यात्म की ओर रुचि रखते हैं व तीनों कालों का ज्ञान रखने वाले महापुरुष भी हो सकते हैं।

मध्यमा अँगुली पर चक्र का निशान होने से व्यक्ति धार्मिक प्रवृत्ति का होता है। चूँकि यह अँगुली शनि की होती है इस कारण से उन पर शनि ग्रह की कृपा बनी रहती है व उनकी कृपा से ऐसे जातक धनवान भी होते हैं। ऐसे जातकों के बारे में देखा गया है कि वे पराक्रमी, अनेक उद्योगों के स्वामी, उत्तम ज्योतिषी, तांत्रिक, मठाधीश भी होते हैं।

अनामिका यानी सूर्य की अँगुली पर चक्र होना भाग्यशाली जीवन का प्रतीक माना जाता है। ऐसे जातक उत्तम व्यापारी, धनवान, उद्योग धंधों में सफल, प्रतिष्ठित, यशस्वी, ऐश्वर्यवान, राजनीतिज्ञ, कुशल प्रशासनिक अधिकारी भी हो सकते हैं। कुछ आई.ए.एस. अधिकारियों की अँगुली में अनामिका चक्र देखकर इस बात की पुष्टि भी की जा चुकी है।

सबसे छोटी अंगुली (लिटिल फिंगर) को बुध की अँगुली कहते है। इस पर चक्र का होना ही सफल व्यापारी होने की निशानी होती है। ये देश-विदेश में अपना व्यापार कर सफलता पाते हैं। ऐसे जातक सफल लेखक, प्रकाशक होते हैं व सम्पादन के क्षेत्र में भी सफलता पा सकते हैं। 

संक्षेप में कहें तो जिस अँगुली पर चक्र होता है उस अँगुली से संबंधित ग्रहों का प्रभाव बढ़ जाता है। फर्स्ट फिंगर गुरु की, मध्यमा यानी बीच की अँगुली शनि की, अनामिका सूर्य की, लिटिल फिंगर बुध की तथा अँगूठा शुक्र व मंगल ग्रह का माना जाता है।

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पंडित "विशाल" दयानन्द शास्त्री

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