वास्तुशास्त्र के अचूक प्रयोग--

वास्तुशास्त्र के सिद्धान्तों के अनुसार अगर मकान या व्यवसायिक भवन का निर्माण नही हुआ है तो कुछ अचूक उपायों के द्वारा वास्तु में सुधार किया जा सकता है। यह तो पता ही है कि वास्तु का प्रभाव जीवन में धर्म अर्थ काम और मोक्ष चारों पुरुषार्थों में बराबर का पडता है,अगर धर्म खराब हो जाता है तो अर्थ पर भी असर आता है और अर्थ के खराब होने पर काम पर असर आयेगा और काम पर असर आते ही मोक्ष नही मिल पायेगा। पहले इन पुरुषार्थों को समझ लेना उचित रहेगा।

धर्म----

धर्म का मतलब कोई पूजा पाठ और जाप हवन से ही नही माना जाता है धर्म के और भी कई रूप है,माता पिता ने जन्म दिया है और उन्होने बिना किसी मोह के परवरिस केवल इसलिये की है कि उनका नाम चले और उनके नाम चलने के बाद उनकी संतान इस संसार में अपने नाम को चलाकर आगे की संतति को सही रूप से पाल पोश कर बडा बनाये,इसलिये भी माना जाता है कि माता पिता के बुजुर्ग होने के बाद उनकी संतान उनकी भी देखभाल करे,उनकी मृत्यु के समय उनकी संतान उनके पास हो और वे आराम से अपनी अन्तगति को प्राप्त कर सकें। घर मे रहने वाले लोग अगर अपने अपने अनुसार घर के अन्दर के सदस्यों और उन सदस्यों के रिस्तेदारों को मानते है आने जाने पर और घर के अन्दर रहने के समय चाही गयी आवभगत और एक दूसरे की तकलीफ़ में शामिल होते है,किसी समय चाही गयी सहायता में एक दूसरे की सहायता करते है यह ही धर्म का रूप कहा गया है,फ़र्ज को निभाना और एक ही घर के सदस्य होने के बाद भी तुमने हमारे साथ क्या किया है,हमने तुम्हारे साथ क्या किया है,इन बातों से धर्म नही माना जाता है,परिवार का मतलब होता है सभी सदस्य एक दूसरे के प्रति समर्पित होते है,और किसी भी आडे वक्त पर एक दूसरे के काम आते है। अगर इन बातों में फ़र्क है और घर के अन्दर एक दूसरे की बातों और कार्यों के प्रति बुराइया की जाती है एक दूसरे पर आक्षेप विक्षेप किये जाते है किसी ने किसी की किसी भी मामले में सहायता की है तो उसके प्रति अहसान दिया जा रहा है तो भी धर्म का रूप खराब हो जाता है। इसी प्रकार से घर जहां पर बना है उसके आसपास के पडौसियों से बनती नही है,बात बात पर नालियों और दरवाजों पर किये जाने वाले अतिक्रमणों का प्रभाव है,रोजाना किसी ना किसी मामले में थाना पुलिस होता है कोर्ट केश चलते है लडाई झगडा होता है तो भी वास्तु में धर्म नाम की कोई ना कोई बुराई मिलती ही है।

अर्थ----

अर्थ का रूप परिवार में आने वाली आय से माना जाता है। परिवार मे आने वाली आय के स्तोत्र अच्छे है और घर के बनने के बाद आय के साधनों में बढोत्तरी हुयी है या आय के साधनों में कमी आयी है,परिवार के लोग एक दूसरे से अधिक कमाने की प्रतिस्पर्धा कर रहे है कि एक दूसरे के भरोसे रहकर ही काम कर रहे है,घर बनाने के बाद या घर के अन्दर किये गये निर्माण या घर की बनावट रहन सहन करने के बाद कोई अक्समात फ़र्क कमाई पर पडा है आदि बातें वास्तु मे दोष की तरफ़ सूचित करती है,अक्सर देखा गया है कि वास्तु के बिगडते ही बेकार के खर्चे बढने लगते है घर के अन्दर की जाने वाली कमाइयां या तो अस्पतालों की दवाइयों में जाती है या लडाई झगडे में जाती है और कुछ नही तो घर के अन्दर अन्चाहा मेहमान आकर काफ़ी दिन के लिये रुक जाता है। घर के सदस्यों के अन्दर धन के मामले में तूतू मैं मैं होने लगती है,कर्जा बढने लगता है घर के ऊपर कर्ज ले लिये जाते है और वे चुकते नहीं है इस प्रकार से घर के चले जाने की चिन्ता दिमाग में लगी रहती है। घर में कन्या संतान का बोलबाला होने लगता है और उनकी शादी के बाद या तो घर कन्या संतान के हिस्से में चला जाता है अथवा कन्या सन्तान के ससुराल वाले किसी ना किसी राजनीति से घर के ऊपर कब्जा करने लगते है,यह सब अर्थ और भौतिक कारणों से वास्तु के खराब होने की बात कही जाती है। अभी जो कन्या संतान के मामले में बात लिखी है उसके अन्दर अक्सर इस प्रकार के घरों में दक्षिण-पूर्व (आग्नेय) दिशा में पानी के बहने के स्थान,जमीन से पानी निकालने के साधन,अग्नि दिशा से ही पानी को उत्तर दिशा के लिये निकाला जाता हो,पानी सदर दरवाजे के दाहिने से निकाला जाता हो,पानी का बहाव सीढी नुमा दक्षिण से उत्तर की तरफ़ गिरता हो,घर के पांच सौ मीटर के दायरे में दक्षिण की तरफ़ बहती हुयी कोई नदी या कृत्रिम नहर बह रही हो। इसके अलावा वह घर भी कन्या संतान के द्वारा प्रताडित किया जाता है जिसके उत्तर-पूर्व में कोई बडा बिजली का ट्रांसफ़ारमर रखा हो या बिजली घर का सबस्टेशन आदि बना हो। अक्सर बुध का प्रभाव खतरनाक तब और हो जाता है जब घर की किसी महिला को घर के लोगों के द्वारा ही प्रताणित किया जाने लगा हो। वह महिला भी बिना कुछ बोले मन ही मन में परिवार को समाप्त करने की बददुआयें देने लगी हो,अथवा परिवार की बडी और इकलौती बहू हो। पश्चिम मुखी घर अक्सर इन कारणों से सात से पन्द्रह साल के अन्दर उजड जाते है,पूर्व मुखी घर बदचलनी की तरफ़ चले जाते है,दक्षिणमुखी घर रहते तो है लेकिन अक्सर बंद ही रहते है,उत्तर मुखी घर तमाम तरह के राजनीतिक आक्षेप विक्षेपों की बजह से आने वाली पीढी के लिये खतरनाक होजाते हैं।

काम---

काम का मतलब शादी विवाह,सन्तान का जन्म और आगे की पीढी की बढोत्तरी से माना जाता है। घर के बनाने के समय काम नामक पुरुषार्थ का विशेष ख्याल रखना पडता है। घर के अन्दर जब पुत्र संतान है और उसकी शादी विवाह के बाद आगे की संतान भी सही सलामत है तो ही माना जा सकता है कि घर सही बना है,अगर घर बनाने के बाद घर में पुत्र संतान की शादी हो गयी,जब तक खुद का या पुत्र का भाग्य सही चला तब तक तो कोई परेशानी नही आयी,लेकिन कुछ समय बाद जैसे ही अपने भाग्य का असर बुरा हुआ और घर का भाग्य भी बुरा था ही अचानक छोटी छोटी बातों में घर के अन्दर क्लेश होने लगा,पुत्रवधू अचानक या तो अपने पीहर चली गई और वहां जाकर कोर्ट केश या अन्य तरह की परेशानी को पैदा करने में लग गयी,अथवा उसका मन नकारात्मक इनर्जी में समाता चला गया,वह लाख दवाई करने और तरह तरह के उपाय करने के बाद भी अपने को सही नही रख पायी,तो यह काम नाम के पुरुषार्थ का बिगडना कहा जा सकता है। अक्सर इस प्रकार के घरों का पानी सदर दरवाजे के नीचे से निकलता है,घर के अगल बगल में या सामने अथवा अग्नि कोण की तरह कोई नि:संतान व्यक्ति या काला या काना रहता होगा। घर के सामने कोई चरित्र से हीन स्त्री का निवास होगा,अथवा घर के बगल में कोई ऐसा व्यक्ति रहता होगा जो अपनी पत्नी से पीडित होगा और उसकी पत्नी नाजायज संबध अपने ही परिवार के व्यक्ति से बनाकर चल रही होगी। अक्सर इस प्रकार के घरों में महिलाओं का स्वास्थ किसी ना किसी कारण से खराब रहता है,इस प्रकार के घरों में घर का दरवाजा भी गंदगी से पूर्ण रास्तों पर खुलता है,अथवा घर के अग्नि कोण में पानी का साधन होता है।

मोक्ष---

घर के अन्दर जब उपरोक्त तीनो पुरुषार्थों को पूरा करने का साधन बनता है तभी मोक्ष यानी शांति का प्रादुर्भाव घर के अन्दर समावेशित होता है। खूब धन दौलत है खूब संतान घर के अन्दर है लेकिन घर में शांति नही है तो वह घर भूतों का डेरा ही माना जा सकता है। अक्सर समय से घर का निर्माण करने के लिये वेदों में बताया भी गया है,किसी घर के मालिक की कुंडली में शनि आठवें भाव में गोचर कर रहा है और उसने अपने घर को बनाने या निर्माण करने के बाद कुछ बदलाव करने की सोच ली तो उसका मतलब यह होगा कि घर में अगर पांच रुपये का खर्चा होगा तो अन्य कामों में पचास रुपये का खर्चा हो जायेगा। शांति की स्थापना के लिये घर के ईशान को समजना चाहिये। शांति की किरण सुबह के उगते सूर्य की किरण से जोडा जाता है,जिन घरों में सुबह की किरण प्रवेश करती है,वे घर सभी तरह से शांति मय कहे जाते है,घर में अगर सुबह की सूर्य की किरण नही पहुंचती है तो उन घरों में ईशान कोण में पूजा पाठ और कृत्रिम रोशनी का बन्दोबस्त करना पडता है,ध्यान रखना चाहिये कि ईशान की पूजा कभी धन को बढाने वाली नही होती है केवल घर के सदस्यों के मन को शांत करने वाली होती है घर के अन्दर जो भी काम किये जाते है वे शांति से पूरे होजाते है और सभी सदस्य नमक रोटी भी खाकर मजे से रहते हैं।
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पंडित "विशाल" दयानन्द शास्त्री

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