आज की माँ, अम्मा, मम्मी



तन को सजाना व्यर्थ है तेरा,

यदि मन को नहीं सजाती ।

ब्यूटी पार्लर में जा-जा जाकर तुम,

क्यों ? मातृत्व, सतीत्व, वात्सल्य

की सूक्ष्म-शक्ति को गंवाती??

द्वारा - गुरुतत्व शिवोम्‌ तीर्थजी।

क्या माँ, बहिन, बेटी, भाभी, बहू आदि को उपरोक्तानुसार सूक्ष्म-श्रृंगार मातृत्व, नारीत्व, वात्सल्य मिल सकता है ? 

कदापि नहीं ।
 इसी के कारण घर, परिवार, समाज में ऋणात्मक-ऊर्जा का सृजन हो रहा है । इसके कारण प्रत्येक घर में मन्थरा, कैकयी आदि का प्रादुर्भाव हो रहा है।


जब नन्ही-नन्ही बिटियों से लेकर 60 वसन्त पार करने वाली कल के भविष्य का निर्माण करने वाली सूक्ष्म-शक्तियों में एवं अन्य ब्यूटी-पार्लर के पायदानों पर चढते तथा उतरते देखते हैं तो यह ऋणात्मक भाव एवं भावना (Negative Emotions of Feeling) की मनोवृत्ति उत्पन्न होती है कि मातृ-शक्तियों को कहां ले जाएगी?

आज की नारियाँ न जाने किस भ्रम-विभ्रम के जाल में फंसकर स्वयं के साथ इतना अत्याचार करती हैं कि स्वयं को आकर्षक दिखाने के चक्कर में मातृत्व, सतीत्व, वात्सल्य आदि का सर्वदा त्याग करती जा रही हैं और उसका दोषारोपण न जाने किस-किस को दे रही हैं । वे टेम्पररी (Temporary) जवान दिखने के चक्कर में समय से पहिले ही परमानेन्ट (Permanent) बूढी होती जा रही हैं ।

नारी जितना वक्त तुम साज-सज्जा में खर्च करती हो या अन्य किसी रूप में सौन्दर्य बढाने के लिए खर्च करती हो, उतना ही वक्त यदि अपने पुत्र-बच्चों, बच्चियों को धनात्मक संस्कार बनाने में लगा देती तो निश्चित ही संसार में समस्त प्रकार का पर्यावरण स्वतः ही सामान्य हो जायेगा।

आज की नारियाँ?

कभी आइब्रो,

आज की नारियाँ?

कभी थ्रेडिंग,

आज की नारियाँ?

कभी ब्लीचिंग,

आज की नारियाँ?

कभी लेग ब्यूटी,

आज की नारियाँ?

कभी बॉडी वेक्सिंग,

आज की नारियाँ?

कभी फेशियल,

आज की नारियाँ?

कभी स्टेटनिंग,

आज की नारियाँ?

हेयर कलर,

आदि-आदि करके मातृत्व, सतीत्व, वात्सल्य की होली प्रतिदिन जलाकर पर्यावरण को बिगाडने में पूर्ण रूप से सहायक हैं ।

यह नारी-शक्ति अपना-अपना पिण्ड भी खराब कर रही हैं और ब्रह्माण्ड का पर्यावरण भी दूषित कर रही हैं ।

द्वारा - गुरुतत्व शिवोम् तीर्थ जी।
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पंडित "विशाल" दयानन्द शास्त्री

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