कुंडली में सौतन का योग---


वर्तमान में राहु के साथ शुक्र का गोचर होने से महिलाओं के अन्दर एक भय बहुत जोर से व्याप्त है। इस भय के कारण वे अपने में ही सिमट कर रह गयी है। जब जब शुक्र मंगल या गुरु के साथ राहु का गोचर होता है,पुरुषों के अन्दर स्त्रियों के प्रति और स्त्रियों के अन्दर पुरुषों के प्रति आकर्षण की भावना अपने आप पनपने लगती है। भगवान शिवजी की समाधि में जब कामदेव को उनकी समाधि को भंग करने के लिये देवताओं ने लगाया था उस समय इसी शुक्र और राहु का इन्तजाम किया गया था। कामदेव ने अपने बल से सुन्दरता नही होने के बावजूद भी स्त्री पुरुष वनस्पति जीव जन्तु के अन्दर काम नामकी भावना को भरा था और जिसे देखो वही अपनी कामुकता की बजह से ग्रस्त हो गया था। राहु को विस्तार के रूप मे माना जाता है और यह जब शुक्र यानी सुन्दरता के अन्दर अपना प्रवेश करता है तो वह शरीर के अन्दर न कुछ भी नही होने से अपने को विस्तार को बढाने की कोशिश करता है। शुक्र नाम की मादकता के चलते राह चलते लोग अपने अपने विरोधी सेक्स के प्रति अचानक आकर्षित हो जाते है और जो कार्य जीवन में सिवाय परेशानी देने के और कुछ नही माना जाता है शुरु हो जाता है। इस युति में लोग अपने वैवाहिक जीवन को भूल कर और अपने को अनन्तता की ओर लेजाने के चक्कर में गृहस्थ जीवन को समाप्त कर लेते है,इस युति के चलते ही अपने अन्दर कुत्सित विचारों को भरने के बाद समाज स्थान और आसपास के लोगों के अन्दर अपने को बदनाम कर लेते है। धनी लोग धन से,शरीर में बल रखने वाले लोग शरीर के बल से,चालाक लोग चालाकी से,और जो जिस काबिल होता है उस काबिलियत की बजह से अपने स्वार्थ की पूर्ति के उपाय करने लगता है।
वर्तमान मे राहु का स्थान धनु राशि में है यह स्थान धर्म और मर्यादा का भी माना जाता है,लोग अपने अपने कारणो से धर्म और मर्यादा को समाप्त करने में लग गये होते है। साथ ही शुक्र के साथ गोचर करने से जो भी समाज परिवार और खुद के द्वारा धार्मिक रिस्ते बनाये जाते है उनके अन्दर कोई न कोई विकृति पैदा हो जाती है। जो स्त्रियां अपने को अपने मर्यादा वाले जीवन से दूर ले जाती है उनकी अपनी चाहत केवल यही होती है कि वे अपने को धनु राशि की उच्चता में बिना मेहनत किये ही ले जाना चाहती है। उनके अन्दर एक प्रकार का भाव भर जाता है,जो उन्हे अन्य किसी भी कारण को सोचने से असमर्थ कर देता है। इस प्रकार के कारणों में वे स्त्रियां भी आजाती है जिनके अन्दर विदेशी भावना भरी होती है,जो अपने को उच्च शिक्षा की तरफ़ ले जाना चाहती है और जो विदेशी यात्रा से सम्बन्धित होती है और हवाई कम्पनियों आदि से जुडी होती है।
यह बात केवल स्त्रियों के लिये भी मान्य नही है,उन पुरुषों के अन्दर भी एक भूत सा भर जाता है जो ऐन केन प्रकारेण अपने स्वार्थ की पूर्ति करने में लगा रहता है। यह बात उम्र के लिहाज से भी सोचने के लिये मजबूर करती है,चाहे वह उम्र कितनी ही हो,लोग अपने अपने अनुसार अपने अपने साधन खोजने में लगे रहते है। इस प्रकार की भावना को दूर करने के लिये अलग अलग राशियों के अलग अलग उपाय होते है।
जन्म के राहु के साथ शुक्र का गोचर,जन्म के शुक्र के साथ राहु का गोचर,पुरुषों के लिये आकर्षण का समय माना जाता है,जन्म के मंगल के साथ राहु का गोचर और जन्म के राहु के साथ मंगल का गोचर स्त्रियों को आकर्षण की तरफ़ ले जाता है। इनके लिये समय को समझ कर अगर सम्बन्धित उपाय कर दिये जायें तो इस प्रकार के सौतन वाले योगों से बचा जा सकता है,और जो जीवन एक धार्मिक रूप से आजीवन साथ देने का वादा करता है वह हमेशा के लिये साथ दे सकता है।
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पंडित "विशाल" दयानन्द शास्त्री

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