मुखाकृति से भविष्य ज्ञान- डॉ. गोविंद बल्लभ जोशी

भविष्य जानने के लिए कई विद्याओं का प्रचलन है जिनमें फलित ज्योतिष, अंक विद्या, स्वर विज्ञान, हस्तरेखा विज्ञान प्रमुख हैं लेकिन सामने खड़े व्यक्ति की मुखाकृति को देखकर व्यक्तित्व एवं उसका भविष्य जानने का विज्ञान भी भारत में प्राचीन काल से चला आ रहा है।

वर्गाकार मुखाकृति ---
वर्गाकार मुखाकृति वाले व्यक्ति पृथ्वी तत्व प्रधान होते हैं। ऐसे व्यक्तियों की मुखाकृति की तस्वीर लेकर अगर चारों ओर लाइन लगाकर चतुष्कोण खींचा जाए तो इनका चेहरा चतुष्कोण में पूरा फिट आ जाएगा। यह जातक स्वस्थ, सुडौल एवं शक्तिसंपन्न होते हैं। इनमें उद्यमशीलता, व्यावहारिकता तथा संचय करने की प्रवृत्ति एवं गुण पाए जाते हैं। ऐसे लोग भौतिक साधनों से संपन्न, सुखी, समृद्ध होते हैं।

ये लोग सैद्धांतिक होते हैं और दूसरों से प्रभावित होकर आसानी से अपने सिद्धांत नहीं बदलते। अगर इनके चेहरे में पृथ्वी तत्व की मात्रा अधिक हो तो ये व्यक्ति हठी, अदूरदर्शी, आलसी, विलासी होते हैं तथा अपनी अकर्मण्यता के कारण बाद में दुखी होते हैं।

वर्गाकार मुखाकृति वाली स्त्रियों का शरीर स्थूल होता है। इनकी चाल धीमी तथा मतवाली होती है। ऐसी स्त्रियाँ कर्मठ, व्यवहारकुशल तथा मनमौजी होती हैं। अगर इनकी मुखाकृति में पृथ्वी तथ्व अधिक मात्रा में हो तो ये स्वभाव की दृष्टि से दुर्बल होती हैं।

वृत्ताकार मुखाकृति ---
 वृत्ताकार मुखाकृति वाले जल तत्व प्रधान होते हैं। यदि इनके चेहरे का चित्र लेकर एक गोले में फिट किया जाए तो उनमें यह लगभग फिट हो जाता है। ऐसे जातक के गाल भरे हुए माँसल एवं स्निग्ध होते हैं। इनका शरीर स्थूल तथा उदर लंबा होता है। यह लोग भावुक, कल्पनाशील, प्रसन्नचित्त, सहृदय, स्वप्नदर्शी मिलनसार एवं संवेदनशील होते हैं।

ऐसे लोग आराम पसंद जीवन बिताना पसंद करते हैं तथा संघर्ष से दूर भागते हैं। जिसके चेहरे पर जल तत्व का प्रभाव अधिक हो वे निराशावादी और अकर्मण्य होते हैं। गोल चेहरे वाली औरतें श्रृंगारप्रिय हावभाव वाली, बुद्धिमती तथा पतिव्रता, उदारहृदया, स्नेही तथा चंचल होती हैं। अगर जल तत्व का प्रभाव अधिक हो तो ये दुर्बल, निराश एवं रोगग्रस्त होती हैं।

नुकीली मुखाकृति - --
नुकीली मुखाकृति वाले व्यक्ति अग्नि तत्व प्रधान होते हैं। अगर इनके चेहरे की तस्वीर चतुष्कोण में फिट की जाए तो ललाट वाला ऊपरी भाग चौड़ा होगा और नीचे का ठोड़ी वाला भाग संकरा होगा अथवा यूँ कहा जा सकता है कि इनके चेहरे की आकृति बाल्टी जैसी होगी। कोनों में गोलाई नहीं होगी। ऊपर का भाग विस्तृत होने के कारण ऐसे लोग बुद्धिमान, चिंतक, दूरदर्शी, साहसी, स्वस्थ एवं समृद्ध, स्पष्ट वक्ता, अभिमानी, नेतृत्वप्रिय एवं हठी होते हैं। ये लोग शक्ति में विश्वास करते हैं और अगर कहीं वाद-विवाद में उलझ जाएँ तो पीछे नहीं हटते।

रचनात्मक एवं विध्वंसात्मक दोनों प्रकार के कार्य करते हैं। अगर चेहरे पर अग्नि तत्व का प्रभाव अधिक हो तो जातक अत्यंत क्रोधी, हिंसात्मक एवं पाश्विक वृत्ति का होगा। नुकीली मुखाकृति वाली स्त्रियाँ स्वाधीनताप्रिय, असहिष्णु एवं वाचाल होती हैं। गृहस्थ जीवन में ये औरतें सफल नहीं होतीं क्योंकि जरा-सी बात पर इन्हें क्रोध आ जाता है। हाँ, नौकरी, राजनीति एवं सामाजिक क्षेत्र में ये स्त्रियाँ उन्नति कर सकती हैं।

अंडाकार मुखाकृति - ---
अंडाकार मुखाकृति वायु तत्व प्रधान मुखाकृति होती है। जातक सामान्य कद के पुष्ट शरीर एवं उभरे स्निग्ध गालों वाले, आकर्षक और लुभावने होते हैं। ऐसे व्यक्ति आशावादी, स्वच्छंद, साहसी होते हैं तथा हर बात तर्क से करते हैं। यह हमेशा ज्ञान की जिज्ञासा, आनंद की खोज, शांति की चाह रखते हुए प्रगति की राह पर चलते हैं। अगर चेहरे का नीचे का भाग पुष्ट हो तो यह व्यक्ति प्रेम और सौंदर्य की इच्छा, काम पिपासा तथा व्यर्थ आचरण की कामना रखते हैं। यदि इन व्यक्तियों का चेहरा उलटे अंडे की तरह हो अर्थात इनका ललाट का भाग संकुचित हो और नीचे का भाग विस्तृत हो तो ऐसे व्यक्तियों की बुद्धि इतनी विकसित नहीं होती।

यह लोग हास्य एवं व्यंग्यप्रिय, मनमौजी, उथले स्वभाव के होते हैं। चेहरे के नीचे के भाग में वायु तत्व की प्रधानता जातक को असत्यवादी, अस्वस्थ एवं चिड़चिड़ा बनाती है। अंडाकार मुखाकृति वाली स्त्रियाँ सामान्य होती हैं परंतु थोड़े प्रयत्न से अच्छा जीवन साथी सिद्ध हो सकती हैं।

उलटे घड़े के समान मुखाकृति - ---
ऐसे जातक को देखकर ऐसा लगता है जैसे शरीर पर गर्दन सहित उलटा घड़ा रखा हो। इनमें आकाश तत्व की प्रधानता होती है। इनके चेहरे पर अद्भुत कांति तथा आँखों में विशेष तेज होता है। ऐसे लोग उदार हृदय, महत्वाकांक्षी, स्वाभिमानी एवं आदर्शयुक्त, एकांतप्रिय, सौम्य, तेजस्वी, आत्मबली एवं असाधारण प्रवृत्ति के होते हैं।

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पंडित "विशाल" दयानन्द शास्त्री

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