दूकान/ऑफिस में वास्तु से अधिक लाभ कमायें.....


हम वास्तु के द्वारा अपनी दूकान या ऑफिस का लाभ कई प्रतिशत तक बढ़ा सकने में सक्षम है जरूरत है सिर्फ वहां वास्तु के नियम अपनाने की, व्यावसायिक प्रतिष्ठान दूकान और ऑफिस का वास्तु अनुसार यदि उपचार करें तो बंद व्यापार भी खुल जाता है. कोई भी दूकान अपना व अपने परिवार का भरण-पोषण करने के लिए किया जाता है. यदि वस्तु के नियमानुसार व्यवसाय या दूकान की व्यवस्था करेंगे तो, वह शुभ होगा और लाभ में वृद्धि होने लगेगी. और इसका उत्तम फल प्राप्त होगा.अन्यथा मानसिक एवं आर्थिक परेशानियां ही प्राप्त होंगी.

दूकान के लिए गिने चुने भवन के ईशान कोण को बिलकुल खाली रखें और वह स्थान स्वच्छ व पवित्र बनाएँ रखें. ईशान कोण की स्वच्छता ही ग्राहक को आकर्षित करने में सहायक होती है.

दूकान या ऑफिस में पानी की व्यवस्था ईशान कोण में अथवा पूर्व दिशा या उत्तर दिशा में रखनी चाहिए.

दूकान या ऑफिस में पूजा स्थान भी आप ईशान कोण या पूर्व दिशा अथवा उत्तर दिशा में रखकर लाभ उठा सकते है.

दूकान या ऑफिस में जूते या भारी सामान के कार्टन अथवा अन्य प्रकार का भारी सामान यदि ईशान कोण में रखा है तो उसे तुरंत हटा दें यह व्यापार के लिए घातक सिद्ध होता है. जहां तक सम्भव हो सके तो, इस प्रकार का सामान दक्षिण या पश्चिम दिशा में स्थापित करें तो बिक्री अधिक होगी तथा आपके माल पर कोई शिकायत भी नहीं मिलेगी. ग्राहक हमेशा संतुष्ट रहेगा.
दूकान में तोलने वाला यंत्र, तराजू आदि को पश्चिमी या दक्षिणी दीवार के साथ किसी स्टैंड पर रखें तो, इससे नुक्सान नहीं होगा.
अपनी दूकान या ऑफिस में उत्तर-पूर्व (ईशान कोण), उत्तर और पूर्व दिशा का भाग ग्राहकों के आने जाने के लिए हमेशा खाली रखे. और यदि किसी कारण से मेला या गन्दगी से खराब हो जाए तो तुरंत सफाई करवा लें. इससे कोई भी विवाद ग्राहक से नहीं होता है. और ग्राहक प्रसन्न रहेगा.
दूकान में माल का भंडारण दक्षिण, पश्चिम अथवा नैऋत्य कोण में करें तो, शुभ फलदायक रहेगा.
दूकान या अपने ऑफिस में बिजली का मीटर, स्विच बोर्ड, इन्वर्टर आदि सामान आग्नेय कोण अर्थात दक्षिण-पूर्व दिशा के कोने में उचित रहता है. इसके परिणाम स्वरुप दूकान आदि में कभी भी कोई चोरी या अग्नि का भय नहीं रहेगा.
दूकान में सीडियां ईशान कोण के अतिरिक्त किसी भी दिशा में रख कर उपयोग कर सकते है.
दूकान, दफ्तर, फैक्ट्री के सामने कोई भी वेध नहीं होना चाहिए. अर्थात खम्भा, सीढी, पेड़ या बिजली, टेलीफोन आदि का खम्भा हानि का योग बनाते है.
पूर्व मुखी दूकान या ऑफिस में सड़क दूकान पर चढ़ने के लिए सीढियां ईशान कोण में बनवा सकते है.
दूकान का मालिक या मुख्य व्यवस्थापक को अपने बैठने का स्थान यथा संभव नैऋत्य कोण में बनवाना चाहिए. और अपना मुख पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर करके बैठना चाहिए. दूकान में पीने का पानी का पात्र ईशान कोण में रखें तथा प्रतिदिन दूकान खोलते समय भर कर रखें व पांच तुलसी के पत्ते उसमे डाल दिया करे. ऐसा करने पर ग्राहक जब भी दूकान में आएगा कोई न कोई वस्तु जरूर खरीदेगा, अर्थात वह दूकान से खाली वापस नहीं जाएगा.
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पंडित "विशाल" दयानन्द शास्त्री

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