रोजगार के नये अवसर : ज्योतिषी बनिये---(व्यंग्य)


रोजगार के नये अवसर के पहले भाग को अपने सराहा था और आदेशनुमा निवेदन किया था कि तत्काल दूसरे भाग को प्रकाशित किया जाये जिससे देश में बेरोजगारी की समस्या को व्यक्तिगत स्तर पर दूर किया जा सके । आपका आदेश मानने में मुझे थोड़ी देरी हुयी क्योंकि उसके दूसरे दिन ही एक महत्वपूर्ण घटना घट गयी । जागरण जंक्शन ने मुझे दो नंबर का ब्लागस्टार घोषित कर दिया । अभी कल ही खालिस 24 कैरेट सोने वाले, ओल्ड इज गोल्ड चाचा खुराना जागरण जंक्शन पर ब्लागपति का ताज हासिल करने में सफल हुये हैं । चाचा को बहुत बहुत बधाई लेकिन इस चक्कर में उन्होंने डाट भी खूब खाई । चाची और भतीजी दोनो को चाचा के अभिभावक होने का गौरव प्राप्त है । अमूमन हर शादीशुदा पति की अभिभावक उसकी पत्नी होती है । इट इज द मैटर ऑफ ट्रांसफर ऑफ पावर फ्रांम पैरेन्ट्स टू वाइफ । खैर बात हो रही थी नये रोजगारों की ।


पहले भाग में मैंने आपको होमवर्क दिया था कि अखबार में प्रकाशित होने वाले सभी ज्योतिषियों और तांत्रिकों के विज्ञापनों पर एक नजर दौड़ायें । कई उत्साहित पाठक न सिर्फ विज्ञापन बल्कि उन ज्योतिषियों और तांत्रिकों के दफ्तर तक भी दौड़ लगा चुके हैं । अच्छी बात है । कोई नया धंधा डालने से पहले सर्वे जरूरी होता है ।


तो मित्रों, यह धंधा चकाचक है । यह टोटली आपकी प्रतिभा पर निर्भर करता हैं कि आप सड़क पर बोर्ड लगाकर हाथ देखते हैं या फिर हवाई यात्रा करके किसी मंत्री के बेडरूम में पसर कर स्कॉच पीते हुये उसकी जन्मकुण्डली बांचते हैं । इधर फुटबाल के महाकुंभ में आपने आक्टोपस बाबा पाल की भविष्यवाणियों और बढ़ते यश का हाल तो देखा ही होगा । बेजानदारू वाला तक उनकी भविष्यवाणियों के आगे बेजान हो गये और दारू में डूब गये । बाबा पाल भविष्यवाणी करते करते इतने थक गये कि उन्होंने रिटायरमेंट की घोषणा कर दी । अच्छा ही किया । अपने देश जर्मनी को सेमीफाइनल में हरवा कर रिटायरमेंट ले लिये वर्ना जर्मनी की फुटबाल टीम वापस लौट कर उनके एक भी बाजू सलामत न छोड़ती ।


मित्रों, कोई नया धंधा स्टार्ट करने से पहले सर्वे जरूरी होता है । आप भी दो चार ज्योतिषियों या तांत्रिकों के ऑफिस जाकर देख आओ । न जा सको तो कोई बात नहीं मैं तफसील से समझाये देता हूँ । आफिस में दो कमरे होने चाहिये । एक रिसेप्शनिस्ट का कमरा दूसरे बाबा मस्तकलंदर का कमरा (एक गुप्त कमरा भी होना चाहिये जिसमें एक बेड पड़ा हो । इस कमरे में पुत्रवती होने का आशीर्वाद प्राप्त करने आयी सुघड़ महिलाओं को गुप्तरूप से दीक्षा दी जायेगी) । रिसेप्शन पर एक हसीन रिसेप्शनिस्ट रखो या फिर मुच्छड़ गैंडे जैसा पहलवान ये आपकी सोच पर निर्भर करता है । अनुभवी बाबा लोग जिनको अपनी प्रतिभा और ज्ञान पर पूरा भरोसा होता है (अपनी छठी इंद्री से जाना जाते हैं कि अब यह ग्राहक लौट कर दुबारा नहीं आयेगा) अपनी फीस काउंटर पर ही जमा करा लेते हैं । फीस आप 100 रू0 से लेकर 1100 रू0 तक रख सकते हैं । काउंटर पर बैठी वह चंचल हसीना अपनी शोख अदाएं दिखाते हुये ग्राहक से कुछ गैर जरूरी सवाल पूछेगी जैसे आपका नाम, कहां से आये हैं, क्यों आये हैं, क्या तकलीफ है, किसको तकलीफ है और किससे तकलीफ है – बेटे, बेटी, पत्नी, सास, साले, साली, सरहज, भाई, भतीजा, रखैल, महिलामित्र इत्यादि । यह सारी जानकारी एक फाईल मे नोट करके वह फाईल बाबा नोटानंद तक आपके पहले ही भेज दी जाती है । कभी-कभी यह जानकारी आपके बगल में ग्राहक बन कर बैठे बाबा श्मशानानंद के पालतू भक्त आप से बात ही बात में पूछ लेते हैं और बाबा जोगियानंद को जाकर बता देते हैं । अब आप अपना नंबर पुकारे जाने पर उठ कर दरवाजे के उस पार जैसे ही पहुंचोगे बाबा त्रिशूलानंद जी सूअरों जैसी हंसी हंसते हुये कहेंगे ”पधारिये देवकीनंदन खत्री जी, क्या हुआ बेटी फिर घर से भाग गयी ! कोई बात नहीं । सब मालूम है मुझे । पहले यह काम एन. सी. आर. में हम भी किया करते थे । अब वो काम अपने चेलों को सौंप दिया है और आप लोगों की सेवा के लिये इस धंधे में उतर आये हैं ।” आप फटी ऑंखों से बाबा करैतनाथ को देखोगे और तड़ से उनके चरणों में दण्डवत । बाबा को तो बिना बताये ही दिल का हाल मालूम है ।


देखिये मित्रों जितना बड़ा इन्वेस्टमेंट उतना बड़ा प्राफिट । बाबा त्रिपुंडानंद का कमरा ए.सी. होना चाहिये और बाबा को लैपटाप पर पिट पिट करना भी आना चाहिये । असर पड़ता है । फर्स्ट इम्प्रेशन इज दी लास्ट इम्प्रेशन । चाचा खुराना को लैपटाप इनाम में मिल रहा है वो चाहें तो यह धंधा आजमा सकते हैं । चाचा चेहरे से अनुभवी भी दिखते हैं । मैं स्मार्ट फोन लेकर उनको भक्तों की पोलपट्टी देता रहूंगा । आजकल दोनो का समय अच्छा चल रहा है । जब तक पब्लिक की ऑंखे खुलेगी तब हम दोनो 25-30 लाख का नफा समेट चुके होंगे । वो सब बाद की बात है । देखते हैं चाचा की क्या प्लानिंग है ।


अब थोड़ा ज्ञान की बात । दो-चार किताबें ज्योतिष और हस्तरेखाशास्त्र की पढ़नी होंगी । और एक किताब रत्नों के बारे में । ग्राहक को डराने के लिये शनी, राहू-केतू, नीच का मंगल और कालसर्प दोष का उच्चारण्ा बार बार करते रहना होगा । ग्रह शांति के लिये 5000 रू0 से लेकर 51000 रू0 तक की स्कीमें लैपटाप पर तैयार रखनी होंगी । इसके अलावा थोड़ा रत्नों की जानकारी भी होनी चाहिये । जयपुर से कौड़ियों के भाव रद्दी पत्थर थोक में खरीद लीजिये और हर ग्राहक को कम से कम एक पत्थर टिपाने की कोशिश कीजिये । पत्थर के मामले में एक बात मजेदार है कि आम आदमी इसकी कीमत का अनुमान भी नहीं लगा सकता है । पचास पैसे का लाल पत्थर मूंगा बता कर आप 5000 रू में बेच सकते हैं । यकीन नहीं आता । टीवी पर टेलीशापिंग वाले जो नवग्रह पत्थरों की माला या एक पत्थर की अंगूठी 2500 रू से 5000 रू तक में बेचते हैं उसका वास्तविक दाम 50 रू भी नहीं होता है । एक टोटका आप और कर सकते हैं । पहाड़ों से एक बोरा रूद्राक्ष मंगवा लीजिये । एक मुखी से लेकर चौदहमुखी तक के रूद्राक्ष आप चाहे तो भक्तों को फ्री में बांट दे या फिर 1100 से 5100 रू में बेच दें ।


मित्रों इस लेख में जो ज्ञान में आपको दे रहा हूँ इसकी रिसर्च करने में मेरा अब तक 20,000 रू0 खर्च हुआ है । आपको फ्री में दे रहा हूँ । आपको अगर मुफ्त की चीजों से घृणा टाईप कुछ है तो मेरी कंसलटेंसी फीस के रूप में आप जो भी चाहे 1100 रू0 या 2100 रू0 दे सकते हैं । मैं मना नहीं करूंगा ।


इस धंधे में किसी डिग्री की जरूरत नहीं है । बस अंधविश्वासी और कामचोर पैसेवाले भक्तों की जरूरत है जो सोचते हैं कि फला ग्रह की पूजा कराने से या फला पत्थर पहनने से उनके बिगड़े काम बन जायेंगे । असल में कर्म ही पूजा है । अब बस आप इस व्यंग लेख को पढ़ो और काम  पर लग जाओ । अगली कड़ी में एक नये रोजगार की बारीकियों के साथ फिर मुलाकत होगी । टिप्पणी करने मे कंजूसी मत दिखाईयेगा । बोलो बाबा व्यभिचारानंद की जय ।


नोट:  बाबा मस्तकलंदर, नोटानंद, श्मशानानंद, जोगियानंद, त्रिशूलानंद, करैतनाथ, त्रिपुंडानंद, व्यभिचारानंद आदि नाम आपकी सहूलियत के लिये दिये गये हैं । धंधा शुरू करने पर आप इनमे से कोई भी नाम अपना सकते है।

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पंडित "विशाल" दयानन्द शास्त्री

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