मंगल बदलेगा राशि, सरकार फंसेगी विवादों में-----???????


भारत की कुंडली वृष लग्न की है। वर्तमान में भारत की कुंडली के अनुसार मंगल द्वादश भाव (बारहवें घर) में चल रहा है। मंगल 13 जून को अपनी राशि मेष से निकल कर वृष राशि में आ जाएगा, तब भारत की कुंडली में मंगल लग्र (पहले घर में) भाव में रहेगा।


मंगल की ऐसी स्थिति भारत के लिए अशुभ और नकारात्मक फल देने वाली रहेगी। मंगल के प्रभाव से सरकार कुछ ऐसे महत्वपूर्ण फैसले ले सकती है जो ऐतिहासिक होंगे। 25 जुलाई तक मंगल वृष राशि में रहेगा। ऐसी स्थितियां बनने के योग हैं जिनके कारण भारत सरकार कई नए विवादों को जन्म दे सकती है। मंगल का असर देश की जनता पर भी पड़ेगा जिससे सरकार द्वारा लिए गए फैसलों से जनता में असंतोष पैदा होगा। जनता की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंच सकती है।


ग्रहों के फेरबदल में राह-केतु अपनी नीच राशि में आ गए है जो अपना नकारात्मक असर दिखा सकता। 13 जून से मंगल-केतु एक ही राशि में आ कर अंगारक योग बनाएंगे। 13 जून को पंाच ग्रह एक ही राशि में आ जाएंगे। यह योग पंचग्रही योग कहलाता है और यह वृषभ राशि में बनेगा। यह योग करीब तीन दिन रहेगा, जो संकेत करता है कि इस दिनों में कोई बड़ी घटना या राजनीतिक उलटफेर हो सकता है। यह योग ज्योतिष में अशुभ फल देने वाले हैं। ऐसे योग अग्नि कांड, घोटाले और किसी बड़े घटनाक्रम की और इशारा कर रहे हैं। शासन में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव भी होने के योग बन रहे हैं।
ग्रहों का फेर बदल या गोचर को ध्यान में रखकर जब कुछ बोला जाता है तो चंद्र राशि का विशेष महत्व होता है और चंद्र राशि से देखने पर मंगल द्वादश में नहीं १० भाव से ११ भाव में जा रहा है चुकि १५ अगस्त १९४७ को यदि चंद्र की अवस्था को देखे तो उस समय का चंद खुद सूर्य बुध शुक्र शनि से ग्रसित होता हुआ अपनी ही राशि में है चुकी इस समय में सूर्य की ही दशा भी चल रही है ये आने वाले समय में कुछ नये बदलाव लाएगा ये बात काफी हद तक सही है लेकिन मंगल का वृषभ राशि में जाना चंद्र से ११ होना अपने आप में कही नुक्सान तो कही पर मुनाफा भी देगा क्योकि ११ भाव अपने आप में लाभ भाव के नाम से ही जाना जाता है फिर स्त्री राशि (कर्क) में स्त्री ग्रह (शुक्र) का होना अपने आप में खराब नहीं है सूर्य चन्द्र के साथ होने से उतार चढाव तो लाएगा 
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पंडित "विशाल" दयानन्द शास्त्री

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