टाइम को टाइम पर करें कंट्रोल-----

आज के समय में विद्यार्थीयों के लिए सबसे महत्वपूर्ण है, समय का प्रबंधन क्योंकि विद्यार्थी जीवन के दौरान व्यतीत किया हुआ प्रत्येक सेकण्ड आने वाले समय में कई गुना परिणाम देने वाला होता है। जो विद्यार्थी क्षण-क्षण का उपयोग करते है, वे अपने जीवन में हमेशा सर्वश्रेष्ठ मुकामों को हासिल करते है। समय निरंतर आगे बढता रहता है।

समय की गति न कभी कम होती है न कभी ज्यादा होती है न उसे हम रोक के रख सकते है वह तो एक जैसा हमेशा आगे बढता रहता है। यदि हम भी समय की गति के साथ आगे बढते रहते है। तो हम अपने आप को पहले से अधिक बेहतर पाते है और जीवन में उन्नति कर पाते है। समय प्रबंधन का सबसे सरल सिद्धांत यह है कि हम अपने आप को समय के साथ मैनेज करते चले और अपने लक्ष्य की तरफ बढते जाये । सबसे पहले तो हमारा विज+न स्पष्ट होना चाहिए कि हम क्या चाहते है?

हमारा अगला कदम क्या होगा यह हमें पहले से ही मालुम होना चाहिए । यदि हम अपने कॅरियर के प्रति गंभीर है, जीवन में कुछ करना चाहते है, हमारे दोस्त अच्छे है, हमारी संगति अच्छी है, हमारे अंदर अच्छे विचार उत्पन्न होते है, हमारे आस-पास हमने सकारात्मक माहौल तैयार कर रखा है, तो निश्चित रूप से हम समय के महत्व को समझेंगे और अपने जीवन को बेहतर बनाने की तरफ कदम बढाऐंगे। जब हमारा विजन स्पष्ट है, हम हमारे कदमों को आगे बढा रहें है, तो हमें प्राथमिकता तय करनी होगी।

किसी समय में हमारे पास चार तरह के कार्य है, तो हमारे लक्ष्य के अनुसार हमें उस कार्य को पहले करना होगा जो हमें हमारे लक्ष्य तक पहुचने में सीधे मदद करता है। ऐसे सभी कार्य, ऐसे सभी लोग, ऐसे सारे विचार, ऐसी सारी स्थितियॉ, जो लक्ष्य प्राप्ति में सीधे मदद नही करती है, उन्हें विनम्रता पूर्वक टाल दें या फिर नजर अंदाज कर दें।

जानबुझ करके इन दूसरी चीजों में समय देकर हम अपने समय को नष्ट कर रहें होते है। समय हमारे पास सीमित ही है, असीमित नही है। अतः प्राथमिकता के आधार पर ही कार्य करें। अपने स्वास्थ्य पर जरूर ध्यान दे ऐसे सभी खाद्यपदार्थ, पेय पदार्थ, जो मन को चंचल बनाते हो शरीर में आलस्य का निर्माण करते हो सुपाच्य न हो हमारे शरीर को शक्ति देने के बताये शक्ति को चुसते हो खाने योग्य नही है।

नियमित व्यायाम, घुमने जाना योग, प्राणायाम करना प्राकृतिक चिकित्सा करवाना निहायति जरूरी है। यदि हम शारिरिक रूप से स्वस्थ है तो हम समय प्रबंधन बहुत ही आसानी से कर लेते है। मानसिक रूप से स्वस्थ रहना भी जरूरी है।

ज्यादा कल्पनाओं के जाल बुनने से, भूतकाल का पश्चाताप करने से, भविष्य के बारे में नकारात्मक सोचने से, अधिक मनोरंजन करने से, ज्यादा बोलने से, मानसिक ऊर्जा नष्ट हो जाती है अतः इन सबसे बचे ध्यान एवं त्राटक के उपयोग से, वाद्य यंत्रों के संगीत से शास्त्रीय संगीत की धुनों से, ध्यान लगाने से अपनी चेतना को श्वास, प्रश्वास पर केन्द्रित करने से, अच्छा साहित्य पढने से, हमारा मन एकाग्र हो जाता है। हम अन्दर से अपने आप को स्थिर और सहज पाते है।

जो कार्य हम पहले साठ मिनिट में करते थे वह कार्य अब हम पचास मिनिट में करने लग जाते है। इस प्रकार हमें कार्य करने के लिए अधिक घण्टे मिल जाते है हमारे पास एक हफ्ते में 168 घंटे होते है। हमारे पास एक दिन में 24 घंटे होते है जिसमें से 10 घंटों पर हमारा कोई नियंत्रण नही होता है किन्तु 14 घंटें हमारे पास प्रतिदिन होते है जिसमें हम कार्य करने योग्य होते है, इन 14 घंटों का सर्वश्रेष्ठ उपयोग हमें हमारे जीवन में बहुत आगे ले जायेगा स्कुल की पढाई स्कुल में करें स्कुल का होमवर्क स्कुल से आते से ही करले कोचिंग की पढाई कोचिंग में ही करें और कोचिंग का होमवर्क कोचिंग से आते ही करें।

परीक्षा में सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि आपने स्वअध्ययन कितना किया है। कोचिंग और स्कुल के होमवर्क के अलावा जो आप स्वंय रिवाईज करते है याद करते है अपना खुद का टेस्ट लेते है कठीन चीजों को अतिरिक्त समय देते है इससे आप दूसरों से बेहतर अंक ला सकते है। 1 घंटें से लेकर 2 घंटों तक का स्वअध्ययन निहायति जरूरी है।

स्कूल के अवकाश के दिन का उपयोग स्कुल के नियमित समय में ही पूर्ण करें जो आगे पढाया जाना है उसका पहले से ही तैयारी करें। कोचिंग के अवकाश का उपयोग कोचिंग के अतिरिक्त कार्यो को एवं जो पढाया जाने वाला है उसकों पूरा करने में अपना समय दे।

यदि पहले का कुछ छुटा हुआ है तो उसे किसी मित्र या शिक्षक की सहायता से अवकाशवाले दिन करने की कोशिश करें। नियमित अध्ययन एवं प्रत्येक क्षण का स्वस्थ रहते हुए सर्वश्रेष्ठ उपयोग हमें प्रतियोगिता में सबसे आगे ले जाकर खड़ा कर देगा।
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पंडित "विशाल" दयानन्द शास्त्री

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