स्मार्ट और फिट बनाए रखता है यह हनुमान मंत्र  ---





आज के दौर में सुख, सुविधाओं को जुटाने के लिए न केवल अधिक मेहनत, परिश्रम की जरूरत है, बल्कि सबसे अहम हैं जीवनशैली और दिनचर्या को अनुशासित रख शरीर को तंदुरूस्त रखना। तभी लंबे समय तक निरोग और चुस्त रहकर ही बेहतर नतीजे पाना संभव है।

खासतौर पर आज युवा पीढ़ी के लिए चुस्ती और स्फूर्ति बहुत मायने रखती है। क्योंकि उनको जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए हर क्षेत्र में अधिक संघर्ष करना होता है। ऐसे में उनके द्वारा शरीर को स्वस्थ्य बनाए रखने के लिए व्यायाम की आधुनिक सुविधाओं का उपयोग, सुबह की दौड़ सहित अनेक तरीके अपनाए जाते हैं। लेकिन वास्तविकता यह है कि मानसिक बल के बिना शारीरिक बल बेमानी हो जाता है।

धर्म शास्त्रों में तन और मन से शक्ति संचय और संतुलन प्राप्त करने के लिए पवनपुत्र हनुमान की उपासना प्रभावी बताई गई है। श्री हनुमान उपासना के लिए अनेक मंत्र, चौपाई, चालीसा, स्त्रोत का शास्त्रों में उल्लेख है। किंतु यहां बताया जा रहा है हनुमान के स्मरण का एक ऐसा सरल मंत्र, जिसका जप, ध्यान किसी भी वक्त करना खासतौर पर विपरीत हालात में, आपको मानसिक, आत्मिक रुप बल देकर शारीरिक रूप से भी तरोताजा रखता है।

इस मंत्र के अधिक शुभ फल के लिए यथासंभव समय निकालकर श्री हनुमान की नीचे लिखी सरल विधि से पूजा कर इस पुराणोक्त हनुमान मंत्र का उच्चारण करें -

- मंगलवार, शनिवार, हनुमान जयंती या हनुमान अष्टमी पर इस मंत्र जप का विशेष रुप से प्रभावी होता है। 

- सुबह स्नान करें। ब्रह्मचर्य का पालन सरल शब्दों में तन, मन और वैचारिक संयम रखें। 

- घर के देवालय या हनुमान मंदिर में वीर हनुमान (गदा या पहाड़ उठाए, राक्षस का मर्दन करती हुई प्रतिमा) की पंचोपचार पूजा करें। 

- पूजा में श्री हनुमान को सिंदूर, गंध, लाल फूल, अक्षत चढ़ाएं।

- श्री हनुमान को लाल अनार या गुड़, चने का भोग लगाएं। 

- घी या चमेली के तेल का दीप, गुग्गल धूप लगाकर हनुमान आरती करें। 

- पूजा या आरती के बाद इस सरल मंत्र से श्री हनुमान का ध्यान करें -

मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्|

वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये।।


इस मंत्र में श्री हनुमान के ब्रह्मचर्य पालन, इन्द्रिय संयम, तीक्ष्ण बुद्धि के स्वामी, भक्त और तेजस्वी स्वरूप की ही महिमा बताई गई है। जिसको बोलने से उपासक को भी वैसी ही ऊर्जा प्राप्त होती है।

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पंडित "विशाल" दयानन्द शास्त्री

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