शिव को इस मंत्र से चढ़ाएं गंगाजल---





भगवान शिव भक्त और शरणागत वत्सल कहलाते हैं। जिसका अर्थ है कि वह भक्त को बहुत स्नेह करने वाले हैं। व्यावहारिक नजरिए से स्नेह विश्वास, ऊर्जा और इरादों में शक्ति देने वाला होता है। माता-पिता या बड़ों का स्नेह जिस तरह हौंसला और आगे बढते रहने को प्रेरित करता है।

इसी तरह भक्त की भक्ति से जब भगवान का स्नेह बरसता है, तो तन, मन या धन के रूप में मिलने वाले स्नेह से सुख और आनंद की कमी नहीं रह जाती है। शिव के भक्तों से स्नेह और कल्याण भाव ने ही गंगा के भीषण प्रवाह को जटाओं में समेटकर पावन व ज्ञान रूपी गंगा की धारा को जगत के लिये कल्याणकारी बना दिया।

यही कारण है कि शिव उपासना में गंगाजल अर्पित करने का महत्व है। शिव भक्ति आसान भी है और शीघ्र फल देने वाली भी। इसलिए सोमवार के दिन भगवान शिव को यहां बताए जा रहा मंत्र बोलकर गंगाजल की धारा अर्पित करें तो सुखों की धारा जीवन को भिगो देगी।

- सोमवार को सुबह स्नान कर शिव मंदिर या घर में शिवलिंग के सामने बैठकर शिव का ध्यान करें।

- इसके बाद शिव पर गंगा जल में सुगंधित फूल, अक्षत डालकर नीचे लिखें मंत्र से गंगा जल की धारा अर्पित करें -

गंगोत्तरी वेग बलात्‌ समुद्धृतं

सुवर्ण पात्रेण हिमांषु शीतलं

सुनिर्मलाम्भो ह्यमृतोपमं

जलं गृहाण काशीपति भक्त वत्सल।

- गंगाजल अर्पित कर शिव की सफेद चंदन, बिल्वपत्र के साथ विशेष रूप से मूंग चढ़ाएं। शिव को मूंग चढ़ाने का फल सभी सुख देने वाला बताया गया है। नेवैद्य अर्पित करें।

- भगवान शिव की स्तुति या नाम जप ही करें। शिव की आरती धूप, घी के दीप और कर्पूर से करें। अंत में मंगल और सुख की कामना से शिवलिंग पर चढ़ाये गंगाजल को सिर पर लगाकर ग्रहण करें।
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पंडित "विशाल" दयानन्द शास्त्री

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