टीवी पर नहीं दिखेंगे भ्रामक एस्ट्रो एड!


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टेलीविजन पर टीवी शॉप कार्यक्रमों में आमतौर पर देखे जाने वाले तंत्र मंत्र, रक्षा कवच, ज्योतिष एवं जादू टोने से जुड़े विज्ञापनों पर भ्रम फैलाने और तथ्यात्मक रूप से गलत जानकारी देने से संबंधित शिकायतों पर एएससीआई ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को ऐसे विज्ञापनों पर रोक लगाने का सुझाव दिया है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने एएससीआई को पत्र लिखकर इस मामले में सुझाव देने को कहा था।

एएससीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि मंत्रालय को भेजे जवाब में परिषद ने कहा कि ऐसे विज्ञापन जिनके माध्यम से अवैज्ञानिक, तकनीकी एवं तथ्यात्मक रूप से गलत तथा भ्रम फैलाने वाली जानकारी दी जाती है।

परिषद ने इस विषय में विभिन्न टीवी चैनलों पर प्रसारित विज्ञापनों का जिक्र किया, जिसमें रक्षा कवच, तंत्र मंत्र, रत्न आदि के माध्यम से दुर्घटना, आपदा आदि से रक्षा का दावा किया जाता है।

इस विषय में मंत्रालय ने हरियाणा एवं पंजाब उच्च न्यायालय की टिप्पणी के आलोक में परिषद को पत्र लिखकर पूछा था कि क्या तंत्र मंत्र, ज्योतिष आदि से जुड़े विज्ञापनों को औषधि एवं जादू टोना निवारक (आपत्तिजनक विज्ञापन) कानून 1954 के दायरे में लाया जा सकता है। परिषद ने कहा कि वह उच्च न्यायालय के सुझाव का समर्थन करती है।

कुछ दिन पहले ही डियोडरेंट, साबुन आदि के विज्ञापन पर प्राप्त शिकायतों के बाद परिषद ने टेलीविजन चैनलों पर इनका प्रसारण बंद करने को कहा था।

एएससीआई के अधिकारी ने बताया कि परिषद ने नवंबर 2010 से मार्च 2011 के बीच प्राप्त शिकायतों के आधार पर विज्ञापनकर्ताओं से या तो इनके प्रारूप में बदलाव करने अथवा इसे हटाने को कहा है।

उन्होंने कहा कि जिन कंपनियों के विज्ञापनों के बारे में शिकायत प्राप्त हुई है, उनमें डाबर, हिन्दुस्तान यूनीलीवर, आईटीसी, ला ओरियेल, हुंदई मोटर्स, टीवीएस वीगो, वाइल्ड स्टोन, सेटवेज्टा, एक्स आदि शामिल है। शिकायतों में कहा गया है कि इन विज्ञापनों में महिलाओं की गलत तस्वीर पेश होती है।

दिल्ली उच्च न्यायालय के अधिवक्ता अशोक के सिंह ने कहा कि टेलीविजन पर तथ्यात्मक रूप से गलत विज्ञापनों के प्रसारण पर रोक लगाने के लिए कानून तो हैं, लेकिन इन पर अमल ठीक ढंग से नहीं होता है। इसके साथ ही कानून में दंड के प्रावधान सख्त नहीं हैं।

उन्होंने कहा कि औषधि एवं जादू टोना निवारक (आपत्तिजनक विज्ञापन) कानून 1954 में ऐसे विज्ञापनों के नियमन एवं दंड का प्रावधान है। कानून की परिभाषा के दायरे में जादू टोना, तंत्र मंत्र, ज्योतिष आदि के माध्यम से गलत विज्ञापन को लाया गया है।

उन्होंने कहा कि कानून की धारा 4 और 5 में कहा गया है कि कोई भी व्यक्ति औषधि, तंत्र मंत्र, जादू टोना आदि के माध्यम से दुर्घटना, शारीरिक बीमारी, पेशे में बढोत्तरी, बाधा दूर करने जैसे गलत दावे नहीं कर सकता है।
सिंह ने हालांकि कहा कि कानून में अधिकतम एक वर्ष के कारावास या जुर्माना या दोनों का प्रावधान है। इसे बढ़ाए जाने की जरूरत है।
विश्वास और अंध विश्वास में बहुत सूक्ष्म अन्तर होता है और ज्योतिष शाश्त्र के अधकचरे जानकार जनता को इसी सूक्ष्म अन्तर को आधार बना कर लूटते है ! ऐसा नहीं है कि सारे भविश्य वक्ता झूठे है लेकिन बहुत कम ही लोग इस विध्या के सटीक जानकार बचे है !ये सारे विज्ञापन  लोगो में भ्रम फैला रहे है, इन पर रोक लगना ही चाहिए! हा, ये सब बोगस दवाई है. ऐसी कोई दवा, मँत्र, जप, ताप, यँत्र, दुवा, रत्न असल मेँ नहीँ होती जिससे मनुष्य का जीवन सुखमय हो जाता है. बेपारी लोग अपने स्वार्थ के लिए लोगोँको फँसते हैँ. कानून में सक्त सजा होनी चाहिए. विश्वास और अंध विश्वास में बहुत सूक्ष्म अन्तर होता है और ज्योतिष शाश्त्र के अधकचरे जानकार जनता को इसी सूक्ष्म अन्तर को आधार बना कर लूटते है ! ऐसा नहीं है कि सारे भविश्य वक्ता झूठे है लेकिन बहुत कम ही लोग इस विद्या के सटीक जानकार बचे है ! इस लोगो के खिलाफ लीगल स्टेप लेना चाहिऐ.उनके सब दावे ग़लत होते है.इन लोग वुमैन को ग़लत तरीके से फसाते हे.उनका फायदा लेते हे.




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पंडित "विशाल" दयानन्द शास्त्री

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