जानिए की मेने क्या और केसे देखा???? वर्ड ट्रेड फेयर -2011 में..???

जे राम जी हुकम./खम्मा घनी (गुड मोर्निंग/सुप्रभात/आदाब)...आप सभी ने फोटो देख लिए होंगे अब तक तो कल शाम (17 -11 -2011 )को जो में वर्ड ट्रेड फेयर  देखने गया था न ..प्रगति मैदान दिल्ली में ..हांजी तो मेने प्रवेश किया था गेट नंबर तीन(03 ) से फिर वहां से में गया भारतीय मंडप यानि भारत के सभी राज्यों द्वारा प्रदर्शित स्टालों /मंडपों/ पेवेलियन  को देखने में..-04-05 घंटे से भी अधिक समय लग गया और इतनी जमकर थकान हुई की क्या कहूँ !!! एक तो जानकारी का अभाव दूसरा उचित मार्गदर्शन नहीं मिला इस कारण जहा ठीक लगा वहीँ प्रवेश कर गया...
एक विशेष बात-वहां के मिडिया सेन्टर  पर अच्छे लोग और व्यवस्थित जाकारी उपलब्ध थी...
जब मेने अन्दर जाकर सूचना केंद्र/पब्लिक रिलेशन सेंटर पर मदद चाही तो तो किसी ने भी मदद/सहायता नहीं की..और तो और वहां मोजूद दिल्ली के स्थानीय पत्रकार बंधुओ में से किसी भी माई का लाल ने कोई कमल नहीं दिखाया!!  सब के सब अपनी-अपनी ????? में लगे हुए थे...ऑफिस वाले ने एंट्री कार्ड बनवाने के लिए "एक विशेष फार्म मिलता "हे वो भी नहीं दिया???? वहा कोई बाबूलाल जी थे उन्होंने एक अन्दर के ऑफिस में भेजा ..वहां से टका सा जवाब दे दिया. हो गयी मेरी छुट्टी और उनकी ड्यूटी पूरी...भगवान भला करे जी उन सभी सरकारी मुलाजिमों का और उस वक्त वहां पर मोजूद सभी पत्रकारों का!!!!
हाँ ..खेर छोडिये..इसी ही परमपरा/रिवाज होगा जी दिल्ली का--आगे चलिए मेरे साथ में--उड़ीसा,मेघालय,नागालेंड,राजस्थान,महाराष्ट्र,गुजरात,कर्नाटक,तमिलनाडु,उत्तरप्रदेश, पश्चिम बंगाल,केरल,दिल्ली हरियाणा,जम्मू कश्मीर,बिहार ..और भी अनेक/कई राज्यों के मंडप/स्टाल/पेवेलियन मेने देखे और मुझे  भाए/अच्छे भी बहुत लगे.. महाराष्ट्र, कर्नाटक और राजस्था के पेवेलियन तो दिल जीत लिया था..एक बात ध्यान  रखे जो लोग सामान खरीदना चाहते हे वे पूरी जानकारी लेकर ही अन्दर प्रवेश करे वर्ना मेरी तरह फालतू  की थकान हो जाएगी.. कुल मिलकर एक नया/अनोखा मनोरंजक/ज्ञान वर्थक  अनुभव रहा..  तो आप लोग कब जा रहे हें जी देखने-वर्ड ट्रेड फेयर,2011 ...वहां जाने के लिए मेट्रो ट्रेन और बसों की उत्तम/बहुत अच्छी  व्यवस्था मोजूद हे...भीड़ से बचने के लिए टिकिट लेकर जाये(किसी भी मेट्रो ट्रेन स्टेशन से) वेसे गेट नंबर 01 और 02 पर भी टिकिट उपलब्ध हें ..
और हाँ जी लिखना/ बताना भूल गया कुछ विदेशी/पडोसी देशो के भी  पेवेलियन वहां पर लगे हुए हें जो में देख नहीं पाया...शायद आप लोग????

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पंडित "विशाल" दयानन्द शास्त्री

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