ऐसा हो वास्तु सम्मत कोचिंग सेंटर---

किसी भी भवन का जब निर्माण किया जाए तब उसमें वास्तुशास्त्र के सिद्धांतों का भलीभांति पालन करना चाहिए चाहे वह निवास स्थान हो या व्यवसायिक परिसर ।आज भारत में कोचिंग सेन्टर का महत्व तेजी से बढ़ता जा रहा है। जहाँ युवा उचित मार्गदर्शन में अच्छी शिक्षा पाकर ऊँचें पदों पर आकर्षक नौकरीयाँ प्राप्त कर रहे हैं।छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिये अच्छे कोचिंग सेन्टर की तलाश रहती है, जो उनकी कसौटी पर खरा उतरें और उनके लक्ष्य की प्राप्ति में सच्चा मार्गदर्शक साबित हो सकें।
यदि कोचिंग सेन्टर की साज-सज्जा एवं बैठक व्यवस्था वास्तु अनुरूप की जाये, तो निश्चित ही वहाँ अध्ययन करने वाले छात्रों को उनकी योग्यता के अनुसार सफलता मिलेगी व सेन्टर के संचालकों को उचित लाभ व प्रसिद्धि प्राप्त होगी। 
01 क्लास रूम की लंबाई और चैड़ाई 1: 2 के प्रमाण से अधिक न हो। कोचिंग सेन्टर के सभी कमरे समकोण होने चाहिए। कोचिंग सेन्टर बेसमेन्ट या पतली गली में नहीं होना चाहिये।
02 सेन्टर के फर्ष का लेवल समतल अथवा उत्तर, पूर्व एवं ईषान कोण में नीचा और दक्षिण, पष्चिम एवं नैऋत्य कोण में ऊंचा रहना चाहिए।
03 क्लास में ब्लैक बोर्ड पश्चिम या दक्षिण की तरफ हो। यहां चाहे तो शिक्षक के खड़े होने के लिए एक-डेढ़ फीट ऊँचा प्लेटफार्म भी बना सकते हैं।
04 सेन्टर में काउन्सलिंग के लिये आये छात्रों के बैठने के लिए चेयर उत्तर या पूर्व दिषा में रखना चाहिए
05 सेन्टर पर किसी भी छात्र को बीम या परछत्ती के नीचे बैठकर प्रेक्टीस नहीं करना चाहिए, इससे मानसिक तनाव उत्पन्न होता     है। यदि जगह के अभाव के कारण बीम के नीचे बैठकर कार्य करना मजबूरी हो, तो फेंग शुई के अनुसार बीम के दोनों ओर 2 बांसुरी लाल रिबन में बांधकर 450 कोण में लगाकर इस दोष को दूर किया जा सकता है।
06 क्लास रूम में सफल एवं प्रसिद्ध व्यक्तियों के सुंदर फोटो होने चाहिए, ताकि छात्र उनसे प्र्रेरणा ले सकें। 
07 सेन्टर के किसी भी कमरे की दीवारों एवं परदों पर कहीं भी हिंसक पशु-पक्षियों के, उदासी भरे, रोते हुए, डूबते हुए सूरज या जहाज के, ठहरे हुए पानी की तस्वीरें, पेंटिंग या मूर्तियां न लगाएं, यह छात्रों के जीवन में निराशा पैदा करती हैं। जिससे कार्य क्षमता प्रभावित होती है।
08 सेन्टर में किसी भी प्रकार की बंद पड़े कम्प्यूटर, प्रिन्टर, घड़ी, टेलीफोन, फैक्स, फोटोकाॅपी मशीन इत्यादि नहीं होने चाहिए। यह बंद पड़ी चीजें वहां के छात्रों के अध्ययन में रूकावटें पैदा करती हैं।
09 सेन्टर का प्रवेष द्वार पूर्व ईषान, दक्षिण आग्नेय, पष्चिम वायव्य या उत्तर ईषान मंे ही होना चाहिए। कभी भी पूर्व आग्नेय, 
दक्षिण, पष्चिम नैऋत्य या उत्तर वायव्य में नहीं होना चाहिए। दरवाजा हमेशा दो पल्ले का अंदर की ओर खुलने वाला हो।
10 सेन्टर में टायलेट वायव्य कोण में बनाना चाहिये कभी भी ईशान कोण में नहीं बनाना चाहिये।
11 सेन्टर की दीवारों एवं पर्दों का रंग हल्का हरा, हल्का नीला होना चाहिए या सेन्टर की दीवारों व पर्दों का कलर लाइट रखना चाहिए। इससे वहां कार्यरत अध्ययन करने व कराने वालों के दिमाग में शांति रहती है। गहरे रंग उग्रता लाते हैं। 
12 कोचिंग सेन्टर के बाहर लकड़ी, प्लास्टिक या किसी धातु से बना सेन्टर का खूबसूरत साइनबोर्ड अवश्य लगाना चाहिए, जो आपके यहां आने जाने वालों को अच्छी तरह दिखाई दे सके। आकर्षक साइनबोर्ड लगाने से सेन्टर की प्रसिद्धि में वृद्धि होती है। बोर्ड पर उचित रोशनी की व्यवस्था भी करना चाहिये।
13    कोचिंग सेन्टर का कार्यालय भवन के पूर्व में हो। जहाँ प्रवेश देने का एवं फीस लेने का कार्य होता हो। कोचिंग सेन्टर की स्टेशनरी भवन के दक्षिण या पश्चिम में ही रखनी चाहिए। लायब्रेरी भवन के पश्चिम में होना चाहिए।

इन साधारण किंतु चमत्कारिक वास्तुशास्त्र सिद्धांतों के आधार पर यदि कोचिंग सेन्टर का निर्माण किया जाऐ तो उत्तरोतर प्रगति संभव है। 

  पं0 दयानन्द शास्त्री 
विनायक वास्तु एस्ट्रो शोध संस्थान ,  
पुराने पावर हाऊस के पास, कसेरा बाजार, 
झालरापाटन सिटी (राजस्थान) 326023
मो0 नं0 --- 09024390067
 E-Mail –    vastushastri08@yahoo.com,  
          ---   -vastushastri08@rediffmail.co

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पंडित "विशाल" दयानन्द शास्त्री

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