सिंह  राशी (मा, मी, मू, मो, टा, टी, टू, टे ) का राशिफल(2012 )----

2012 का यह राशिफल चन्द्र राशि आधारित है और वैदिक ज्‍योतिष के सिद्धान्‍तों के आधार पर तैयार किया गया है। 
नए वर्ष की शुरुआत अच्छी होगी, किन्तु कोई नया काम अथवा कोई निवेश करने से बचें, अन्यथा कठनाइयों तथा क्षति का सामना करना पड़ सकता है | वर्ष के पूर्वार्ध में नया काम शुरू करने से बचें, नहीं तो दिक्कीतों का सामना करना पड़ सकता है. अपनी वाणी पर नियंत्रण रखें. लंबी यात्राएं फायदेमंद साबित नहीं होंगी. प्रतियोगिता से घबराएं नहीं, उनका आनंद उठाएं.सिंह राशी एक प्रभावशाली राशी होती हें..यह जातक को महत्वकांक्षी बनती हें..क्यों की इस राशी का स्वामी सूर्य हें..इस वर्ष इस राशी के गोचर पर गुरु नवां और दशम भाव/स्थान में संचार करेगा,शनि तीसरे भाव में ,रहू चोथे और केतु कर्मभाव में विचरण करेंगे..
अपनी वाणी पर नियंत्रण रखें, सोच समझ कर नपा तुला संवाद करे | लंबी यात्राएं नुक्सानदायक होंगी, तो ऐसी यात्रायें बचने का प्रयास करे | साल के मध्य में किस्मत का सितारा चमकने की प्रबल संभावना. जीवनसाथी का रवैया सहयोगात्मक रहेगा. धार्मिक कार्यों के प्रति रुचि बढ़ेगी.
समाज में लोगो से मिलने जुलने में संकोच न करे, आत्मविश्वास बनाये रखे | प्रतियोगिता से घबराएं नहीं, उनका सामना करे तथा सफलता का आनंद उठाएं | वर्ष के मध्य में भाग्य का पूरा साथ मिलेगा | जीवनसाथी, परिजन व मित्रो का रवैया सहयोगात्मक रहेगा | वर्ष के पूर्वाद्ध नया काम शुरू करने से बचें. व्‍यापारी वर्ग को काफी दिक्‍कतों का सामना करना पड़ सकता है. लंबी यात्राएं आपके लिए खास फायदेमंद साबित नहीं होंगी..पत्नी के स्वास्थ में उतर-चढाव से चिंता रहेगी..
धार्मिक कार्यों के प्रति आपकी आस्था व रुचि बढ़ेगी | समाज में यश वृद्धि और कार्यक्षेत्र में प्रगति होगी | मानसिक तनाव से मुक्ति मिलेगी व रोगों में शांति मिलेगी | भाग्य आपका साथ देगा. समाज में यश वृद्धि और करिअर में प्रगति होगी. मानसिक शांति मिलेगी. तनाव काफी हद तक कम हो सकता है. 
स्वास्थ्य ----पेट की गर्मी के कारण आपको बवासीर और फोड़े फुंसियों की शिकायत हो सकती हैआपको सावधान रहना चाहिए और रोग से बचने के लिए रेस्तरां या होटल में खाना खाने या बासी खाने से बचें.मंगल आपकी कुण्डली के प्रथम भाव में गोचर कर रहें है, इसलिए भोजन की विषाक्तता से संबंधित रोग हो सकते हैं.सभी रोगों का मुख्य कारण त्रिदोष का असंतुलन है. (वात, पित और कफ) आपके भीतर वात दोष अधिक है और पित्त दोष कम है क्योंकि शनि आपकी कुण्डली में छठे भाव का स्वामी है..घुटनों और जोड़ों के दर्द की समस्या से परेशान हो सकते हें..विवाहित लोग अपने जीवन साथी के स्वास्थ्य का ध्यान रखें..

ये करें उपाय---
०१.--रविवार के दिन सांड को गुड खिलाएं..रविवार का उपवास/व्रत करें..अपने खाने में सफ़ेद  वास्तु का प्रयोग करें...
०२.--रविवार के दिन आदित्य ह्रदय स्रोत का पाठ करें.. इसके कारण सभी काम में मन लगेगा और सफलता मिलेगी..
०३.--सूर्य यंत्र की पूजा करें..इक्कीस रविवार बंदरों को गुड खिलाएं.मन्त्र -."ह्लीं श्रीं सों:"  का जप करें..  
०४.--रात में अग्नि  को दूध से शांत करें/बुझायें..
०५.--दान करें--लाल वस्त्र,लाल वास्तु,गेंहूँ,तांबा,दोपहर में ब्रह्मण को दान करें..
०६.--भगवान  शिव पर शमी पत्र,जो,केसर,शिवलिंगी प्रत्येक सोमवार को अर्पित करें..

वास्तु और सिंह राशी के जातक---इस राशी वाले जातक के लिए उत्तर-पूर्व दिशा शुभ रहती हें..सिंह राशी वालों के लिए सभी रंग के साथ-साथ हरा रंग अधिक लाभदायक होगा..इन लोगों को किसी भी शहर के दक्षिण भाग में निवास नहीं करना चाहिए...
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पंडित "विशाल" दयानन्द शास्त्री

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