जानिए ग्रहों का रत्नों से सम्बन्ध ( जन्म कुंडली के लग्न अनुसार)-----
 
भारतीय ज्योतिष  के अनुसार रत्नों का विशेष महत्व है। नीलम का इन रत्नों में सबसे खास स्थान है। इसी नीलम के बारे में लोगों में कई तरह की भ्रातियाँ हैं। यह सही भी है कि नीलम हर किसी को लाभकारी नहीं रहता। हमारे विशेषज्ञ बता रहे है कि किस लग्न के व्यक्ति को नीलम कैसे प्रभावित करता है। लग्न कुंडली के केंद्र में बैठा हुआ अंक कहलाता है। हर अंक किसी न किसी राशि का प्रतिनिधित्व करता है।

मेष लग्न : इस लग्न के लिए शनि ग्रह दशम (कर्म) तथा एकादश (लाभ) जैसे दो शुभ भावों का स्वामी होकर व्यक्ति के जीवन में अति महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, क्योंकि व्यक्ति का पिता पक्ष कर्म तथा लाभ व्यक्ति के जीवन में अति महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जन्मांक में शनि ग्रह का सूर्य, चन्द्र, मंगल एवं गुरू से दृष्टि संबंध न होने पर व्यक्ति को नीलम रत्न धारण अवश्य करना चाहिए। इसके द्वारा कार्य में लाभ, मान-सम्मान में वृद्धि होती है। अतः इस लग्न के व्यक्तियों को किसी विद्वान ज्योतिष द्वारा सलाह लेकर नीलम पहनने के संबंध में अवश्य जानना चाहिए।

वृषभ लग्न : इस लग्न के लिए शनि ग्रह भाग्य व दशम भाव का स्वामी होकर पूर्णतः कारक ग्रह की भूमिका निभाता है। इस लग्न के व्यक्ति को नीलम अवश्य धारण करना चाहिए। जन्मांक में निर्बल स्थिति में शनि होने पर नीलम धारण करने से व्यक्ति को भाग्य व कर्मक्षेत्र संबंधी श्रेष्ठ सफलता प्राप्त होती है।

मिथुन लग्न : इस लग्न के लिए शनि भाग्येश व अष्टमेष होता है। अतः इस लग्न के जातक को नीलम अवश्य पहनना चाहिए। यदि जन्मांक में शनि ग्रह की दृष्टि बुध, शुक्र, गुरू, चन्द्र ग्रह पर हो तब शनि रत्न नीलम धारण करने से पूर्व किसी विद्वान ज्योतिष से सलाह अवश्य लेना चाहिए।

कर्क लग्न : इस लग्न के लिए शनि ग्रह सप्तम तथा अष्टम भाव जैसे अकारक भावों का अधिपति होकर लग्नेश चन्द्र ग्रह का शत्रु होता है। अतः इस लग्न के व्यक्ति को नीलम रत्न धारण नहीं करना चाहिए।

सिंह लग्न : इस लग्न के लिए शनि ग्रह सप्तमेष तथा षष्टेश होकर दो अकारक भावों का स्वामी होता है। अतः इस लग्न के व्यक्ति को नीलम धारण करने से बचना चाहिए।

कन्या लग्न : इस लग्न के लिए शनि ग्रह पंचम जैसे शुभ तथा षष्ठ जैसे अशुभ भावों का अधिपति होता है। यदि जन्मांक में मंगल, सूर्य जैसे ग्रह शनि की दृष्टि में हों, तब व्यक्ति को नीलम धारण करना चाहिए।

तुला लग्न : इस लग्न के लिए शनि ग्रह सुख के पंचम भाव का स्वामी होकर अत्यंत कारक ग्रह बन जाता है। अतः इस लग्न के जातक को नीलम अवश्य धारण करना चाहिए। नीलम इस लग्न के व्यक्ति को असाधारण सफलता देता है।

वृश्चिक लग्न : शनि इस लग्न के लिए सुख (पद) तथा पराक्रम स्थान का स्वामी होकर जातक के जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। चूँकि यह लग्नेश मंगल ग्रह का शत्रु है। अतः शनि ग्रह की सूर्य, चन्द्र, मंगल एवं गुरू पर दृष्टि या षडाष्टक योग होने पर जातक को शनि रत्न नीलम नहीं पहनना चाहिए। गुरू शनि का नवपंचम योग तथा अन्य ग्रहों से प्रतियोग न होने की स्थिति में जातक को विद्वान ज्योतिष से सलाह लेने के पश्चात नीलम धारण करना चाहिए।

धनु लग्न : इस लग्न के लिए शनि रत्न नीलम लग्न का शत्रु होकर द्वितीय तथा तृतीय जैसे अकारक भावों का स्वामी होता है। चूँकि यह ग्रह संचित धन से संबंध व षडाष्टक होने पर नीलम रत्न नहीं पहनना चाहिए। उपरोक्त स्थिति न होने पर शनि महादशा में शनि रत्न धारण किया जा सकता है।

मकर लग्न : इस लग्न के लिए शनि ग्रह लग्न तथा धन भाव का स्वामी होकर परमकारक ग्रह होता है। अतः इस लग्न के व्यक्ति को नीलम अवश्य धारण करना चाहिए।

कुंभ लग्न : इस लग्न के लिए शनि रत्न नीलम लग्न व व्यय का स्वामी होकर परमकारक ग्रह की भूमिका निभाता है। अतः इस लग्न के व्यक्ति को नीलम अवश्य पहनना चाहिए।

मीन लग्न : इस लग्न के लिए शनि लाभ तथा व्यय भाव का स्वामी होकर जन्मांक में अकारक ग्रह की भूमिका निभाता है। चूँकि शनि ग्रह लाभ भाव से संबंध रखता है। अतः किसी विद्वान ज्योतिष की सलाह तथा शनि का चन्द्र, मंगल, गुरू से प्रतियोग न होने पर ही शनि का रत्न धारण करना चाहिए।

नीलम रत्न चूँकि त्वरित परिणाम देने में सक्षम है। अतः किसी विद्वान ज्योतिष की सलाह के पश्चात्‌ ही इस रत्न को धारण करना चाहिए।
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पंडित "विशाल" दयानन्द शास्त्री

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