ये हे नजरदोष कारण और निवारण( आइये जाने की क्यों लगती हें नजर और क्या हें उपाय..???)---

स्थायी व दीर्घकालीन लाभ के लिए निम्नलिखित कार्य अवश्य करें---
• गायत्री मंत्र का जप (संध्या के समय) और जप के दशांश का हवन। 
• हनुमान जी की निंरतर उपासना। 
• भगवान शिव की उपासना व उनके मूल मंत्र का जप। 
• महामृत्युंजय मंत्र का जप।
• मां दुर्गा और मां काली की उपासना।
• स्नान के पश्चात्‌ तांबे के लोटे से सूर्य को जल का अर्य दें।
• पूर्णमासी को सत्यनारायण की कथा किसी कर्मकांडी ब्राह्मण से सुनें।
• संध्या के समय घर में दीपक जलाएं।
• प्रतिदिन गुग्गुल की धूनी दें।
• घर में प्रतिदिन गंगाजल छिड़कें।
• प्रतिदिन सुंदर कांड का पाठ करें।
• आसन की शुद्धि का ध्यान अवश्य रखें।
• किसी के द्वारा दिया गया सेव व केला न खाएं।
• रात्रि बारह से चार बजे के बीच कभी स्नान न करें।
• बीमारी से मुक्ति के लिए नीबू से उतारा करके उसमें एक सुई आर-पार चुभो कर पूजा स्थल पर रख दें और सूखने पर फेंक दें। यदि रोग फिर भी दूर न हो, तो रोगी की चारपाई से एक बाण निकालकर रोगी के सिर से पैर तक छुआते हुए उसे सरसों के तेल में अच्छी तरह भिगोकर बराबर कर लें व लटकाकर जला दें और फिर राख पानी में बहा दें।
• घर व दुकान में प्रातः काल गंगाजल छिड़कें और संभव हो, तो नहाते समय भी गंगाजल प्रयोग में लाएं।
• पूर्णमासी को सत्यनारायण की कथा करवाएं।
• रामायण का पाठ करें।
• घर के निकट मंदिर में प्रातः काल जाकर देव दर्शन करें।
• संध्या समय घर में पूजा स्थल पर दीपक जलाएं।
• संध्या समय घर में नीम के सूखे पत्ते का धुआं दें।
• घर व उसके आस-पास पीपल न उगने दें। केले का पेड़ घर में न लगाएं।
• घर से बीमारी न जा रही हो, तो जायफल उतारकर अग्नि में डालें
• रात्रि में दुःस्वप्न आते हों व ऊपरी हवाएं परेशान करती हों, तो लहसुन के तेल में हींग मिलाकर एक बूंद नाक में लगाएं
विशेष : उतारा आदि करने के पश्चात भलीभांति कुल्ला अवश्य करें।
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पंडित "विशाल" दयानन्द शास्त्री

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