आइये जाने-समझे कुछ जरुरी लाभदायक वास्तु उपाय/टिप्स----

हमारे रहन सहन में वास्तु शास्त्र का विशेष महत्व है। कई बार हम सभी प्रकार की उपलब्धियों के बावजूद अपने रोजमर्रा की सामान्य जीवन शैली में दुखी और खिन्न रहते हैं। वास्तु दोष मूलतः हमारे रहन सहन की प्रणाली से उत्पन्न होता है। प्राचीन काल में वास्तु शास्त्री ही मकान की बुनियाद रखने से पहले आमंत्रित किए जाते थे और उनकी सलाह पर ही घर के मुख्य द्वार रसोईघर, शयन कक्ष, अध्ययन शाला और पूजा गृह आदि का निर्णय लिया जाता था। यदि आपने नया घर लिया है या पुराने घर को रिनोवेट कराने की सोच रहे हैं तो कुछ वास्तु बदलाव जरूर करके देख लीजिए। यकीनन आपके घर की ऊर्जा में फर्क महसूस होगा। घर में नेगेटिव ऊर्जा को दूर करने और पॉजिटिव ऊर्जा लाने के लिए कुछ वास्तु उपाय करने चाहिए। यूं भी दीपावली पास आ रही है। ऐसे में यदि चाहते हैं कि लक्ष्मी सदा के लिए आपके घर में निवास करें और उनकी कृपा आपके ऊपर और आपके घर पर बरसती रहे तो कुछ साधारण से वास्तु उपाय कीजिए। आजकल के शहरी जीवन और तड़क-भड़क की जिन्दगी में हम नियमों को ताक में रखकर मनमाने ढंग से घर या मकान का निर्माण कर लेते हैं। जब भारी लागत लगाने के बावजूद भी घर के सदस्यों का सुख चैन गायब हो जाता है, तब हमें यह आभास होता है कि मकान बनाते समय कहां पर चूक हुई है। अतः मकान बनाने से पहले ही हम यहां पर कुछ वास्तु टिप्स दे रहे हैं, जिनका अनुशरण करके आप अपने घर-मकान, दुकान या कारखाने में आने वाली बाधाओं से मुक्ति पा सकते हैं----

व्यापार में सफलता देते हैं यह वास्तु टिप्स---
वास्तु शास्त्र के सिद्धांत सिर्फ घर पर ही नहीं बल्कि ऑफिस व दुकान पर भी लागू होते हैं। यदि दुकान या ऑफिस में वास्तु दोष हो तो व्यापार-व्यवसाय में सफलता नहीं मिलती। किस दिशा में बैठकर आप लेन-देन आदि कार्य करते हैं, इसका प्रभाव भी व्यापार में पड़ता है। यदि आप अपने व्यापार-व्यवसाय में सफलता पाना चाहते हैं नीचे लिखी वास्तु टिप्स का उपयोग करें- 
वास्तु शास्त्रियों के अनुसार चुंबकीय उत्तर क्षेत्र कुबेर का स्थान माना जाता है जो कि धन वृद्धि के लिए शुभ है। यदि कोई व्यापारिक वार्ता, परामर्श, लेन-देन या कोई बड़ा सौदा करें तो मुख उत्तर की ओर रखें। इससे व्यापार में काफी लाभ होता है। इसके पीछे वैज्ञानिक कारण भी है कि इस ओर चुंबकीय तरंगे विद्यमान रहती हैं जिससे मस्तिष्क की कोशिकाएं सक्रिय रहती हैं और शुद्ध वायु के कारण भी अधिक ऑक्सीजन मिलती है जो मस्तिष्क को सक्रिय करके स्मरण शक्ति बढ़ाती हैं। सक्रियता और स्मरण शक्ति व्यापारिक उन्नति और कार्यों को सफल करते हैं। व्यापारियों के लिए चाहिए कि वे जहां तक हो सके व्यापार आदि में उत्तर दिशा की ओर मुख रखें तथा कैश बॉक्स और महत्वपूर्ण कागज चैक-बुक आदि दाहिनी ओर रखें। इन उपायों से धन लाभ तो होता ही है साथ ही समाज में मान-प्रतिष्ठा भी बढ़ती है।
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छोटे छोटे वास्तु टिप्स, जिनसे खत्म होगा मानसिक तनाव---( मिलगा सुख,वैभव एवं समृद्धि)----
आजकल हर किसी की जिंदगी भागदौड़ से भरी है। हर कोई इस तरह अपने काम में लगा हुआ है कि मानसिक शांति तो बिल्कुल ही नहीं है। किसी के भी पास अपने आप के लिए वक्त ही नहीं है। अगर  आप मानसिक तनाव से मुक्ति चाहते हैं तो नीचे लिखे वास्तु प्रयोग जरूर अपनाएं इनको अपनाने से आप खुद को सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर महसूस करेंगे।
---- रात में झूठे बर्तन न रखें। 
---- संध्या समय पर खाना न खाएं और नही स्नान करें।
---- शाम के समय घर में सुगंधित एवं पवित्र धुआ करें। 
----- दिन में एक बार चांदी के गिलास का पानी पीएं। इससे क्रोध पर नियंत्रण होता है।
---- शयन कक्ष में मदिरापान नहीं करें। अन्यथा रोगी होने तथा डरावने सपनों का भय होता है।
---- कंटीले पौधे घर में नहीं लगाएं।
----- किचन में अग्रि और पानी साथ न रखें।
---- अपने घर में चटकीले रंग नहीं कराये।
----- घर में जाले न लगने दें, इससे मानसिक तनाव कम होता है।
---- किचन का पत्थर काला नहीं रखें।
----- भोजन रसोईघर में बैठकर ही करें।
----- इन छोटे-छोटे उपायों से आप शांति का अनुभव करेंगे।
----- घर में कोई रोगी हो तो एक कटोरी में केसर घोलकर उसके कमरे में रखे दें। वह जल्दी स्वस्थ हो जाएगा।
----- घर में ऐसी व्यवस्था करें कि वातावरण सुगंधित रहे। सुगंधित वातावरण से मन प्रसन्न रहता है।
----पूजा की दिशा ---- अपने पूजा घर की स्थिति को पहचानिए। पूजा घर पूर्व-उत्तर (ईशान कोण) में होना चाहिए तथा पूजा यथासंभव प्रातः 06 से 08 बजे के बीच भूमि पर ऊनी या सूती आसन पर करनी चाहिए। इस बात का ध्यान रहे कि पूजा करते समय आपका चेहरा पूर्व या उत्तर की ओर रहे। हो सके तो पूजा घर के ईशान कोण में जल से भरा कलश रखें। 
----अगर रसोई घर गलत दिशा में हो तो----रसोई घर गलत स्थान पर हो तो अग्निकोण में एक बल्ब लगा दें और सुबह-शाम अनिवार्य रूप से जलाये। द्वार दोष और वेध दोष दूर करने के लिए शंख, सीप, समुद्र झाग, कौड़ी लाल कपड़े में या मोली में बांधकर दरवाजे पर लटकायें। इससे रसोई में होने वाले दोष दूर होंगे और घर में अन्नपूर्णा की कृपा रहेगी। 
------तनाव दूर करने के लिए रंगों का प्रयोग - ---कभी कभी देखने में आता है कि घर का हर सदस्य किसी न किसी तनाव से घिरा होता है। ऐसे में घर में पवित्र और शांत वातावरण नहीं बन पाता। यदि आपके घर में तनाव रहता है तथा आप हर समय किसी न किसी प्रकार की चिंता में घुले रहते हैं तो मानसिक शांति के लिए ड्राइंग रूम में हल्के नीले रंग के सोफासेट का प्रयोग करें। दीवारों पर भी हल्के रंग की शेड करवाएं। गहरे रंग के शेड घर में रह रहे लोगों के भाव को भी गहरा देंगे। 
------घर में पवित्र माहौल बनाए स्वास्तिक - ---स्वास्तिक केवल पूजा के लिए ‌नहीं बल्कि वास्तु दोष दूर करने का भी चिह्न है। या फिर यूं कहिए कि स्वास्तिक वास्तु दोष दूर करने का सबसे अच्छा मंत्र है। स्वास्तिक ग्रहों को शांत कर शांत वातावरण लाता है। साथ ही ये धनकारक योग भी बनाता है। इसलिए घर में वास्तु दोष दूर करने के लिए और धन वृद्धि के साथ घर के मुख्य द्वारा पर स्वास्तिक का चिह्न बनाना चाहिए और अष्टधातु से निर्मित स्वास्तिक पिरामिड यन्त्र को पूर्व की तरफ दीवार पर बीच में टांगना चाहिए। इससे मांगलिक कार्य जल्द होंगे और घर में सुख समृद्धि बनी रहेगी।
----उत्तर अथवा पूर्व में बड़ा खुला स्थान नाम, धन और प्रसिद्धि का माध्यम होता है। अपने मकान, फार्म हाउस कॉलोनी के पार्क फैक्टरी के उत्तर-पूर्व, पूर्व या उत्तरी भाग में शांत भाव से बैठना या नंगे पैर धीमे-धीमे टहलना सोया भाग्य जगा देता है। 
----- दक्षिण-पश्चिम में अधिक खुला स्थान घर के पुरूष सदस्यों के लिए अशुभ होता है, उद्योग धंधों में यह वित्तीय हानि और भागीदारों में झगड़े का कारण बनता है। 
----घर या कारखाने का उत्तर-पूर्व (ईशान) भाग बंद होने पर ईश्वर के आशीर्वाद का प्रवाह उन स्थानों तक नहीं पहुंच पाता। इसके कारण परिवार में तनाव, झगड़े आदि पनपते हैं और परिजनों की उन्नति विशेषकर गृह स्वामी के बच्चों की उन्नति अवरूद्ध हो जाती है। ईशान में शौचालय या अग्नि स्थान होना वित्तीय हानि का प्रमुख कारण है । 
-----सुबह जब उठते हैं तो शरीर के एक हिस्से में सबसे अधिक चुंबकीय और विद्युतीय शक्ति होती है, इसलिए शरीर के उस हिस्से का पृथ्वी से स्पर्श करा कर पंच तत्वों की शक्तियों को संतुलित किया जाता है। 
-----सबसे पहले उठकर हमें इस ब्रह्मांड के संचालक परमपिता परमेश्वर का कुछ पल ध्यान करना चाहिए। उसके बाद जो स्वर चल रहा है, उसी हिस्से की हथेली को देखें, कुछ देर तक चेहरे का उस हथेली से स्पर्श करें, उसे सहलाएं। उसके बाद जमीन पर आप उसी पैर को पहले रखें, जिसकी तरफ का स्वर चल रहा हो। इससे चेहरे पर चमक सदैव बनी रहेगी। 
----व्यापार में आने वाली बाधाओं और किसी प्रकार के विवाद को निपटाने के लिए घर में क्रिस्टल बॉल एवं पवन घंटियां लटकाएं। 
---- घर में टूटे-फूटे बर्तन या टूटी खाट नहीं रखनी चाहिए। टूटे-फूटे बर्तन और टूटी खाट रखने से धन की हानि होती है। 
----घर के वास्तुदोष को दूर करने के लिए उत्तर दिशा में धातु का कछुआ और श्रीयंत्र युक्त पिरामिड स्थापित करना चाहिए, इससे घर में सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है।
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डायबिटीज से बचने के वास्तु उपाय---
डायबिटीज एक अनुवांशिक बीमारी है। अगर आप डायबिटीज से पीड़ीत हैं या चाहते हैं कि आपके घर में वास्तुदोष होने पर भी डायबिटीज परेशान न करे तो इसके लिए आप नीचे लिखे वास्तु उपाय जरूर अपनाएं----

- घर के दक्षिण-पश्चिम भाग का वास्तु सुधार कर डायबिटीज से बचा जा सकता है।
- अपने बेडरूम में कभी भी भूल कर भी खाना ना खाएं।
-अपने बेडरूम में जूते चप्पल नए या पुराने बिलकुल भी ना रखें।
- मिटटी के घड़े का पानी का इस्तेमाल करे तथा घडे में प्रतिदिन सात तुलसी के पत्ते डाल कर उसे प्रयोग करे।
- दिन में एक बार अपनी माता के हाथ का बना हुआ खाना अवश्य खाएं।
- अपने पिता को तथा जो घर का मुखिया हो उसे पूर्ण सम्मान दे।
- प्रत्येक मंगलवार को अपने मित्रों को मिष्ठान जरूर दे।
- रविवार भगवान सूर्य को जल दे कर यदि बन्दरों को गुड़ खिलाये तो आप स्वयं अनुभव करेंगे की मधुमेह शुगर कितनी जल्दी जा रही है।
- ईशानकोण से लोहे की सारी वस्तुए हटा लें।
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घर की खुशहाली के वास्तु उपाय---
----यदि आपके घर का बजट गड़बड़ा गया हो, आय से ज्यादा खर्च होता है, परिवार में अशांति रहती है, नोट कमाने के सारे प्रयास व्यर्थ साबित हो रहे हों, तो भगवान को खुश करने के लिए पूजा कक्ष में लाल रंग का प्रयोग ज्यादा से ज्यादा करें।
----जहां आप बटुआ रखते हों, उस स्थान को भी लाल व पीले कलर से रंग दें। कुछ ही दिनों में फर्क महसूस होगा। यदि आपको लगता है कि आपसे कोई ईर्ष्या करता है, आपके कई दुश्मन हो गए हैं। हमेशा असुरक्षा व भय के माहौल में जी रहे हों, तो मकान की दक्षिण दिशा में से जल के स्थान को हटा दें। इसके साथ ही एक लाल रंग की मोमबत्ती आग्नेय कोण में तथा एक लाल व पीली मोमबत्ती दक्षिण दिशा में नित्यप्रति जलाना शुरू कर दें।
घर में बेटी जवान है, उसकी शादी नहीं हो पा रही है, तो एक उपाय करें- कन्या के पलंग पर पीले रंग की चादर बिछाएं, उस पर कन्या को सोने के लिए कहें। इसके साथ ही बेडरूम की दीवारों पर हल्का रंग करें। ध्यान रहे कि कन्या का शयन कक्ष वायव्य कोण में स्थित होना चाहिए।
---कभी-कभी ऐसा होता है कि व्यक्ति सर्वगुण सम्पन्न होते हुए भी बेरोजगार रह जाता है। वह नौकरी के लिए जितना अधिक प्रयास करता है, उसकी कोशिश विफल होती जाती है। इसके लिए व्यक्ति भाग्य को जिम्मेदार ठहराता है। लेकिन अपने भाग्य को कोसने के बजाय एक उपाय करें- नौकरी के लिए इंटरव्यू देने जाएं, तो जेब में लाल रूमाल या कोई लाल कपड़ा रखें। सम्भव हो, तो शर्ट भी लाल पहनें। आप जितना अधिक लाल रंग का प्रयोग कर सकते हैं, करें।लेकिन यह याद रखें कि लाल रंग भड़कीला ना लगे सौम्य लगे। रात में सोते समय शयन कक्ष में पीले रंग का प्रयोग करें। याद रखें, लाल, पीला व सुनहरा रंग आपके भाग्य में वृद्धि लाता है। अतः हमेशा अपने साथ रखें व इन रंगों का व्यवहार ज्यादा से ज्यादा करें, सफलता मिलेगी।
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वास्तुशास्त्र अनुसार कैसी हो गैलेरी---
किसी भी मकान या फ्लैट की गैलेरी वास्तुशास्त्र के अनुसार, यदि भूखण्ड पूर्वोन्मुख है, तो गैलेरी उत्तर-पूर्व में उत्तर की ओर निर्धारित करें। पश्चिम की ओर उन्मुख होने पर गैलेरी उत्तर-पश्चिम में पश्चिम की ओर रखें। उत्तर की ओर भूखण्ड होने पर गैलेरी को उत्तर-पूर्व में उत्तर की ओर बनाना चाहिए। भूखण्ड के दक्षिण की ओर उन्मुख होने पर गैलेरी दक्षिण पूर्व में दक्षिण दिशा में बनाई जानी चाहिए। मोटे तौर यह जान लेना चाहिए कि प्रातः कालीन सूर्य का प्रकाश एवं प्राकृतिक हवा का प्रवेश मकान में बेरोक-टोक होता रहे इसलिए
आपकी बालकनी उसी के अनुसार होनी चाहिए।
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कहाँ हो तहखाना और पार्किंग----तहखाना : आजकल शहरों में स्थानाभाव के कारण लोग मकान में अंडर ग्राउण्ड तहखाने का निर्माण कर रहे हैं। तलधर अथवा तहखाना कहाँ होना चाहिए। यह ध्यान रखना बहुत जरूरी है। वास्तु शास्त्र के अनुसार तलधर का निर्माण भूमि के पूर्व में या उत्तर दिशा में करें, तो शुभ है। लेकिन यह भी सुनिश्चित करें कि तलधर आवासीय कदापि न हो अर्थात्‌ उसमें आप तथा आपका परिवार निवास नहीं करता हो। अन्यथा आप हमेशा कष्ट में रहेंगे। तहखाने का निर्माण इस प्रकार करें कि उसके चारों ओर बराबर खाली भूमि छोड़ें। मध्य भाग में निर्माण कार्य करवाएँ। यदि तहखाने का आकार विशाल वस्तु आकार का हो अथवा चूल्हे के आकार का हुआ, तो यकीन मानें आपके तथा आपके परिवार के लिए कतई शुभ नहीं है। भवन का विनाश निश्चित है।
पार्किंग :---- भवन में पार्किंग वास्तु के अनुसार दक्षिण-पूर्व या उत्तर-पश्चिम दिशा में ही बनवाएँ।
पशुशाला : ---यदि आप अपने मकान का निर्माण वृहद उद्देश्यों की प्राप्ति को ध्यान में रखकर करने जा रहे हैं, तो पशुशाला का निर्माण मकान में उत्तर-पश्चिम दिशा अर्थात्‌ वायव्य कोण में निर्धारित कर लें। वास्तु शास्त्र के अनुसार यह अत्यंत शुभ होता है। 
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वास्तु अनुसार कहाँ हो सीढियाँ----

भवन में वास्तुदोष हो तो मनुष्य को अपने भाग्य का आधा ही फल मिलता है। अवसाद और मानसिक तनाव बढ़ जाता है तथा आत्मविश्वास में कमी हो जाती है। भवन का निर्माण वास्तु के अनुरूप होने पर मनुष्य को कामयाबी मिलती है। वास्तु के अनुकूल भवन में 'ची' ऊर्जा प्रवाहित होकर वैभव और सुकून प्रदान करती है। भवन निर्माण में सीढ़ियों का विशेष महत्व है। भवन की सीढ़ियाँ 'ची' को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने में सहायक होती हैं। अतः सीढ़ियों की दिशा, बनावट व संख्या को ध्यान में रखकर 'ची' ऊर्जा में वृद्धि की जा सकती है।
* सीढ़ियाँ हमेशा  उत्तर से दक्षिण की ओर ऊँचाई में जाने वाली होनी चाहिए। 
* यदि भवन में पूर्व से पश्चिम की तरफ चढ़ने वाली सीढ़ियाँ हों तो भवन मालिक को लोकप्रियता और यश की प्राप्ति होती है। 
* यदि भवन में उत्तर से दक्षिण की तरफ चढ़ने वाली सीढ़ियाँ हों तो भवन मालिक को धन की प्राप्ति होती है। 
* दक्षिण दीवार के सहारे सीढ़ियाँ धनदायक होती हैं। 
* सीढ़ियाँ प्रकाशमान और चौड़ी होनी चाहिए। सीढ़ियों की विषम संख्या शुभ मानी जाती है। सामान्यतः एक मंजिल पर सत्रह सीढ़ियाँ शुभ मानी जाती हैं। 
* घुमावदार सीढ़ियाँ श्रेष्ठ मानी जाती हैं। सीढ़ियों का घुमाव क्लॉकवाइज होना चाहिए। 
* यदि सीढ़ियाँ सीधी हों तो दाहिनी ओर ऊपर जाना चाहिए।
* भूलकर भी भवन के मध्य भाग में सीढ़ी न बनाएँ अन्यथा बड़ी हानि हो सकती है। 
* पूर्व दिशा में सीढ़ियाँ हों, तो हृदय रोग बनाती हैं। 
* यदि सीढ़ियाँ चक्राकार सर्पिल हों, तो 'ची' ऊर्जा, ऊपर की ओर प्रवाहित नहीं हो पातीं, जिससे भवन मालिक को अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। 
* ईशान कोण में बनी सीढ़ी पुत्र संतान के विकास में बाधक होती है। 
* मुख्य दरवाजे के सामने बनी सीढ़ी आर्थिक अवसरों को समाप्त कर देती है। 
* सीढ़ियों के नीचे पूजाघर का निर्माण नहीं करना चाहिए।
* भवन बनाते समय इस बात का ध्यान रखें कि मुख्य दरवाजे पर खड़े व्यक्ति को घर की सीढ़ियाँ दिखाई नहीं देना चाहिए।
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पंडित "विशाल" दयानन्द शास्त्री

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