यदि चाहते हें अपना मकान एवं वाहन तो करें शनि-राहु की इन सरल मंत्रों से करें पूजा---

हम सभी के सांसारिक जीवन में व्यक्तिगत एवं पारिवारिक जीवन को सुखी व संपन्न बनाने की कोशिशें जन्म से लेकर मृत्यु तक लगातार चलती हैं। सुखों से भरे जीवन की कामनाओं को पूरा करने के लिए खासतौर पर हर इंसान बुद्धि, ज्ञान के साथ संतान, भवन, वाहन से समृद्ध होना चाहता है। जिसके लिये वह देव उपासना व शास्त्रों के उपाय भी अपनाता है। यह भी सत्य हें की ज्योतिष विज्ञान के मुताबिक जन्मकुण्डली में शनि-राहु की युति भी इन सुखों को नियत करने वाली होती है। खासतौर पर जब जन्मकुण्डली में शनि-राहु की युति चौथे भाव में बन रही हो। तब वह पांचवे भाव पर भी असर करती है। हालांकि दूसरे ग्रहों के योग और दृष्टि भी अच्छे और बुरे फल दे सकती है। लेकिन यहां आपको मात्र शनि-राहु की युति के अशुभ प्रभाव की शांति के उपाय बताए जा रहे हैं। हिन्दू पंचांग में शनिवार का दिन न्याय के देवता शनि की उपासना कर पीड़ा और कष्टों से मुक्ति का माना जाता है। यह दिन शनि की पीड़ा, साढ़े साती या ढैय्या से होने वाले बुरे प्रभावों की शांति के लिए भी जरूरी है। किंतु यह दिन एक ओर क्रूर ग्रह राहु की दोष शांति के लिए भी अहम माना जाता है। राहु के बुरे प्रभाव से भयंकर मानसिक पीड़ा और अशांति हो सकती है। अगर आपको भी सुखों को पाने में अड़चने आ रही हो या कुण्डली में बनी शनि-राहु की युति से प्रभावित हो, तो यहां जानें ऐसे सुख व आनंद लेने के लिए शनि-राहु के दोष शांति के सरल उपाय - 
- शनिवार की सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहन नवग्रह मंदिर में शनिदेव और राहु को शुद्ध जल से स्नान कर पंचोपचार पूजा करें और विशेष सामग्रियां अर्पित करें।  
- शनि मंत्र ऊँ शं शनिश्चराये नम: और राहु मंत्र ऊँ रां राहवे नम: का जप करें। हनुमान चालीसा का पाठ भी बहुत प्रभावी होता है। 
- शनिदेव के सामने तिल के तेल का दीप जलाएं। तेल से बने पकवानों का भोग लगाएं। लोहे की वस्तु चढाएं या दान करें। 
- राहु की प्रसन्नता के लिए तिल्ली की मिठाईयां और तेल का दीप लगाएं। शनि  व राहु की धूप-दीप आरती करें।  

यदि समयाभाव होने पर आप ये उपाय नहीं कर पाए तो निचे  लिखें उपाय भी न केवल आपकी मुसीबतों को कम करते हैं, बल्कि जीवन को सुख और शांति से भर देते हैं----

- किसी मंदिर में पीपल के वृक्ष में शुद्ध जल या गंगाजल चढ़ाएं। पीपल की सात परिक्रमा करें। अगरबत्ती, तिल के तेल का दीपक लगाएं। समय होने पर गजेन्दमोक्ष स्तवन का पाठ करें। इस बारे में किसी विद्वान ब्राह्मण से भी जानकारी ले सकते हैं।
- इसी तरह किसी मंदिर के बाहर बैठे भिक्षुक को तेल में बनी वस्तुओं जैसे कचोरी, समोसे, सेव, भुजिया यथाशक्ति खिलाएं या उस निमित्त धन दें।
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पंडित "विशाल" दयानन्द शास्त्री

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