आइये जाने क्या हें बड़ा दिन या क्रिसमस??? क्यों और केसे मनाया जाता हें??? क्या करें इस दिन  ???

पुराने साल की विदाई, नए साल का आगमन और क्रिसमस का त्योहार। ये सब मिलकर ऐसा माहौल बना देते हैं कि चारों तरफ खुशियां ही खुशियां दिखाई देने लगती हैं। हर दिन सेलिब्रेशन का दिन नज़र आता है। खुशियों भरे क्रिसमस को आने में अब कुछ ही दिन बचे हैं।
क्रिसमस का आगमन काल शुरू हो गया है। भारतीय शहरों के ईसाई बहुल इलाके सजने-सँवरने लगे हैं। चर्चो में विशेष प्रार्थनाएँ शुरू हो चुकी हैं। बाजारों में क्रिसमस गिफ्ट, कार्ड, प्रभु ईशु की चित्राकृतियाँ, सांता क्लॉज की टोपी, सजावटी सामग्री और केक की बिक्री होने लगी है।

25 दिसंबर को ईसाई धर्म के संस्थापक ईसा मसीह का जन्म हुआ था। इस दिन को क्रिसमस डे कहा जाता है और पूरे दिसंबर माह को क्राइस्टमास के नाम से जाना जाता है। क्राइस्टमास के खत्म होने के बाद ही ईसाई नववर्ष की शुरुआत होती है। इसी को देखते हुए बाजार, सड़के, पब और होटले सजधज कर तैयार रहती है।
बड़ा दिन या क्रिसमस प्रभु ईसा मसीह या यीशु के जन्म की खुशी में मनाया जाने वाला पर्व है। यह 25 दिसम्बर को पड़ता है और इस दिन लगभग संपूर्ण विश्व मे अवकाश रहता है। क्रिसमस से 12 दिन के उत्सव क्रिसमसटाइड की भी शुरुआत होती है। एन्नो डोमिनी काल प्रणाली के आधार पर यीशु का जन्म, 7 से 2 ई.पू. के बीच हुआ था। 25 दिसंबर यीशु मसीह के जन्म की कोई ज्ञात वास्तविक जन्म तिथि नहीं है, और लगता है कि इस तिथि को एक रोमन पर्व यामकर संक्रांति (शीत अयनांत) से संबंध स्थापित करने के आधार पर चुना गया है। आधुनिक क्रिसमस की छुट्टियों मे एक दूसरे को उपहार देना, चर्च मे समारोह, और विभिन्न सजावट करना शामिल है। इस सजावट के प्रदर्शन मे क्रिसमस का पेड़, रंग बिरंगी रोशनियाँ, बंडा, जन्म के झाँकी और हॉली आदि शामिल हैं। सांता क्लॉज़ (जिसे क्रिसमस का पिता भी कहा जाता है हालाँकि, दोनों का मूल भिन्न है) क्रिसमस से जुड़ी एक लोकप्रिय पौराणिक परंतु कल्पित शख्सियत है जिसे अक्सर क्रिसमस पर बच्चों के लिए तोहफे लाने के साथ जोड़ा जाता है. सांता के आधुनिक स्वरूप के लिए मीडिया मुख्य रूप से उत्तरदायी है।
क्रिसमस को सभी ईसाई लोग मनाते हैं, और आजकल कई गैर ईसाई लोग भी इसे एक धर्मनिरपेक्ष, सांस्कृतिक उत्सव के रूप मे मनाते हैं। क्रिसमस के दौरान उपहारों का आदान प्रदान, सजावट का सामन और छुट्टी के दौरान मौजमस्ती के कारण यह एक बड़ी आर्थिक गतिविधि बन गया है और अधिकांश खुदरा विक्रेताओं के लिए इसका आना एक बड़ी घटना है।
जी हाँ ! हर चर्च में क्रिसमस का त्योहार बहुत धूम-धम व हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। इन सभी चर्च में क्रिसमस व अन्य कार्यक्रमों में दूसरे धर्म के लोग भी आते हैं और अपने ईसाई मित्रों की खुशी में प्रसन्नतापूर्वक हिस्सा लेते हैं। चर्चों में विभिन्न धर्म-गुरु भी आते हैं और सबको अपना आशीर्वाद व शांति संदेश देते हैं। 'दिल्ली कैथॉलिक आर्कडाइओसिस' के प्रवक्ता 'रेवरेन्ड' डॉ. डोमिनिक इमैन्यूल के मुताबिक क्रिसमस के अवसर पर इस बार 'अंतर धार्मिक प्रार्थना सभा' इंडिया गेट पर सुबह 10.30 बजे आयोजित की जा रही है।
दुनिया भर के अधिकतर देशों में यह २५ दिसम्बर को मनाया जाता है। क्रिसमस की पूर्व संध्या यानि 24 दिसंबर को ही जर्मनी तथा कुछ अन्य देशों में इससे जुड़े समारोह शुरु हो जाते हैं। ब्रिटेन और अन्य राष्ट्रमंडल देशों में क्रिसमस से अगला दिन यानि 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। कुछ कैथोलिक देशों में इसे सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहते हैं। आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च 6 जनवरी को क्रिसमस मनाता है पूर्वी परंपरागत गिरिजा जो जुलियन कैलेंडर को मानता है वो जुलियन वेर्सिओं के अनुसार २५ दिसम्बर को क्रिसमस मनाता है, जो ज्यादा काम में आने वाले ग्रेगोरियन कैलेंडर में 7 जनवरी का दिन होता है क्योंकि इन दोनों कैलेंडरों में 13 दिनों का अन्तर होता है।
सब तरफ धूम है, खुशियाँ हैं और बच्चों में गजब का उत्साह देखा जा सकता है। गिरजाघरों में क्रिसमस को लेकर विशेष तैयारी की गई है। दरअसल अब यह त्योहार किसी एक समुदाय विशेष का न होकर सभी धर्मों और मान्यताओं का सामूहिक उत्सव बन गया है। 

सांता क्लॉज, क्रिसमस ट्री, पूजा-अर्चना, मोमबत्तियों व सितारों की चमक, घंटियों और घंटों की खनक, सुंदर सजावट, बिजली के जगमगाते बल्ब, ग्रीटिंग कार्ड, केक, पेस्ट्री, गीत-संगीत, महकते फूल और चहकते बच्चे। ये सब मिलकर बता रहे हैं कि 25 दिसंबर को क्रिसमस डे यानी बड़ा दिन है। ईसाई धर्म में प्रभु यीशु के जन्म-दिवस के रूप में मनाया जाने वाला यह त्योहार वैसे तो प्रत्येक चर्च में हर्षोल्लास के साथ बहुत धूम-धाम व खास अंदाज में से मनाया जाता है। 
महीने भर पहले से शुरू होने वाली क्रिसमस की तैयारी का उल्लास केवल 25 दिसंबर तक ही नहीं रहता, बल्कि 6 जनवरी तक चलता है। इस दौरान 'क्रिसमस जागरण मिस्सा','निर्दोष बच्चों'का पर्व, 'होली फैमिली'त्योहार, नव वर्ष और 'प्रभु प्रकाश'पर्व जैसे त्योहार लगातार चलते रहते हैं। बेशक अब यह उत्सव किसी एक धर्म का न होकर सबका हो गया है।
यह अंदाज तब और भी खास हो जाता है जब इसमें विभिन्न धर्मों के लोग शामिल होकर परस्पर भाईचारे और धार्मिक सौहार्द को शामिल कर देते हैं। ऐसे में यह बड़ा दिन और भी बड़ा हो जाता है। दूसरे धर्मों की तरह ही ईसाई धर्म में भी कुछ अलग-अलग संप्रदाय हैं इसीलिए चर्च भी कई प्रकार के होते हैं। जैसे 'कैथॉलिक चर्च', 'ऑर्थोडॉक्स चर्च', 'चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया', 'बैपटिस्ट चर्च' या 'प्रॉटेस्टैन्ट चर्च' वगैरह। लेकिन इस वर्गीकरण के बाद भी लगभग प्रत्येक धर्म की तरह ही ईसाई धर्म भी शान्ति, एकता, दान, प्रेम व भाईचारे की राह दिखता है। यह त्योहार राह दिखाता है खुश रहने की और खुशियाँ बाँटने की।
क्रिसमस वाले दिन तो यह चर्च सभी धर्म के लोगों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बन जाते हैं। क्रिसमस वाले दिन तो चर्च में सुबह से रात के 12-1 बजे तक लोगों की भीड़ लगातार आती रहती है। इस दिन चर्च में करीब लाखों लोग आते हैं। श्रद्धालु माता मरियम की मूर्ति के सामने मोमबत्तियाँ जलाते हैं और प्रार्थना करते हैं।

कुछेक बातों को छोड़कर क्रिसमस डे सभी जगह लगभग एक जैसे तरीके से ही प्रसन्नतापूर्वक, मिलजुल कर मनाया जाता है। जिस प्रकार हिंदू धर्म के लोग श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के समय मंदिरों में श्रीकृष्ण के जन्मस्थल (कारागार), बालक कृष्ण, माता यशोदा, गायों, ग्वालों और गोपियों आदि की झाँकियाँ बनाते हैं, उसी प्रकार प्रभु यीशु की याद में इस चर्च को भी अंदर व बाहर से गौशाला सदृश्य सजाया जाता है, क्योंकि प्रभु यीशु का जन्म गौशाला में हुआ था। झाँकियों में इनकी देखभाल करने वाले गड़रियों को भी दर्शाया जाता है। 

क्रिसमस का पेड़ और अन्य सजावट---इस मौके पर क्रिसमस ट्री की बात न हो, तो त्योहार अधूरा-सा लगेगा। अगर आप घर में ही क्रिसमस ट्री बनाने की सोच रहे हैं, तो इसके लिए क्रिसमस ट्री से मिलता-जुलता कोई ट्री लें और इसमें सजाने के लिए बॉल ड्रम, स्नो मैन, स्टार बेल, बॉल बंच स्टार स्टिक, बॉल्स, स्टार्स, झालर और पाइन कॉर्न लें। अगर आप रेडीमेड क्रिसमस ट्री खरीदने जा रहे हैं, तो डेकोरेटेड ट्री 50 रुपये से 2,000 रुपये तक मिल जाएंगे। वहीं, स्नो फैंसी (स्टार्स का तीन पीस वाला सेट) 150 रुपये से लेकर 350 रुपये तक में उपलब्ध है। रिबन लगी बड़ी बेल सजावट के साथ 750 रुपये में मिल रही है, तो इसका छोटा साइज 150 रुपये से मिलना शुरू हो जाता है। लॉन्ग रिप (रिबन से सजी बॉल) 100 से 750 रुपये तक में मिल रही है। अगर आप क्रिसमस ट्री बनाना भी नहीं चाहते और इसे खरीदने बाजार भी नहीं जाना चाहते, तो यह घर बैठे भी आप तक पहुंच सकता है। इसके लिए आप इंटरनेट पर 'होम शॉप 18' की वेबसाइच ट्राई कर सकते हैं। यहां आपको 18 इंच का डेकोरेटिव क्रिसमस ट्री हैंपर लगभग 740 रुपये में मिल जाएगा। वेसे क्रिसमस का पेड़ को अक्सर बुतपरस्त (pagan) परंपरा और अनुष्ठान के ईसाईता के रूप में जाना जाता है और तकालीन उच्चतम शिखर के आस पास सदाबहार (evergreen) टहनियों, और बुतपरस्ती का एक रूपांतर पेड़ की पूजा (tree worship).[34] ऐ पिसमे शामिल होती है अंग्रेजी भाषा मे कहा जाने वाला वाक्यांश क्रिसमस ट्री सबसे फेले 1835 [32] मे दर्ज किया गया और ये जर्मन भाषा के एक आयत का प्रतिनिधित्व करता है आज के युग का क्रिसमस ट्री का रिवाज़ मन जाता है की जर्मनी में 18वि शाताब्दी[34] मे किया गया, जबकि बहुत लोग इस बात पैर बहस करते है की इसे मार्टिन लुथेर ने 16वि शाताब्दी [35][36] मे शुरू किया जर्मनी से इंग्लैंड में सबसे पहले इस प्रथा को कुइन चर्लोत्ते (Queen Charlotte),जॉर्ज III (George III)की पत्नी ने शुरू किया था पर इसे ज्यादा सफलतापूर्वक प्रिंस अलबर्ट (Prince Albert) ने कुइन विक्टोरिया के शासन में आगे बढाया. लगभग उसी समय, जर्मन आप्रवासी संयुक्त राज्य में यह प्रथा शुरू की.[37] क्रिसमस पेड की सजावट रौशनी (lights)और गहने (ornaments)से भी होती है

19 वीं सदी के बाद से पोंसेत्तिया (poinsettia) क्रिसमस के साथ जोड़ा जाने लगा.अन्य लोकप्रिय छुट्टी के पौधों में शामिल हैं हॉली (holly), बंडा (mistletoe)लाल, अमर्य्ल्लिस (amaryllis), और क्रिसमस कैक्टस (Christmas cactus).क्रिसमस के पेड के अतिरिक्त घरों के अन्दर दूसरे पौधों से भी सजाया जाता है जिसमे माला (garlands) और सदाबहार (evergreen) पत्ते. शामिल हैं
ऑस्ट्रेलिया उत्तरी और दक्षिण अमेरिका और europe का कुछ हिस्सा पारंपरिक रूप से सजाया जाता है जिसमे घर के बहार की बत्तियों से सजावट बेपहियों की गाड़ी (sleigh)s, snowmen (snowmen), और अन्य क्रिसमस के मूरत शामिल होते हैं नगर पालिका भी अक्सर सजावट करते हैं क्रिसमस के पताका स्ट्रीट लाइट (street light)से टंगा होता है और शहर के हर वर्ग[38] में क्रिसमस के पोधे रखे जाते हैं
पश्चिमी दुनिया (Western world) में रंगीन कागजों पे धर्मनिरपेक्ष या धार्मिक क्रिसमस मोटिफ्स चप्पा हुआ कागज़ का रोल निर्मित करते हैं जिसमे लोग अपने उपहार लपेटेते हैं क्रिसमस गाँव (Christmas village) का प्रदर्शन भी कई घरों में इस मौसम में एक परम्परा बन गया है. बाकी पारंपरिक सजावट में घंटी (bells)मोमबत्ती (candles)कैंडी कंस (candy canes)बड़े मोजे (stockings)पुष्पमालाएं (wreaths)और स्वर्गदूतों.शामिल होते हैं
क्रिसमस की तयारी 12वां दिन (Twelfth Night)को उतारी जाती है जो जनवरी 5की शाम का दिन होता है
सांता मास्क : कहते हैं सांता क्लाज क्रिसमस-डे के दिन बच्चों के लिए ढेर सारी मिठाइयाँ व उपहार लेकर आते हैं। इसलिए वे बच्चों के चहेते होते हैं। अपने प्रिय अंकल सांता के लिए बच्चे सांता के मास्क लगाकर लोगों के जीवन में ढेर सारी खुशियों का पैगाम देते हैं। 

इसी खुशी को लोगों में बांटने के लिए क्रिसमस-डे के अवसर पर गिफ्ट गैलरीज में सांता क्लॉज के खूबसूरत मास्क बच्चों द्वारा खरीदे जा रहे हैं। 49 से 200 रुपए तक में मौजूद ये मास्क युवाओं में भी बेहद लोकप्रिय हैं।

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पंडित "विशाल" दयानन्द शास्त्री

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