सूर्य और राहु के ग्रहण योग का क्या होगा परिणाम---

एक ही सप्ताह में दो बड़ी ग्रह गोचरीय घटना विलक्षण परिणाम दिलाने वाली सिद्ध होगी। अभी 15 नवंबर को शनि देव तुला राशि में आए ही थे कि उनके दो दिन बाद इस साल में पहली बार सूर्य और राहु का भी वृश्चिक राशि में मिलन हो गया है। राहु, राक्षसों के सेनापति हैं। ये अर्धकाय, महावीर, सूर्य और चंद्र का भी मान मर्दन करने वाले बुद्धि और बल के सागर हैं। ऐसा माना गया है कि इनके पास देवताओं से भी अधिक ज्ञान और पराक्रम है। 

ग्रहण योग का क्या होगा परिणाम----
किसी भी जातक की कुंडली में अकेले राहु बलवान हो और कारक भाव में हो तो वह जातक को कुशल राजनेता और समाज का मुखिया बनाते हैं। राहु की कृपा से ही जातक रहस्य रोमांच और चुनौतीपूर्ण कार्यों को करने में पारंगत होता है। सूर्य का जगत के साक्षी ब्रह्मा, विष्णु, शिव और शक्ति और सभी चराचर जगत के प्राणी ध्यान करते हैं। ऐसे महान पराक्रमी और तीनों लोकों को प्रकाशित करने वाले भगवान सूर्य को राहु वर्षपर्यंत कई बार अपना ग्रास बनाते हैं। वही राहु अब सूर्य के साथ मंगल की राशि में मिल गए हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि जल तत्व की राशि में अग्नि तत्व सूर्य और वायु तत्व ग्रहों का मिलन निश्चित रूप से राजनीति और राजनेताओं के लिए संघर्षपूर्ण रहेगा। राहु और सूर्य के द्वारा बना हुआ यह ग्रहण योग मेष, वृष, सिंह, तुला वृश्चिक और धनु राशि वालों के लिए अधिक खर्च, स्वभाव में आवेश, मानसिक अशांति देगा। भावनाओं में बहकर लिया गया निर्णय नुकसानदेह हो सकता है। इस राशि के जातक अपने मनोभावों को संयत रखें। न उत्तेजित हों और न ही उन्हें प्रकट करें। 

ग्रहण योग के कुप्रभाव से ऐसे बचें----
मिथुन, कन्या और मकर राशि वालों के लिए वरदान की तरह रहेगा। इस राशि के जातक अभीष्ट कार्य की सिद्धि के लिए अथक प्रयास करें। सफलता आपकी प्रतीक्षा में है। कर्क, कुंभ और मीन राशि के जातकों के लिए सामान्य ही रहेगा। इस ग्रहण योग से बचने का सरल तरीका है भगवान सूर्य देव की आराधना करना। चींटियों को आटा खिलाना और माता महासरस्वती की साधना करना। ऐसा करने से इस योग से संबधित दोषों से मुक्ति मिल सकती है।
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पंडित "विशाल" दयानन्द शास्त्री

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