वास्तु अनुसार/सम्मत कहाँ हो स्टडी रूम/अध्ययन कक्ष-----

----अध्ययन कक्ष भवन के पश्चिम-मध्य क्षेत्र में बनाना अतिलाभप्रद है।

----अध्ययन कक्ष में विद्यार्थी की टेबल पूर्व-उत्तर ईशान या पश्चिम में रहना चाहिए। दक्षिण आग्नेय व नैऋत्य या उत्तर- वायव्य में नहीं होना चाहिए।

----अध्ययन कक्ष में खिड़की या रोशनदान पूर्व-उत्तर या पश्चिम में होना श्रेष्ठ या दक्षिण में संभवतया नहीं रखें।

-----अध्ययन कक्ष में शौचालय कदापि नहीं बनाएँ।

------अध्ययन कक्ष की रंग संयोजना सफेद, बादामी, फीका, आसमानी या हल्का फिरोजी रंग दीवारों पर और टेबल-फर्नीचर पर श्रेष्ठ है। काला, लाल, गहरा नीला रंग कमरे में नहीं होना चाहिए।

-----अध्ययन कक्ष में अभ्यास के रखने की रेक एवं टेबल उत्तर दिशा की दीवार से लगी होना चाहिए।

------अध्ययन कक्ष में पेयजल, मंदिर, घड़ी उत्तर या पूर्व दिशा में रखना चाहिए।

-----अध्ययन कक्ष में टीवी, मैगजीन, अश्लील साहित्य व सीडी प्लेयर एवं वीडियो गेम, रद्दी अखबार, अनुपयोगी सामान एवं भारी वस्तुएँ न रखें।

-----अध्ययन कक्ष में आदर्शवादी चित्र, सरस्वती माता एवं गुरुजनों के चित्र लगाना चाहिए।

----युद्ध, लड़ाई-झगड़े, हिंसक पशु-पक्षियों के चित्र व मूर्तियाँ नहीं रखना चाहिए।

-----अध्ययन कक्ष में शयन नहीं करें।

-----अध्ययन कक्ष को अन्य कक्षों के जमीनी तल से ऊँचा या नीचा नहीं रखें। तल का ढाल पूर्व या उत्तर की ओर रखा जाए।

-----अध्ययन कक्ष में केवल ध्यान, अध्यात्म वाचन, चर्चा एवं अध्ययन ही करना चाहिए। गपशप भोग-विलास की चर्चा एवं अश्लील हरकतें नहीं करना चाहिए।

-----अध्ययन कक्ष में जूते-चप्पल, मोजे पहनकर प्रवेश नहीं करना चाहिए। 


-----बुध, गुरू, शुक्र एवं चंद्र चार ग्रहों के प्रभाव वाली पश्चिम-मध्य दिशा में अध्ययन कक्ष का निर्माण करने से  अति लाभदायक सिद्ध होती है।
 
-----अध्ययन कक्ष में टेबिल पूर्व-उत्तर ईशान या पष्चिम में रहना चाहिए। दक्षिण आग्नेय व नैऋत्य या उत्तर-वायव्य में नहीं होना चाहिए।
 
-----खिड़की या रोषनदान पूर्व-उत्तर या पश्चिम में होना अति उत्तम माना गया है। दक्षिण में यथा संभव न ही रखें।
 
----अध्ययन कक्ष में रंग संयोजन सफेद, बादामी, पिंक, आसमानी या हल्का फिरोजी रंग दीवारों पर या टेबल-फर्नीचर पर अच्छा है। काला, गहरा नीला रंग कक्ष में नहीं करना चाहिए।
 
-----अध्ययन कक्ष का प्रवेश द्वार पूर्व-उत्तर, मध्य या पष्चिम में रहना चाहिए। दक्षिण आग्नेय व नैऋत्य या उत्तर-वायव्य में नहीं होना चाहिए।
 
-----कक्ष में पुस्तके रखने की अलमारी या रैक उत्तर दिशा की दीवार से लगी होना चाहिए।
 
-----पानी रखने की जगह, मंदिर, एवं घड़ी उत्तर या पूर्व दिशा में उपयुक्त होती है।
 
-----कक्ष की ढाल पूर्व या उत्तर दिशा में रखें तथा अनुपयोगी चीजों को कक्ष में न रखें।
 
-----बंद घड़ी, टूटे-फूटे बेकार पेन, धारदार चाकू, हथियार व औजार न रखें।
 
----कम्प्यूटर टेबिल पूर्व मध्य या उत्तर मध्य में रखें, ईशान में कदापि न रखे।
 
-----अध्ययन कक्ष के मंदिर में सुबह-शाम चंदन की अगरबत्तियां लगाना न भूलें।
----- अध्ययन कक्ष की रंग संयोजना सफेद, बादामी, फीका, आसमानी या हल्का फिरोजी रंग दीवारों पर और टेबल-फर्नीचर पर श्रेष्ठ है। काला, लाल, गहरा नीला रंग कमरे में नहीं होना चाहिए।
------ इस दिशा में बुध, गुरु, चंद्र एवं शुक्र ग्रहों से उत्तम प्रभाव प्राप्त होता है। इस दिशा के कक्ष में अध्ययन करनेवाले विद्यार्थियों को बुध से बुद्धि, गुरु से महत्वाकांक्षा की वृद्धि होती है
----- अध्ययन कक्ष का प्रवेश द्वार पूर्व उत्तर- मध्य या पश्चिम में रहना चाहिए। दक्षिण आग्नेय व नैऋत्य या उत्तर- वायव्य में नहीं होना चाहिए।
ऐसे होगी स्टेडी टेबल/अध्ययन टेबल की व्यवस्था /संयोजना---- 

----टेबल हमेशा आयताकार होना चाहिए, गोलाकार या अंडाकार नहीं होना चाहिए।

----टेबल के टॉप का रंग सफेद, दूधिया या क्रीम श्रेष्ठ है या अन्य रंग फीके हल्के कलर हों तो श्रेष्ठ है। प्लेन ग्लास भी रख सकते हैं।

-----टेबल पर अध्ययन करते समय विषय से संबंधित पुस्तकें व आवश्यक इंस्ट्रूमेंट ही रखें।

----बंद घड़ी, टूटे-फूटे व बंद पेन, धारदार चाकू, हथियार व औजार कदापि नहीं रखें।

------कम्प्यूटर टेबल पूर्व मध्य या उत्तर मध्य में रखें। ईशान में नहीं रखें।

-----अध्ययन टेबल व कुर्सी के ऊपर सीढ़ियाँ, बीम, कॉलम व डक्ट, टांड नहीं हों।

------स्वीच बोर्ड आग्नेय या वावव्य में रखें। ईशान पर नहीं हों।

-----अध्ययन कक्ष के मंदिर में सुबह-शाम कपूर या शुद्ध घी का दीपक व हल्की खुशबू की अगरबत्ती अवश्य लगाएँ।

-----भवन का ईशान कोण घटा-कटा व बढ़ा हुआ नहीं हो एवं सीढ़ियाँ शौचालय एवं रसोई नहीं हो व मास्टर शयन कक्ष नहीं हो, साथ ही अनुपयोगी सामान, स्टोर, सेप्टिक टैंक व वृक्ष नहीं हों।

इन सब सूक्ष्म लेकिन अति महत्वपूर्ण बातों को ध्यान में रखने से आपकी अध्ययन क्षमता का लाभ तो मिलेगा ही साथ ही व्यक्त्वि विकास में मददगार भी सिद्ध होगा।

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पंडित "विशाल" दयानन्द शास्त्री

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