***********सदाशिवाष्टकम स्तोत्र************
*************************************
-------------------ऋषि पतांजलिकृत----------------------------
================================
सुवर्णपदिमनीतटांतदिव्यहर्म्यवासिने
सुपर्ण वाहन प्रियाय सूर्यकोटितेजसे !
अपर्णया विहारिणे फणाधरेंद्रधारिणे
सदा नमश्शिवाय ते सदाशिवाय शम्भवे !!१!!
सतुंगभंगजाहनुसुधांशुखंडमौलये
पतंगपपंकजा सुहृत्कृपीरयोनिक्षुषे!
भुजंगराज मन्डलाय ते सदाशिवाय शम्भवे!!२!!
चतुर्मुखाननारविन्देवेदगीतभूतये
चतुर्भुजाजानुशरीरशोभामानमूर्तये!
चतुर्विधार्थदानशौण्डताण्डवस्वरूपिणे
सदा नमशिवाय ते सदाशिवाय शम्भवे!!३!!
शरन्निशाकर प्रकाश मंद हासमज्जुला --
धरप्रवालभासमानवक्त्र मण्डलश्रिये !
करस्फुरत्कपालमुक्तरक्त विष्णुपालिने
सदा नमश्शिवाय ते सदाशिवाय शम्भवे!!४!!
सहस्रपुण्डरीकपूजनैकशून्यदर्शना--
त्सहस्त्रनेत्रकल्पितार्चना च्युताय भक्तित:!
सहस्त्रभानुमण्डलप्रकाशचक्रदायिने
सदा नमश्शिवाय ते सदाशिवाय शम्भवे!!५!!
रसारथाय रम्यपत्रभृद्रथांगपान्ये
रसाधरेंद्रचापशिन्जनीकृतानिलाशिने!
स्वसारथीकृताजनुन्नवेदरूपवाजिने
सदा नमश्शिवाय ते सदाशिवाय शाम्भवे!!६!!
अतिप्रगल्भवीरभद्र सिंह नाद गर्गित--
श्रुतिप्रभीतदक्षयागभोगिनाकसद्मनाम!
गतिप्रदाय गर्जिताखिलप्रपंचसाक्षिणे
सदा नमश्शिवाय ते सदाशिवाय शाम्भवे!!७!!
मृकंडुसूनुरक्षणावधूतदण्डपाणये
सुगन्धमण्डलस्फुरत्प्रभाजितामृतांशवे!
अखंडभोगसम्पदार्थलोकभावितात्मने
सदा नमश्शिवाय ते सदाशिवाय शम्भवे!!८!!
मधुररिपुविधिशक्रमुख्यदेवैरपि नियमार्चितपादपंग्जाय
कनकगिरीशरासनाय तुभ्यं रजतसभापताये नमश्शिवाय!
हालास्यनात्हाय महेश्वराय हालाहललंकृतकन्धराय
मीनेक्षणाया: पतये शिवाय नमोनम स्सुन्दर ताण्डवाय!!९!!
^^^^^^^^^^^^इति पतांजलि कृत स्तोत्रम^^^^^^
------------------------------------------------------------------------------------------

दिवसं दिवसार्धं वा मूहुर्तं वा क्षणं लवम!
न ह्यलब्धप्रसादस्य भक्तिर्भवती शंकरे!!
जिसपर भगवान शिव की कृपा नहीं है, उस मनुष्य की एक दिन, आधे, दिन, एक मूहूर्त, एक क्षण या एक लव के लिये भी भगवान् शंकर में भक्ति नहीं होती!
न नाक पृष्ठं न च देवराज्यं न ब्रह्मलोकं न च निष्कलत्वम !
न सर्वाकामानखिलान वृणोमि हरस्य दासत्वमहं वृणोमि!!
न तो मैं स्वर्ग लोक चाहता हूँ, न देवताओं का राज्य पाने की अभिलाषा रखता हूँ! न ब्रह्म लोक की इच्छा करता हूँ और न निर्गुण ब्रह्म का सायुज्य ही प्राप्त करना चाहता हूँ! भ्ह्मंडल की समस्त कामनाओं को भी पाने की मेरी इच्छा नहीं है! मैं तो केवल भगवान शंकर की दासता ही वरण करता हूँ!
-------------------------------------------------
जे राम जी की हुकम..... लो जी एक बार फेर आग्यो..यो 63  वों गणतंत्र दिवस..( 26 जनवरी )??? पण सोचबा री बात या छें की यो वाकई  में गण रो तंत्र हें..??? 
म्हाको प्रधानमंत्री बुलेट  प्रूफ  कांच रे पाछे सुं बतियावेगो..!!!! और तो और अतनो सुरक्षा रो इंतजाम..???
 हे भगवान कदे आवेलो इन देश में सांचो गणतंत्र..???
आप सभी ने इन मोका री लाख लाख बधाइयाँ  और शुभकामनायें...!!!!.
म्हारा विचार सुं तो एक अन्ना सुं कम कोणी चलेगो..यदि सांचो गणतंत्र लानो हें तो सभी ने अन्ना रो विचार (भ्रष्टाचार मिटाबा रो) अपनानो पडसी...आप काईं बोलो हो..???
""भारत माता की जय ""
Share To:

पंडित "विशाल" दयानन्द शास्त्री

Post A Comment:

0 comments so far,add yours