ये कैसी आजादी ??? ये केसा गणतंत्र मित्रों../दोस्तों ???

..... क्या हम सच में आजाद है .. ....?

आज हम 63वां गणतंत्र दिवस मनाने जा रहे हैं, कहने के लिए आज़ाद भारत का गणतंत्र दिवस है , पर क्या वास्तविकता में हम आज़ाद भी हुए हैं ?
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जे राम जी की हुकम..... लो जी एक बार फेर आग्यो..यो 63  वों गणतंत्र दिवस..( 26 जनवरी )??? पण सोचबा री बात या छें की यो वाकई  में गण रो तंत्र हें..??? 
म्हाको प्रधानमंत्री बुलेट  प्रूफ  कांच रे पाछे सुं बतियावेगो..!!!! और तो और अतनो सुरक्षा रो इंतजाम..???
 हे भगवान कदे आवेलो इन देश में सांचो गणतंत्र..???
आप सभी ने इन मोका री लाख लाख बधाइयाँ  और शुभकामनायें...!!!!.
म्हारा विचार सुं तो एक अन्ना सुं कम कोणी चलेगो..यदि सांचो गणतंत्र लानो हें तो सभी ने अन्ना रो विचार (भ्रष्टाचार मिटाबा रो) अपनानो पडसी...आप काईं बोलो हो..???
""भारत माता की जय ""
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वन्दे मातरम्
सुजलां सुफलां मलयजशीतलाम्
शस्यशामलां मातरम् ।
शुभ्रज्योत्स्नापुलकितयामिनीं
फुल्लकुसुमितद्रुमदलशोभिनीं
सुहासिनीं सुमधुर भाषिणीं
सुखदां वरदां मातरम् ।। १ ।।
वन्दे मातरम् ।
..गणतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ ।
 
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अंग्रेजो के आने से पहले जो हमारा भारत था, जो हमारी संस्कृति थी, क्या 
उसे संस्कृति के साथ आज हम जी रहे हैं ? क्या अंग्रेजो के जाने के बाद हममे
वो भारतीयता है ?
वास्तविकता तो ये है की सिर्फ एक समझौता, सत्ता पलट
और चेहरे बदल जाने को ही हम आज़ादी मान बैठे हैं और 1947 से इसी जश्न में
डूबे हुए हैं !

लेकिन दोस्तों ये वो भारत नहीं है जो हमारे शहीदों
के सपनो का भारत था, जिसके लिए नेताजी सुभाष चन्द्र बोस, भगत सिंह,
चन्द्रशेखर आज़ाद, झाँसी की रानी जैसे लोगो ने अपनी जान गवाई है !
तो
मेरे दोस्तों भारत माता के सच्चे सपूतों अब जगाने का वक़्त आ गया है और
भारत माँ को वो आज़ादी दिलाने का वक़्त आ गया हे जो सपना हमारे शहीदों ने
देखा था !
"विदेशी शिक्षा", "विदेशी भाषा", "विदेशी नीतियां", "विदेशी
कानून", "विदेशी दवाइया" यहाँ तक की "विदेशी बहू" इन सब को मिटाकर जिस दिन
सब कुछ स्वदेशी होगा उस दिन भारत आज़ाद कहलायेगा !!

 
आपको अगर एक ज़रा सी खरोंच लग जाएँ तो आप दर्द से तिलमिला उठते हैं. सोचो उन लोगों ने किस शारीरिक और मानिसक कष्ट को सहा होगा जिनकी आँखों के सामने ज़िंदा मासूम बच्चे दिवार में चुनवा दिए गए ? जिनकी माँ-बहनों की इज्ज़त लुटी गयी. जिनके सर काट डाले गए , जिन्हे ज़िंदा दफना दिया गया. जिन्हें आरी से काटा गया . जिन्हें गरम कडाह में डाला गया, जिन्हें ज़िंदा जला दिया गया. जिन्हें कोल्हू के बैल की तरह जोता गया, जिनसे पत्थर - नारियल के कवच कूटवाएं गए, भूखा-प्यासा रखा गया जो जेल में बंद होकर जुल्म सहते रहे लेकिन उफ़ तक नहीं किया. उनका ध्येय था मातृभूमि की रक्षा, सम्पूर्ण स्वराज और धर्म की रक्षा. वो अपने हंसने-खेलने की , खाने - मजे करने की आयु में सिर्फ हम लोगों की खातिर फांसी के फंदे पर झूल गए. क्या इसीलिए की एक विदेशी हुकूमत के बाद दूसरी हम हिन्दुस्थानियों को गुलाम बनाकर रखे ?? अगर उनके बलिदानों की ज़रा भी कद्र हैं तो आज के दिन संकल्प ले की विदेशी सोनिया गांधी और विदेशी कांग्रेस को इस देश से जड़ के साथ उखाड़ फेंकना हैं. तभी हमारे हिन्दू धर्म की रक्षा हो पाएंगी और तभी हम पूर्ण स्वराज्य को प्राप्त कर सकते हैं. जय हिंद....जय भारत...वन्दे मातरम् !!!!

मेरा आप सब से
एक और निवेदन है की कल कोई भी "जन गण मन" ना गाये औरक्यूंकी ये गान हमारे
तिरंगे के लिए नहीं था। ये गान तो एक अंग्रेज के लिए लिखा गया था !!

जिस दिन हमारे देश में हमारा संविधान होगा, उस दिन हम दिल से गणतंत्र दिवस
मनाएंगे, हमारे पास तो आज हमारे खुद का संविधान भी नहीं है !

वास्तव मैं हमारे संविधान ने भारतवासिओ को ढेर सारे अधिकार दे रखे है जैसे::
1. किसी के भी मुह पर कालिख फेकने की आजादी
2. किसी के भी ऊपर जूता फेकने की आजादी
3. किसी को भी गलियां देने की आजादी
4. कश्मीर मैं पाकिस्तानी झंडा फहराने देने की आजादी
5. आतंकवादियों को अपने दामाद की तरह पूरी सुरक्षा और इज्ज़त के साथ रखने की आज़ादी
6. सरबजीत जैसे देशभक्त को आतंकवादी बताने और अफजल गुरु जैसे आतंकवादी को फांसी नहीं होने देने की आजादी
7. शांति और अहिंसक तरीकों से आन्दोलन करने वालो को बिना कारण के जेलों मैं ठूसने की आजादी
8. अरबों रुपयों का भ्रष्टाचार करके सीना तान के खड़े रहने की आजादी
9. भारत के साधू संतो और भगवानो का अपमान करने की आजादी
10. सिख जैसे देशभक्त कौम पर गंदे गंदे चुटकुले बनाने की आजादी
11. जनता को बेवक़ूफ़ बनाने की आजादी
12. टैक्स चोरी की आजादी
13. सरकारी दफ्तरों मैं काम नहीं करने और आराम से रिश्वत लेकर काम करने की आजादी
14. पुलिस थानों मैं बैठ कर कानून की धज्जियां उड़ाने की आजादी

क्या हमारे महान क्रांतिकारियों ने ऐसे भारत के लिए कुर्बानियाँ दी थी ???
~(हार्दिक पंड्या- एक क्रन्तिकारी विचारक)

॥ जय हिन्द ॥ जय जय माँ भारती ॥ वन्दे मातरम् ॥
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ए मेरे वतन के लोगो जरा आँख में भर लो पानी !
जो शहीद हुए है उनकी जरा याद करो कुर्वानी !

आज गणतंत्र दिवस के दिवस पर आप जब को हार्दिक शुभकामनाये !हम यह न सोचे देश ने हमे क्या दिया !बल्कि यह देखे की देशको हमने क्या दिया है ! शहीद भगत सिंह
राजगुरु सुखदेव जैसे कितने ही आज़ादी के
दीवानों ने हस्ते हस्ते फांसी के फंदे को चूमा ! रानी झाँसी ने अबला नारी होते हुए अंग्रेजो को नाको चने चबा दिए !
मेरा ईमान तिरंगा है मेरी शान तिरंगा है !
मेरी जान तिरंगा है !मेरा मान तिरंगा है !
आज के दिन हम शपथ ले की देश से भृष्टाचार ,महगाई ,गरीगी ,अन्पड़ता ,भ्रूण हत्या ,अपने धर्म का परचार ,गोहत्या ,और
लोगो मे जागरूकता लाने में अपना अहम्क दम देश की उन्नति के लिए आगे बढायेंगे !
दहेज़ लेना देना बिलकुल बंद कर दो !
सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तान हमारा !
हम बुलबुले है इसके यह गुलस्तान हमारा !
जय हिंद !जय भारती !वन्देमातरम !
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इस मुबारक मौके पर आज माँ का लिखा एक पुराना गीत साझा करने का मन हो रहा हैंः----

हम अगर आज हिल मिल कर आगे बढ़ें,
कोई मुश्किल नहीं जो कि मुश्किल रहे/
इस सफर में अगर हों सभी हमसफर,
फिर भला किस तरह दूर मंजि़ल रहे/
सबकी कश्ती किनारे को बढ़ती मग़र,
यों ही मिलता सभी को किनारा नहीं/
बेसहारा रहे आज तक इसलिये
क्योंकि इक दूसरे का सहारा नहीं/
अपने हाथों में ग़र अपनी पतवार हो,
अपनी बाँहों के नजदीक साहिल रहे//
हम अग़र अपनी कमजोरियाँ छोड़ दें, जीत ही जीत फिर हमको हासिल रहे।।
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पंडित "विशाल" दयानन्द शास्त्री

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