रमल (अरबी ज्योतिष) में बिना कुंडली के भविष्य कथन--- डा0 नरेन्द्र कुमार ‘‘भैया‘‘ रमलाचार्य   संसार में भविष्य कथन जानने और समाधान के वास्ते अनेक विधाओं का विद्वान समय-समय पर सहारा लिया करते हैं। जिसमें रमल (अरबी ज्योतिष) शास्त्र जीती जागती अनूंठी अति शीघ्र समस्याओं के मार्ग दर्शन समाधान करने वाली अनूंठी लुप्त प्राय पद्धति है।  
जिसमें प्राणी मात्र (स्थावर और जंगम) का पूर्ण लेखा-जोखा किसी घटना विशेष से पूर्व समय रहते हुए शोध कर खोजा जा सकता है। वैसे तो ज्योतिष की वर्तमान मंे औेर भी कई शाखाएॅ प्रचलित हंै । जिसमंे मूक प्रश्न, फाल नामा, केरल पद्वति, प्रश्न तन्त्र इत्यादि मुख्य है। रमल (अरबी ज्योतिष) शास्त्र में प्रश्नकर्ता यानी कि याचक की जन्म कुण्डली की कदापि आवश्यकता नहीं होती है। यहाॅ तक की नाम, घडी, वार, दिन, समय, और तो और पंचाग की भी आवश्यकता नहीं होती है। प्रश्नकर्ता मात्र रमलाचार्य के पास अपने अभिष्ठ कार्य कब, किसके माध्यम से, किस प्रकार होगा एवं अन्य तात्कालिक प्रश्न व वर्तमान समय किस ग्रह की प्रतिकूलता यानी कि अशुभता है और कब तक बरावर परेशानीमय रहेगी । किस शेयर्स में तेजी-मंदी कब तक और किस समय आएगी व इसमें कैसेे लाभ होगा या नहीं । साथ अन्य जीन्स में तेजी- मंदी कब तक रहेगी । इससे लाभ प्राप्त होगा या हानि इत्यादि को मन वचन और आन्तिरिक भावना से ले कर जाए। क्योंकि किसी भी ज्योतिष शास्त्र में श्रद्वा विश्वास का भाव प्रश्नकर्ता के मन में होेना अति आवश्यक है। रमल (अरबी ज्योतिष) शास्त्र में जीवन के प्रत्येक कठिन से कठिन समस्या केे मार्ग दर्शन और समाधान मात्र पासे डालकर किया जाता है। 

पासे को ेअरबी भाषा में ‘‘कुरा‘‘ कहते हैं। जो प्रश्नकर्ता के हाथ पर रखकर किसी विशेष स्थान पर डलवाए जाते हंै। उससे प्राप्त हंुई शकल (आकृति) को रमल (अरबी ज्योतिष) शास्त्र के गणित के मुताबिक प्रस्तार यानी कि जायचा बनाया जाता है। उस प्रस्तार के माध्यम से प्रश्नकर्ता के समस्त प्रश्नों के मार्ग दर्शन व समाधान गणित के द्वारा तत्काल ही प्राप्त होता रहता है। यह सारी प्रक्र्र्रिया प्रश्नकर्ता के रमलाचार्य के सम्मुख होने पर होती है। यदि प्रश्नकर्ता रमलाचार्य के सम्मुख ना होतो प्रश्नकर्ता के समस्त प्रश्नों के जबाव मय समाधान सहित ‘‘प्रश्न-फार्म‘‘ द्वारा भी किया जा सकता है। जो वर्तमान में एक नवीन शोध द्वारा तैयार किया गया है। इन दोनों प्रश्न करने की पद्वति द्वारा प्राप्त परिणााम एक ही आता है। इससे प्राप्त फलादेश में भिन्नता किसी प्रकार से कभी नहीं होती है। मगर गणितिय स्थिति पूर्णतहः भिन्न अवश्य ही होती है। 

आजकल भारतीय ज्योतिष द्वारा बनायी जा रही भविष्यकाल के जानने के वास्ते जन्म कुण्डली कुछ लोगों के पास नहीं है अथवा पूर्ण नहीं हैं तथा जिसके पास है भी तो पूर्ण रूप से सही नहीं हैै । जिनका फलादेश पूर्णतहः सही नहीं होता है। इस कारण से प्रश्नकर्ता पूर्ण मानसिक रूप से सन्तुष्ठ नहीं होता है, और ना ही उसे वांछित लाभ की प्राप्ति होती है मगर रमल (अरबी ज्योतिष) शास्त्र में जन्म कुण्डली आदि की आवश्यकता कदापि नहीं होेती है। रमल (अरबी ज्योतिष) शास्त्र का फलादेश इसके मुकाबले काफी सटीक प्राप्त होता है।  
रमल (अरबी ज्योतिष) में पासा डालने के उपरान्त प्रस्ताार यानी कि जायचा बनाया जाता हैं । प्रस्तार के 16 घर होते हैं। 13, 14, 15, 16 घर गवाहन यानी कि साक्षी घर होते हैं। प्रस्तार के 1, 5, 9, 13 घर अग्नि तत्व के होते हंै। 2, 6, 10, 14 घर वायु तत्व के होते हैं। 3, 7, 11, 15 घर जल तत्व के होते हैं और अन्तिम घर 13, 14, 15, 16 घर पृथ्वी तत्व के होते हैं।  
रमल (अरबी ज्योतिष) शास्त्र क्रे 16 शकलों (आकृतियों) को निम्न प्रकार से विभाजित किया गया है।  
नाम शकल नाम शकल 1- लहियान- 2- कब्जुल दाखिल 3- कब्जुल खारिज- 4- जमात 5- फरह- 6- उक्ला- 7- अंकिश- 8- हुमरा- 9- ब्याज- 10- नुस्तुल खारिज- 11- नुस्तुल दाखिल- 12- अतवे खारिज- 13- नकी- 14- अतवे दाखिल- 15- इज्जतमा- 16- तरीक-  
डाॅ0 नरेन्द्र कुमार ‘‘भैया‘‘ रमलाचार्य 
रमल (अरबी ज्योतिष) शोध संस्थान (रजि0)

3, महल खास, किला, भरतपुर (राजस्थान)
फोन-(05644) 22 3216 मो0-094142 68172 
Website-www.ramalarabicastrology.com
E-mail-narendrabhaiya 9@gmail.com
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पंडित "विशाल" दयानन्द शास्त्री

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