रमल ज्योतिष से जाने पुखराज रत्न भाग्योदय में सहायक---डाॅ0 नरेन्द्र कुमार ‘‘भैया‘‘ रमलाचार्य 


      रमल (अरबी ज्योतिष) शास्त्र के मुताबिक पुखराज रत्न गुरू ग्रह का अधिष्ठिता रत्न है। रमल (अरबी ज्योतिष) शास्त्र में गुरू ग्रह की दो शकलें (आकृतियाॅ) होती है। प्रथम लहियान दूसरी नुस्तुल दाखिल। प्रथम शकल लहियान शुभ खारिज हैे जो कि धनु राशि से सम्बन्धित रखती है। दूसरी नुस्तुल दाखिल शकल शुभ दाखिल है जो कि मींन राशि से सम्बन्धित रखती है। जिस जातक को रमल ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक गुरू ग्रह की प्रतिकूलता (अशुभता) चल रही हो उस जातक को पुखराज नग की अगॅूठी (मुद्रिका) विधि-विधान से धारण करनी चाहिए। जातक को रत्न धारण तब करना चाहिए। जब प्रश्नकर्ता रमलाचार्य के पास जाकर प्रश्न करें कि किस ग्रह की प्रतिकूलता (अशुभता) वर्तमान में चल रही है। 

यह प्रश्न पासे डालकर प्रस्तार बनाकर जिसे अरबी भाषा में ’’कुरा’’ कहते हैं। इन पासों को शुद्व पवित्र स्थान पर डलवाए जाते है। यदि प्रश्नकर्ता रमलचार्य के सम्मुख ना होतो एक नवीन शोध विषय के मुताबिक ’’प्रश्न-फार्म’’ के द्वारा भी यह कार्य किया जा सकता है। उक्त दोेनों प्रकार से किया गया प्रश्न का जबाव मय समाधान सहित एक ही आता है मगर गणितिय स्थिति भिन्न अवश्य है। रमल (अरबी ज्योतिष) शास्त्र में प्रश्नकर्ता का नाम, माता-पिता का नाम, घडी, वार, तिथि और तो और पंचाग व जन्म कुण्डली की आवश्यकता कदापि नहीं होती है।  
   
      पुखराज रत्न तीन प्रकार के रंगों में पाया जाता है। प्रथम सफेद, द्वितिय बसन्ती, तृतीय पीला। इन रंगों में हल्का पीला रंग का पुखराज सबसे श्रेष्ठ माना जाता है। रमल ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक बनाए गये प्रस्तार के प्रथम व सप्तम और दशम घर में अश्ुाभ ग्रह व अशुभ दृष्टि होतो उक्त रत्न पुखराज अवश्य ही तर्जनी अगॅूली में धारण करने का विधान है। पुखराज रत्न का वजन कितना होना चाहिए। इस बात का तय रमल (अरबी ज्योतिष) शास्त्र द्वारा प्रश्न करने पर आता है। 

पुखराज रत्न प्राण-प्रतिष्ठा कराकर शुभ-मुहूर्त में विधि विधान द्वारा धारण करने पर भाग्य की उन्नति व नवीन कार्यो में व आर्थिक, सामाजिक, आध्यात्मिक, मानसिक शान्ति, उन्नति साथ ही भविष्य उज्जवलता की ओर तथा आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होता है। साथ ही इच्छा शक्ति की प्रबलता में लाभ होता है। यदि प्रस्तार के सप्तम घर में ग्रहों की स्थिति विशेष अशुभ होतो दाम्पत्य जीवन में मधुरता स्नेह की कमी साथ ससुराल पक्ष द्वारा निरन्तर लाभ व स्नेह का ना होना व बरावर टकराव की स्थिति में लाभ प्राप्त करने के वास्ते और शुभ-विवाह के श्रीघ्र होने के ेवाबत् भी धारण किया जाता है, मगर पुखराज रत्न का असली होना अवश्य है। पुखराज असली हल्के पीले रंग का पारदर्शी होता है ।

      पुखराज रत्न फलोरिन और एल्युमीनियम से बनता है जब नमी हवाएॅ समुन्द्र में ग्रेनाईट, प्रेममेनाइट की शिलाओं ये टकराती है तब पुखराज रत्न बनता है । यदि रमल (अरबी ज्योतिष) शास्त्र के प्रस्तार के छठे घर में अशुभ स्थिति हो व ‘‘नजर-ए-मिकारना‘‘ होतो पीलिया रोग, तिल्ली रोग, जिगर की सूजन, पाचन तन्त्र की समस्त बीमारियों में भी यह बरावर लाभ प्राप्त कराता है। किसी भी रत्न को रमल (अरबी ज्योतिष) शास्त्र के मुताबिक बिना जानकारी किए कदापि धारण नहीं करना चाहिए। ऐसा मुख्य रूप से रमल ज्योतिष शास्त्र के विद्धानों का मत है। 
                           
                            

डाॅ0 नरेन्द्र कुमार ‘‘भैया‘‘ रमलाचार्य 
रमल (अरबी ज्योतिष) शोध संस्थान (रजि0)

3, महल खास, किला, भरतपुर (राजस्थान)
फोन-(05644) 22 3216 मो0-094142 68172 
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E-mail-narendrabhaiya 9@gmail.com
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पंडित "विशाल" दयानन्द शास्त्री

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