सादर नमन...विनम्र श्रद्धांजलि..
सूफी गायक और फेमस कव्वाल "अमजद साबरी" को...

रमजान के इस पाक और पवित्र महीने में अज्ञात बंदूकधारियों द्वारा एक पूर्वनियोजित हमले में पाकिस्तान के बेहतरीन कव्वालों में से एक अमजद साबरी की गोली मारकर हत्या कर दी। साबरी को रूह को छूने वाली सूफी गायिकी के लिए जाना जाता था।

मेरे पसंदीदा गायक में से एक अमजद साबरी जी का अंदाज सबसे जुड़ा था।। उनकी इबादत का तरीका लाजवाब और काबिले तारीफ था।।
सूफी कव्वाल अमजद साबरी सिर्फ भारत और पाकिस्तान ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में मशहूर थे।। अमजद की कव्वालियां ‘भर दो झोली’, ‘ताजदार-ए-हरम’ के साथ साथ और अन्य दूसरी सूफी कव्वालियां बेहद मशहूर हैं।।







45 साल के गायक और उनके एक सहयोगी कराची के लियाकतबाद 10 इलाके में कार में सफर कर रहे थे जब मोटरसाइकिल सवार अज्ञात बंदूकधारियों ने उनके वाहन पर गोलियां चलायीं जिसमें वे गंभीर रूप से घायल हो गए।
दोनों को अब्बासी शहीद अस्पताल ले जाया गया जहां साबरी ने दम तोड़ दिया। बाद में उनके सहयोगी की भी मौत हो गयी।

प्रसिद्ध कव्वाल गुलाम फरीद साबरी के बेटे अमजद साबरी का परिवार सूफी कला और सूफी कविता के क्षेत्र में अपने योगदान के लिए पूरे उपमहाद्वीप में मशहूर है।

साबरी की सबसे प्रसिद्ध और यादगार कव्वालियों में भर दो झोली, ताजदार-ए-हरम और मेरा कोई नहीं है तेरे सिवा शामिल हैं।
साबरी ने यूरोप और अमेरिका में कई कार्यक्रम प्रस्तुत किए थे। उन्हें गायिकी की आधुनिक शैली के लिए कव्वाली का रॉकस्टार कहा जाता था।

अमजद साबरी मशहूर साबरी ब्रदर्स के महान कव्वाल मकबूल साबरी के भतीजे थे।
पचास और साठ के दशक में मकबूल और उनके भाई गुलाम फरीद साबरी की कव्वाल जोड़ी दुनिया भर में साबरी ब्रदर्स के नाम से जानी जाती थी।

साबरी ब्रदर्स के नाम को अमजद साबरी बहुत खूबसूरती और जिंदादिली से आगे बढ़ा रहे थे।।

खुदा उन्हें जन्नत बक्शे।। 
यही मेरी इल्तजा और दुआ हैं।।
आमीन।। सुम्मा आमीन।।
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पंडित "विशाल" दयानन्द शास्त्री

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